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हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन बचाएगा?
गाजियाबाद, अमर उजाला
Updated Tue, 10 Sep 2013 12:07 PM IST
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पड़ोसी जिले मुजफ्फरनगर जैसे हालात गाजियाबाद में भी कई बार बने। माहौल बिगड़ा, दंगे की चिंगारियां भी उठीं, मगर आग भड़कने से पहले ही बुझा ली गई।
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गाजियाबाद के लोगों ने हर बार सौहार्द की मिसाल पेश की है। मतभेद भुलाकर एक-दूसरे को गले लगाया है। गाजियाबाद को दंगे के दंश से संभालकर रखा है। मुजफ्फरनगर दंगे की आग में धधक रहा है।
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अफवाहें यहां भी उड़ रही हैं, लेकिन गाजियाबाद वासी हर बार की तरह इस बार भी अपने गाजियाबाद को संभालकर रखें...। अफवाहों पर ध्यान न दें और भाईचारा और आपसी सौहार्द बनाए रखें।
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155 खुराफातियों पर पुलिस की नजर
खुफिया विभाग ने शासन को उन 155 खुराफातियों की रिपोर्ट भेजी है, जिनसे माहौल बिगड़ने का खतरा है। सूत्रों के मुताबिक, इनमें 72 लोगों पर पुलिस की खास नजर है, उनकी राउंद द क्लॉक निगरानी की जा रही है।
शहर और देहात में 112 गांव, मोहल्ले और कालोनियां चिह्नित की गई हैं, जो संवेदनशील हैं। वहां अतिरिक्त चौकसी बढ़ाई गई है।
इसके अलावा एसएसपी ने जिले के करीब 300 संभ्रांत और जिम्मेदार लोगों को सीआरपीसी की धारा 39 के तहत नोटिस जारी किया है।
कोई भी सांप्रदायिक झगड़ा होने पर उन्हें पुलिस को सूचना देनी होगी। ये उनकी जिम्मेदारी है। जनपद में ऐसा नोटिस पहली बार जारी किया गया है।
कब-कब संभाली बिगड़ती फिजा
9 अगस्त 12: शहर कोतवाली के डासना गेट में लड़की से छेड़छाड़ के बाद दो समुदाय के लोग आमने-सामने आ गए। मारपीट और हंगामा हुआ। मगर दोनों ही समुदाय के लोगों ने सौहार्द का परिचय दिया और शहर की फिजा खराब होते-होते बची गई।
14 सितंबर 2012: मसूरी में धार्मिक ग्रंथ के पन्ने फेंके जाने पर बवाल हुआ। थाने में तोड़फोड़ हुई, मगर यह बवाल लोगों की समझदारी से सांप्रदायिक रंग में नहीं रंगा। पुलिस और जनता के बीच का झगड़ा बनकर ही रह गया।
24 अगस्त 13: मसूरी के इकला गांव में एक धार्मिक गुरु की पिटाई के बाद सांप्रदायिक झगड़े जैसा माहौल पैदा हो गया, लेकिन स्थानीय लोगों ने भाईचारा कायम रखा और मामले की आपस में ही पंचायत कर शांत करा दिया।
20 अगस्त 13: धौलाना में लड़की को अगवा किए जाने के बाद मामले ने इस कदर तूल पकड़ा कि हाईवे जाम कर दो समुदाय आमने-सामने आ गए, लेकिन क्षेत्र के लोगों ने इस आग को धधकने से पहले ही ठंडा कर दिया।
6 सितंबर 13: नंदग्राम में एक धार्मिक गुरु की पिटाई की अफवाह के बाद दो समुदाय आपस में भिड़ गए, लेकिन स्थानीय लोग न सिर्फ आपस में गले मिले, बल्कि एक-दूसरे के धार्मिक स्थल पर जाकर सौहार्द की मिसाल भी पेश की।