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महीनों जारी रह सकती है दंगे की यह आग
गुंजन कुमार/नई दिल्ली
Updated Tue, 10 Sep 2013 12:03 AM IST
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उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में भड़की सांप्रदायिक उन्माद की आग महीनों जारी रह सकती है।
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दंगे की आग शहर की सीमा पार कर गांवों में पहुंचने से केंद्र सरकार बेहद चिंतित है। केंद्र का मानना है कि गांवों तक पहुंची उन्माद की आग को बुझाने में लंबी मशक्कत करनी पड़ेगी।
उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी की केंद्र को भेजी गई रिपोर्ट में दंगे के कई नए और जटिल पहलुओं पर गंभीर चिंता जताई गई है।
रिपोर्ट में केंद्र को और खराब हालात के प्रति सचेत किया गया है। केंद्र को सलाह दी गई है कि यह दंगा तत्काल तभी थम सकता है जब सभी राजनीतिक पार्टियां एक दूसरे पर आरोप लगाने के बजाए राजनीति से ऊपर उठकर एक साथ वहां के लोगों से दंगा खत्म करने की गुहार लगाएं।
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अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली सपा सरकार के अब तक के कार्यकाल में हुए सांप्रदायिक दंगों में मुजफ्फरनगर का हालिया दंगा केंद्र सरकार की निगाह में भी सबसे गंभीर चुनौती बन गया है।
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इसकी वजह प्रदेश प्रशासन की नाकामी की वजह से दंगों का गांवों तक पहुंच जाना है। केंद्र सरकार के मुताबिक गांव के दंगों को पूरी तरह रोकने में कम से कम तीन से चार महीने का वक्त लग जाएगा।
सांप्रदायिक समीकरण जटिल
गृहमंत्रालय के उच्चपदस्थ सूत्रों ने अमर उजाला को बताया कि राज्य और स्थानीय प्रशासन ने दंगे के इस हद तक फैलने के सभी संकेतों को नजरअंदाज किया।
सूत्रों के मुताबिक मुजफ्फरनगर के आसपास करीब तीन हजार गांव हैं जहां सांप्रदायिक समीकरण काफी जटिल हैं। हरेक गांव में सेना और पुलिस की तैनाती नामुमकिन है।
लिहाजा एक गांव की मौत का बदला दूसरे गांव में लेने का सिलसिला शुरू होने की पूरी आशंका है। यही वजह है कि दंगे को रोकने में कई महीने लग सकते हैं।
राज्यपाल ने उठाई उंगली
राज्यपाल बीएल जोशी की केंद्र को भेजी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि दंगे की शुरुआत के बाद राजनीतिक नेतृत्व और स्थानीय प्रशासन ने शहरों और गांवों की पीस कमेटी जैसे मूलभूत कदम भी नहीं उठाए। अगर समय रहते कदम उठाए गए होते तो दंगों को शहर में ही काबू कर लिया जाता।
बदल जाती है दिनचर्या
पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हालात पर नजर रख रहे गृहमंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि अक्सर दंगों से पहले इन इलाकों में अल्पसंख्यक समुदाय के लोग अपने घरों के लिए खाने पीने की जरूरी चीजें जरूरत से ज्यादा खरीदने लगते हैं।
इसके अलावा अस्पतालों में इस समुदाय की महिलाएं आना कम कर देती हैं। सूत्रों के मुताबिक यह प्रतिक्रिया तनाव फैलने के एक से दो दिन के भीतर ही होने लगती है जिसे स्थानीय खुफिया यूनिट के लिए भांपना मुश्किल नहीं। लेकिन प्रशासन इन बातों को भी नहीं भांप पाया।
मंत्रालय इस बात पर मंत्रणा कर रही है कि केंद्र इस हालात के निबटने के लिए सभी राजनीतिक पार्टियों को वहां ले जाकर लोगों से अपील करने का निर्देश दे।