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यूपी: दंगों के बाद कुछ ऐसे जागी सरकार

Mon, 23 Sep 2013 08:41 AM IST
विजय गुप्ता/नई दिल्ली
विजय गुप्ता/नई दिल्ली Updated Mon, 23 Sep 2013 08:41 AM IST
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muzaffarnagar riots centre call prevention of communal and targeted violence bill

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पिछले दिनों हुई सांप्रदायिक हिंसा के बाद केंद्र को एक बार फिर सांप्रदायिक हिंसा बिल (प्रिवेंशन ऑफ कम्युनल एंड टारगेटेड वायलेंस बिल) 2011 की याद आ गई है।

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सोनिया गांधी की अध्यक्षता वाले राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (एनएसी) के अहम सुझावों के आधार पर गृह मंत्रालय ने इस बिल को तैयार किया था, लेकिन कानून मंत्रालय के विरोध के चलते यह ठंडे बस्ते में पड़ा रह गया।
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अब सरकार एक बार फिर इसके प्रारूप में संशोधन कर आगामी शीतकालीन सत्र में इसे पेश करने की तैयारी में जुट गई है।

इस संबंध में अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री के. रहमान खान ने दो बार गृह मंत्री से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा कर चुके हैं।

सूत्रों का कहना है कि यूपी के दंगों से पूर्व विवाद में रहे सांप्रदायिक हिंसा बिल को यूपीए सरकार ने ठंडे बस्ते में रख दिया था।

दंगाइयों की हिंसा में अल्पसंख्यकों को लक्षित आक्रमणों से सुरक्षित रखने के उद्देश्य से लाए गए इस बिल के मौजूदा प्रारूप को गृह मंत्रालय ने तैयार किया था, लेकिन कानून मंत्रालय के विरोध के चलते यह बिल आगे नहीं बढ़ सका। पुराने बिल में केंद्र और राज्य सरकारों को कुछ कर्तव्य बताए गए थे।
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धार्मिक एवं भाषाई अल्पसंख्यकों, अनुसूचित जाति एंव अनुसूचित जनजाति के खिलाफ भड़की हिंसा के समय इस कानून के उपयोग की बात कही गई है।

बिल के मौजूदा प्रारूप पर कानून मंत्रालय का मानना था कि इस कानून के प्रावधानों को और मजबूत बनाने की जरूरत है। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस कानून से राज्य सरकार के अधिकारों में किसी तरह का अतिक्रमण न हो।


इन आपत्तियों को देखते हुए ही केंद्र ने राज्यों के साथ और अधिक विचार करने के उद्देश्य से इस बिल को अगली सरकार के गठन तक के लिए टाल दिया था।

परंतु यूपी के दंगों के चलते एक बार अल्पसंख्यक सियासत के दबाव में इस बिल को सरकार फिर से ठंडे बस्ते से बाहर निकाल रही है। इस दफा अल्पसंख्यक मंत्रालय और गृह मंत्रालय मिल कर बिल के प्रारूप में संशोधन करेंगे।

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