फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   muzaffarnagar riots question on akhilesh leadership

अब अखिलेश के नेतृत्व पर उठे सवाल

Wed, 11 Sep 2013 08:42 AM IST
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली
धीरज कनोजिया/नई दिल्ली Updated Wed, 11 Sep 2013 08:42 AM IST
विज्ञापन
muzaffarnagar riots question on akhilesh leadership

मुजफ्फरनगर के दंगों पर काबू पाने में सपा सरकार की नाकामी सामने आने के बाद अब अखिलेश यादव के नेतृत्व पर भी सवाल उठने लगे हैं।

विज्ञापन


अखिलेश की राजनीतिक अपरिवक्ता की बात न केवल विपक्ष बल्कि सपा के अंदरखाने से भी उठनी शुरू हो गई हैं।

बतौर मुख्यमंत्री अखिलेश के शासन में पिछले डेढ़ साल के दौरान एक के बाद एक दंगे और खराब होती कानून व्यवस्था ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी चिंता में डाल दिया है।
विज्ञापन


जनता में सपा के गिरते ग्राफ को देखते हुए अखिलेश विरोधी गुट के हौसले भी बुलंद हो गए हैं। नेताजी मुलायम सिंह यादव पर प्रदेश सरकार की कमान कसने का दबाव अंदरखाने बढ़ाने की मुहिम शुरू हो गई है। इसी के चलते मुलायम को खुद फ्रंट में आना पड़ा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


पिछले डेढ़ साल के दौरान कई बार मुलायम सिंह द्वारा सरकार का रिमोट कंट्रोल अपने हाथ में लेने के बाद सरकार का नेतृत्व कमजोर दिखने लगा है।

आगरा में सपा की कार्यकारिणी में इस मसले पर भी बात उठ सकती है कि यूपी के हालात कहीं नेताजी के मिशन दिल्ली की राह में रोड़े न अटका दें।

सपा सरकार के दामन पर लगे अपराध और दंगों के दाग को साफ करने की कसरत शुरू हो गई है लेकिन लोकसभा चुनाव में जीत हासिल कर केंद्र में नेताजी को सम्मानजनक पद पर काबिज करने का सपना अब पार्टी के आला नेताओं को दूर की कौड़ी लगने लगा है।

साथ ही सिर उठा रहे पार्टी का अंदरूनी घमासान भी आने वाले दिनों में सरकार के लिए नई मुसीबत बनने जा रहा है।

दरअसल, अखिलेश की ताजपोशी का विरोध कर रहा खेमा अब फिर सक्रिय होने लगा है। सूत्रों के मुताबिक इस खेमे ने नेताजी पर अखिलेश सरकार की नकेल कसने की मांग करनी शुरू कर दी है।

सूत्रों का कहना है कि खेमे ने सपा सुप्रीमो को कहना शुरू कर दिया है कि अगर उनको दिल्ली का रास्ता मजबूत करना है तो उनको पहले लखनऊ का रास्ता मजबूत करना होगा।

अखिलेश सरकार के दौरान 100 से ज्यादा दंगे होने की बात है। साथ ही सीओ हत्याकांड में पूर्व मंत्री राजा भैया को लेकर उठे सवाल और खराब कानून व्यवस्था का सवाल बड़ा बन गया है।

पार्टी के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अभी तक सपा सरकार के कई मंत्री निशाने पर थे मगर दंगों के बाद खुद अखिलेश के नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर सवाल उठने शुरू हो गए है।


लिहाजा, खुद मुलायम सिंह पर दबाव बढ़ता जा रहा है क्योंकि भारी विरोध के बावजूद उन्होंने ही अखिलेश को मुख्यमंत्री की कुर्सी सौंपी थी। अखिलेश पर बढ़ते दबाव का ही नतीजा है कि उनके बचाव में पार्टी को उतरना पड़ा।

सपा महासचिव रामगोपाल यादव कहते हैं कि अखिलेश ने सही समय पर सेना बुलाकर ठीक निर्णय लिया है। सरकार तेजी से फैसले ले रही है। एक दो दिन में हालात काबू में हो जाएंगे।

उनकी ओर से दावा किया जा रहा है कि अखिलेश का सरकार पर पूरा नियंत्रण है।

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed