'पूर्व पीएम' का वंशज बता बेचा आधा मुजफ्फरनगर!
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भूमाफियाओं के फर्जीवाड़े का शिकार आम आदमी अक्सर हो जाता है। इस बार उन्होंने आम आदमी के बजाय सरकारी अमले पर हाथ डाल दिया है। पाकिस्तान का पहले प्रधानमंत्री का वंशज होने का दावा कर रहे दो पुरुषों और दो महिलाओं ने आधे मुजफ्फरनगर पर ही अपना दावा ठोंक दिया। उन्होंने फर्जी तरीके से डीएम की कोठी परा दावा किया और उसकी खरीदफरोख्त कर डाली।
उन्होंने जिले के गन्ना शोध संस्थान, कंपनी बाग, रेलवे प्लेटफार्म, केंद्रीय विद्यालय, एसडी कॉलेज समेत अनेक सरकारी जमीनों की खरीद-फरोख्त भी की। हालांकि मामले में मुकदमा दर्ज होने के बाद सभी भूमिगत हो गए।
फर्जीवाड़े में शामिल सरकारी जमीन की कीमत 6.74 अरब रुपए आंकी जा रही है। मुजफ्फरनगर की इम्तियाज बेगम व तीन अन्य ने खुद को पाकिस्तान के पहले प्रधानमंत्री लियाकत अली खान का वंशज बताया है। बंटवारे से पहले 1926 से 1940 तक लियाकत अली खान प्रांतीय विधान परिषद के सदस्य थे। हालांकि बंटवारे के बाद वह पाकिस्तान चले गए।
लियाकत का वंशज होने का दावा कर रहे आरोपी
लियाकत अली खान का वंशज होने का दावा कर रहे जमशेद अली, खुर्शीद अली, मुमताज बेगम और इम्तियाज बेगम का कहना है कि मुजफ्फरनगर में लियाकत अली खान की काफी संपत्ति थी। वह जब पाकिस्तान चले गए तो ये संपत्ति उनके भतीजे उमर दराज अली को मिल गई। दराज के बाद संपत्ति उनके बेटे ऐजाज को हस्तानातंरित हो गई।
जमशेद, खुर्शीद, मुमताज और इम्तियाज ने खुद को ऐजाज अली की संतान बताया।
2003 मे उन्होंने एक डीड तैयार कराई और खुद को लियाकत अली खान का वंशज बताया और उनकी संपत्तियों पर दावा किया। एक फर्जी डीड तैयार उन्होंने संपत्ति अपने नाम कर ली और बाद में उसमें तीन और लोगों को शामिल कर लिया। उत्तर प्रदेश राजस्व परिषद को उन्होंने याचिका भी भेज दी।
ये संपत्तियां मुजफ्फरनगर के लगभग आधे हिस्से के बराबर है। दो सप्ताह पहले मुजफ्फरनगर के जिलाधिकारी के पास जब मामले को देखने को आदेश आया तो उन्होंने संपत्ति के दावे को ही फर्जी बता दिया।
आरोपियों के खिलाफ तहसीलदान ने दी तहरीर
प्रशासन ने दावा किया पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री रहे मोहम्मद लियाकत अली का वारिस बनकर फर्जी डीड के जरिए मुजफ्फरनगर की संपत्तियों की खरीदफरोख्त की साजिश की गई। जिले के तहसीलदार सदर ने आरोपियों के खिलाफ नामजद तहरीर दे दी है।
जिन संपत्तियों पर दावा किया गया है, उनमें जिलाधिकारी की कोठी भी शामिल है। जिलाधिकारी का आवास करीब दस बीघा भूमि में है। जिले के गन्ना शोध संस्थान की सैकड़ों बीघा भूमि पर भी दावा किया गया है। कंपनी बाग, राजकीय इंटर कॉलेज छात्रावास, एसडी इंटर कॉलेज और प्रेमपुरी के नदी रोड स्थित कब्रिस्तान का को भी आरोपियों ने अपनी मिल्कियत बताया है।
जिन जमीनों पर दावा किया गया है से सरकारी और सार्वजनिक हित से जुड़ी हैं। पूरा मामला संज्ञान में आने पर एडीएम वित्त एवं राजस्व रामकिशन शर्मा ने जांच बैठा दी। डीएम ने मामले की रिपोर्ट शासन को भेज दी है।
यूपी सरकार के मंत्री का भतीजा है एक आरोपी
तहसीलदार की ओर से दी गई तहरीर में सात लोगों को नामजद किया गया है, जिनमें जमशेद अली खान, खुर्शीद अली, मुमताज बेगम, इम्तियाज बेगम निवासी खालापार ने खुद को लियाकत अली का वारिस दर्शाया।
उन्होंने बाद में राजीव अग्रवाल निवासी जवाहर कॉलोनी, संजय स्वरूप कामाख्या स्टील एवं रंजन मित्तल को डीड में शामिल कर लिया।
आरोपियों में संजय स्वरूप प्रदेश के नगर विकास राज्यमंत्री चितरंजन स्वरूप के सगे भतीजे हैं। तहसीलदार के मुताबिक वर्तमान में सर्किल रेट के अनुसार उपनिबंधक सदर तहसील से प्राप्त रिपोर्ट में बेची गई सरकारी संपत्ति की कुल कीमत छह अरब 74 करोड़ 92 लाख तीन हजार रुपये आंकी गई है।
एक सौ रुपए के स्टांप पर किया अरबों का सौदा
प्रशासन बताया कि डीएम की कोठी से लेकर रेलवे प्लेटफार्म तक की अरबों की जमीन का सौदा मात्र एक सौ रुपये के स्टांप पर कर दिया गया। पाकिस्तान के प्रथम प्रधानमंत्री रहे नवाब लियाकत अली के कथित वारिसों ने पहली पार्टनरशिप डीड एक सौ रुपये के स्टांप पर बनाई थी।
बाद में शहर की तीन हस्तियों को 500 रुपये के स्टांप पर डीड का हिस्सेदार बना दिया गया। सार्वजनिक संपत्तियों को खुर्द-बुर्द करने की योजना में न स्टांप खरीदे गए और न ही रजिस्ट्री हुई। मुकदमा दर्ज होने के बाद पुलिस ने मामले की तहकीकात शुरू कर दी है। आरोपी भी भूमिगत हो गए हैं।
सरकारी संपत्तियों को हड़पने के गोलमाल में खरीद-फरोख्त के तरीके में भी अजीबोगरीब हथकंडे अपनाए गए। प्रशासन ने साजिश का पर्दाफाश करते हुए जांच कराई, तो जिन संपत्तियों पर मालिकाना हक का दावा किया गया है, उनमें शहर की 104 संपत्तियां हैं।
डीएम आवास, गन्ना शोध संस्थान, केंद्रीय विद्यालय, राजकीय इंटर कालेज, रेलवे प्लेटफार्म समेत ज्यादातर संपत्तियां सार्वजनिक हित की हैं। मामले की जांच कर रहे एडीएम वित्त एवं राजस्व रामकिशन शर्मा के मुताबिक पार्टनरशिप डीड संपत्ति के वास्तविक मालिकों में हो सकती है। अन्य कोई भी संपत्ति बिना स्टांप और रजिस्ट्री के बेची या खरीदी नहीं जा सकती। शहर के काफी बड़े हिस्से को हथियाने के लिए जो फर्जीवाड़ा किया गया है, वह कानूनी तौर पर असंवैधानिक है।
600 रुपये के स्टांप पर बेच दी 6 अरब की संपत्ति
छानबीन में यह सामने आया है कि पाक के पूर्व पीएम लियाकत का वारिस बनकर एक सौ रुपये के स्टांप पर एक पार्टनरशिप डीड बनाई गई। खालापार के वाशिंदे एजाज अली खान के बेटों जमशेद अली एवं खुर्शीद अली तथा बेटियों मुमताज और इम्तियाज बेगम ने डीड बना ली।
तीन माह बाद दूसरी पार्टनरशिप डीड एक मई 2003 को 500 रुपये के स्टांप पर तैयार की गई। असली खेल यहीं से शुरू हुआ, जब नई डीड में जमशेद अली को छोड़कर बाकी भाई-बहनों का 25-25 प्रतिशत हिस्सा राजीव अग्रवाल, रंजन मित्तल और संजय स्वरूप के नाम कर दिया गया।
एडीएम ने बताया कि 6.74 अरब की इस जमीन की खरीदारी की प्रक्रिया में सिर्फ 600 रुपये का खर्च आया। जिले की सरकारी संपत्तियों को गैरकानूनी तरीके से कब्जाने के लिए यह पूरा षड्यंत्र रचा गया था।
डीएम निखिलचंद्र शुक्ला ने कहा कि शहर की सरकारी संपत्तियों पर काबिज होने के फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों को बख्शा नहीं जाएगा। शासन को पूरे मामले की रिपोर्ट भेजी जा रही है, जिसमें उच्च स्तरीय कमेटी गठित कर जांच कराने की मांग की जाएगी।