मेरे बेटे को मुस्लिम होने के कारण निशाना बनाया जा रहाः इलियास
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जेएनयू में देशविरोधी नारेबाजी और उस पर मचे बवाल के बीच कन्हैया कुमार के बाद उमर खालिद का नाम लगातार सुर्खियों में है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां उमर को ही सारे कार्यक्रम का सूत्रधार मान रही हैं लेकिन मामले में मुकदमा दर्ज होते ही वह भूमिगत हो गया। पुलिस अभी तक उसका कोई सुराग नहीं लगा सकी है। उमर खालिद पर पुलिस का शिकंजा इसलिए भी कस रहा है कि जेएनयू में हुए विरोध प्रदर्शन के सभी आयोजनों में वह सबसे आगे नजर आ रहा है।
उमर के भूमिगत होने के बाद उसका परिवार सामने आया है, उसके पिता सैयद कासिम रसूल इलियास ने आरोप लगाया कि उसके बेटे को मुस्लिम होने और वामपंथ से जुड़ाव होने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। मीडिया भी उसे जबरन देशद्रोही साबित करने पर तुला है।
इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में सैयद इलियास ने खुलकर अपना पक्ष रखा। इलियास के मुताबिक तीन दशक पहले वह सिमी के सदस्य रहे हैं, पुलिस ने उनके अतीत के कारण ही उनके बेटे को गद्दार घोषित कर दिया गया है।
इलियास बताते हैं कि उन्होंने 1985 में ही सिमी को छोड़ दिया था तब उमर का जन्म भी नहीं हुआ था। और उस समय सिमी और उसके किसी सदस्य के खिलाफ एक मुकदमा भी दर्ज नहीं हुआ था। सिमी पर 2001 में राजग सरकार के दौरान प्रतिबंध लगा दिया गया था। राजनीति में सक्रिय इलियास वर्तमान में वेलफेयर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। जो साउथ दिल्ली के अब्दुल फजल एंक्लेव से संचालित होती है।
देश विरोधी कार्यक्रम करने का आरोपी है उमर खालिद
रोष से भरे इलियास का कहना है कि मेरे अतीत के कारण आप मेरे वामपंथी बेटे को गद्दार घोषित करना चाहते हैं, टीवी स्टूडियो में उसे निशाना बनाकर ही बहस की जा रही हैं। वो आरोप लगाते हैं कि उसे मुस्लिम नाम होने के कारण मीडिया का निशाना बनाया जा रहा है। वह गृहमंत्री पर भी आरोप लगाते हैं कि उनकी टिप्पणी के बाद ही मीडिया ने उनके बेटे को निशाने पर लिया।
बेटे उमर के बारे में इलियास बताते हैं कि वह घर में भी इस्लामिक प्रथाओं का विरोध करता है। वह किताबों का विरोध करता है, वह हर ज्वलंत मुद्दे पर बहस करना चाहता है। इसके चलते मेरे उससे मतभेद भी रहते हैं। वह इबादत, रोजा और घर की महिलाओं के पर्दे में रहने का भी विरोध करता है।
वह हमारे परिवार का इकलौता नास्तिक इंसान है, जो मुझे गुस्सा दिलाता है। लेकिन वह एक युवा है इसलिए उसकी सोच अलग हो सकती है। मेरे पारिवारिक दोस्त उसे पक्का वामपंथी और साम्यवादी कहते हैं।
इलियास के अनुसार जेएनयू में हुए प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने शुरूआत में उसका नाम आरोपी के तौर पर नहीं रखा था। लेकिन पुलिस उसकी तलाश देश विरोधी आयोजन करने वाले आयोजकों के तौर पर कर रही थी। कार्यक्रम का आयोजन करने वाले दस लोग थे उनके बेटे का नाम सातवें नंबर पर था लेकिन पुलिस के सबसे ज्यादा निशाने पर वही है।
उच्च शिक्षित है उमर खालिद का परिवार
वो मीडिया पर सवाल करते हैं कि जिस तरह मीडिया आज इस मुद्दे को उठा रहा है क्या आप उस पर यकीन कर सकते हैं। मेरे घरवाले डरे हुए हैं। वो नहीं चाहते मैं मीडिया में इंटरव्यू दूं, क्योंकि इसके बाद मुझे भी निशाना बनाया जा सकता है। लेकिन हमें बोलना होगा।
जामिया नगर के भीड़ भाड़ वाले इलाके में एक छोटे से अपार्टमेंट में रहने वाला उमर खालिद का परिवार अच्छा खास शिक्षित है। उमर ने अपनी पढ़ाई बनयान ट्री स्कूल से की, उसकी ग्रेजुएशन किरोडीमल कालेज से हुई। इसके बाद उसने 2009 में जेएनयू में प्रवेश लिया और वहां से एमए और एमफिल की।
फिलहाल वह जेएनयू से ही झारखंड के आदिवासियों की दशा पर पीएचडी कर रहा है। इलियास खुद भी कैमिस्ट्री से पीएचडी हैं। वहीं उमर की एक बहन अमेरिका की प्रतिष्ठित मैसाचुएट्स यूनिवर्सिटी में शिक्षक है।
जबकि दूसरी बहन दिल्ली के सेंट स्टीफन कालेज से पढ़ाई कर रही है। सबसे छोटी बहन 11वी कक्षा में पढ़ती है। इलियास बताते हैं कि उमर के शोध के विषय से प्रभावित होकर येल यूनिवर्सिटी के एक प्रोफेसर ने उसे अपने यहां पढ़ाई करने का प्रस्ताव दिया था। लेकिन उसने इंकार कर दिया।
बेटे को गद्दार की तरह पेश कर रहा है मीडिया
अमेरिका में रहने वाली उसकी बहन भी चाहती थी कि वह वहीं से पढ़ाई कर रहे लेकिन वह नहीं माना। वो चाहता है कि वो अपने देश में रहकर ही समाज के लिए कुछ करे। उमर के जैश ए मोहम्मद के मुखिया हाफिज से संबंध जोड़ने पर वह नाराजगी भरे शब्दों में कहते हैं कि हमारे घर में हर किसी का पासपोर्ट बना हुआ है मेरी छोटी बेटी का भी, लेकिन उमर का नहीं है। न ही उसने कभी बनवाया और वो उसके पाकिस्तान जाने की बात करते हैं।
वह आज तक कभी हवाईजहाज में भी नहीं बैठा। उसका सारा समय जंतर मंतर पर प्रदर्शनों में गुजरता है। जहां वह रोहित वेम्यूला, यूजीसी के विरोध और आदिवासियों या दलितों के मुद्दे को उठाता है।
आज मीडिया उसे और उसके पूरे परिवार को निशाना बना रहा है। मुझे नहीं पता अब वह कहां है। हमारा पूरा परिवार उसके लिए चिंतित है। मैं उसके लिए कानूनी लड़ाई लड़ना चाहता हूं। वो दुखभरे लहजे में कहते हैं कि इस देश की अदालत उनके बेटे को निर्दोष साबित कर भी दें तो शायद ही अब वह सामान्य जीवन जी पाए।
देशभर के मीडिया चैनल में उसके लिए मास्टरमाइंड और गद्दार जैसे शब्द इस्तेमाल किए जा रहे हैं। उसके भाई बहनों को सोशल मीडिया में कटू संदेशों का सामना करना पड़ रहा है। मैं उसके भविष्य के प्रति चिंतित हूं।