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'भूखे मर जाएंगे पर गांव नहीं लौटेंगे'

Mon, 16 Sep 2013 10:58 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो/शामली
अमर उजाला ब्यूरो/शामली Updated Mon, 16 Sep 2013 10:58 AM IST
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muzzafarnagar victims said no to return home

मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के समक्ष काफी दिनों से अधिकारियों के बेरुखी से नाराज पीड़ितों का सब्र का बांध टूट गया। पीड़ितों ने कहा कि सीएम साहब ट्रॉली नहीं, हमारे मकान जले हैं और इंसान मरे हैं।

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ये अफसर आपको सही बात नहीं बताएंगे। मुख्यमंत्री साहब, गांव में जाकर देखो, तब पता चलेगा हमारे साथ कितना जुल्म हुआ है। शरणार्थियों ने सीएम से चीखते हुए कहा कि वह यहां भूखों मरना पसंद करेंगे पर अपने गांव में नहीं जाएंगे।
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रविवार को कांधला के ईदगाह में शरणार्थियों का हाल जानने के बाद मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सभास्थल पर बने मंच से पीड़ितों को आश्वस्त किया कि उनके साथ इंसाफ होगा।
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मुख्यमंत्री के इतना कहते ही कि आपकी ट्रॉली जला दी गई, वहां बैठे मुस्लिम समाज के लोग भड़क गए। नाराज लोग अपनी जगह पर खड़े होकर हंगामा करने लगे और कहा कि सीएम साहब ये अफसर आपको सही बात नहीं बताएंगे।

ये सच्चाई को छिपाना चाहते हैं।  हमारी ट्रॉली नहीं जली, हमारे तो घर जला दिए गए। हमारे अपनों मार दिए गए। जंगलों में छिपकर वह रहे हैं।

नाराज लोगों ने सीएम से कहा कि यदि यकीन नहीं होता, तो हमारे गांव में जाकर खुद देखें, तो पता चल जाएगा कि उनके साथ कितना जुल्म हुआ है।

इस बात को लेकर वहां हंगामा खड़ा हो गया। कई लोगों ने अधिकारियों पर आरोप लगाते हुए सपा सरकार विरोधी नारेबाजी शुरू कर दी। मौलाना अरशद, मौलाना राशिद आदि ने नाराज लोगों को समझाकर उनके गुस्से को शांत किया।

सीएम ने जब उनसे कहा कि सरकार उनके जले हुए मकानों को बसाने के लिए योजना बनाकर काम करेगी, तो लोग फिर से बिफर पड़े। मुस्लिम समाज के लोग चीखने लगे कि सीएम साहब हम यहां भूखों मर जाएंगे पर गांव में वापस नहीं जाएंगे।


हमें तो कहीं और बसाने का इंतजाम करो। इस बात पर फिर से वहां हंगामा खड़ा हो गया। मौलाना ने भी गुस्साए लोगों को समझाया।

हालांकि, सरकार विरोधी नारेबाजी और हंगामा बंद नहीं होने पर मुख्यमंत्री अखिलेश माइक रखकर चल दिए। मुख्यमंत्री के जाने के बाद भी नाराज लोग सरकार के विरुद्ध नारेबाजी कर अपनी नाराजगी का इजहार किया।

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