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राहत कैंपों में बच्चों की मौत पर यूपी सरकार को फटकार
अमर उजाला, दिल्ली
Updated Thu, 12 Dec 2013 08:50 PM IST
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मुजफ्फरनगर दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बृहस्पतिवार को प्रभावित क्षेत्र में लगाए गए राहत कैंपों में ठंड की वजह से 40 से भी ज्यादा बच्चों की मौत पर गहरी चिंता जताते हुए तत्काल प्रभाव से राहत और उपचार के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया।
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अदालत ने स्पष्ट कहा कि शुक्रवार सुबह ही प्रदेश सरकार सभी जरूरी वस्तुएं कैंपों और प्रभावित लोगों को मुहैया कराए और 21 जनवरी को अगली सुनवाई तक रिपोर्ट पेश करे।
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चीफ जस्टिस पी सदाशिवम, जस्टिस रंजना प्रकाश देसाई व जस्टिस रंजन गोगोई की पीठ ने कहा कि हमने राहत कैंपों में बच्चों की मौत के मसले पर अखबारों में छपी खबरें पढ़ी हैं। यहां तक कि संसद में भी बच्चों की मौत पर चर्चा हुई थी।
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अदालत की ओर से कई आदेश जारी करने के बावजूद भी बच्चों की मौत हुई। मगर राज्य सरकार ने अदालत को इस बारे में सूचित भी नहीं किया। सर्वोच्च अदालत ने राज्य प्रशासन को मीडिया की खबरों से याचिका में जोड़े गए गंभीर अंशों की सच्चाई का पता लगाने को भी कहा है।
पीठ के समक्ष यूपी सरकार की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने कहा कि कथित तौर पर लापरवाही करने वाले नोडल अफसरों के खिलाफ प्राधिकार बहुत ही सख्त हैं और इस पर राज्य सरकार जवाब देगा।
उन्होंने कहा कि बहुत सी याचिकाएं राजनीति समेत कई एजेंडे से प्रेरित हैं, लेकिन राज्य सरकार ने इन्हें कभी विरोधाभासी नहीं माना और वह इन याचिकाओं के जवाब देने को तत्पर है।
उधर, एक एनजीओ की ओर से पेश हुए अधिवक्ता कॉलिन गोंसॉलविस ने 50 बच्चों की मौत का दावा किया। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से बच्चों की मौत के मसले पर जांच की गई है और वह इस संबंध में विस्तार से जानकारी मुहैया कराएंगे।
सर्वोच्च अदालत ने दंगा मामले से जुड़े अन्य किसी मुद्दे पर विचार करने से इनकार करते हुए कहा कि यह बच्चों की मौत से जुड़ा मुद्दा विचारणीय है।
याद रहे कि अदालत ने मुजफ्फरनगर, शामली व आसपास के अन्य इलाकों में हुए सांप्रदायिक दंगों के मसले पर राहत व पुनर्वास के लिए राज्य सरकार को तत्काल कदम उठाने को कहा था। अब अदालत इस मुद्दे पर सभी पक्षकारों की दलीलों पर 21 जनवरी को गौर करेगी और यह तय करेगी कि इस मामले में आगे क्या कदम उठाया जाए।
यूपी सरकार ने लापरवाही को स्वीकारा
सर्वोच्च अदालत में उत्तर प्रदेश सरकार ने राहत कैंपों में हुई मौतों पर चिकित्सक दल की लापरवाही को स्वीकार किया। लेकिन 40 से भी ज्यादा बच्चों की मौत के आंकड़े को नहीं स्वीकारा। प्रदेश सरकार ने एक संप्रदाय को लाभ पहुंचाने संबंधी अधिसूचना को वापस लेने के बारे में अदालत को बताया और स्पष्ट किया कि मुआवजे के संबंध में नया आदेश जारी कर दिया गया है।
सुप्रीम कोर्ट में यूपी सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने लोई गांव के राहत कैपों में तैनात किए गए चिकित्सकों के दल की लापरवाही को स्वीकार किया। सात लोगों की मौत होने से संबंधित रिपोर्ट भी अदालत मे पेश की, जिसमें चार बच्चे और तीन महिलाएं हैं।
लेकिन इन मौतों के संबंध में कराई गई जांच के निष्कर्ष में रिपोर्ट में कहा गया है कि सभी मौतें बीमारी या उपचार के दौरान हुई हैं। इसमें लापरवाही सामने आई है और चिकित्सकों को चेतावनी दी गई है। राज्य सरकार की ओर से विस्तृत रिपोर्ट और दस्तावेज अदालत में दायर किए गए हैं। इनमें दर्ज की गई एफआईआर, मुआवजे, राहत कैंपों समेत अन्य के संबंध में अदालत को सूचना मुहैया कराई गई है।