मुजफ्फरनगर: एक साल बाद भी नहीं मिटी दिलों की दूरी
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बात 27 अगस्त 2013 की की है। दोपहर डेढ़ बजे तक कवाल गांव में सब कुछ सामान्य था। चौराहे पर चहल-पहल थी। अचानक कुछ युवकों में संघर्ष का शोर सुनाई पड़ा। शानवाज को चाकू लगा। थोड़ी देर में उसकी मौत हो गई।
इसी दौरान भागते सचिन और गौरव को भीड़ ने घेर लिया। दोनों को पीटकर मार डाला गया। कानून ने शिकंजा कसा तो सियासत आड़े आ गई। आनन-फानन में हिरासत में लिए गए कुछ आरोपियों को छोड़ दिया गया।
रातोंरात डीएम-एसएसपी के तबादले कर दिए गए। हालात दिन-ब-दिन और बिगड़ते गए। इसी दरमियान न्याय की मांग को लेकर पंचायतों का सिलसिला शुरू हो गया।
पहले खालापार के शहीद चौक पर 30 अगस्त को मुसलिमों ने जुमे की नमाज के बाद प्रशासन को ज्ञापन दिया। इसी प्रतिक्रिया में नंगला मंदौड़ में ममेरे भाइयों को श्रद्घांजलि देने के नाम पर भीड़ जुटाई गई। परदे के पीछे से भाजपा ने मोर्चा संभाला।
रात के अंधेरे में बाहर निकलते लगता है डर
कानून को धता बताकर भीड़ जुटी। तलवारें, फरसे और लाठी-डंडे लेकर पहुंचे ग्रामीणों को देख अनहोनी का अंदेशा बढ़ गया था। अवाम के रुख को देख भाकियू ने भी पीछे खींचे कदमों को एकाएक आगे बढ़ा दिया।
सात सितंबर की पंचायत खत्म होते-होते जिलेभर में खून खराबा शुरू हो गया। इस खूनी हिंसा में 64 से अधिक बेगुनाहों की जानें चली गईं। सपा सरकार ने मुआवजे का मरहम लगाने में कोई कंजूसी नहीं बरती। मृतक आश्रितों को सरकारी नौकरी दी गई।
एक साल गुजर गया। बिगड़े हालात कुछ सुधरे भी, लेकिन दिलों के जख्म अब भी हरे हैं। भरोसा ऐसा टूटा कि लोग एक-दूसरे के दुख-दर्द में शामिल होने से मुंह मोड़ने लगे। अमन-चैन पसंद लोग भी बेबश हैं।
कवाल की बदनामी इस कदर हुई कि लोग यहां से रिश्ता जोड़ने में भी गुरेज करने लगे। माहौल तनाव में लिपटा हुआ है। रात के अंधेरे में कोई बाहर नहीं निकलता। ऐहतियातन पीएसी की गारद सालभर से तैनात है।
पढ़िए टाइमलाइन: कब क्या हुआ
पहला दिन: 27 अगस्त: जानसठ के कवाल गांव में बाइक टकराने को लेकर झगड़ा। शाहनवाज की मौत के बाद भीड़ ने सचिन और गौरव की निर्मम हत्या की। तत्कालीन डीएम सुरेंद्र सिंह और एसएसपी मंजिल सैनी का तबादला।
दूसरा दिन: 28 अगस्त: अंतिम संस्कार से लौट रही भीड़ ने कवाल में की आगजनी और तोड़फोड़। एक संप्रदाय के घरों में आग लगाई। वाहन फूंके गए। एडीजी कानून व्यवस्था अरुण कुमार ने घटनास्थल का दौरा किया।
तीसरा दिन: 29 अगस्त: तीसरे दिन दोनों पक्षों में पथराव। पुलिस ने भी कई राउंड फायर किए। कवाल के मंदिर में पुजारी के कमरे से सामान चोरी। महिलाओं के साथ बदसलूकी।
चौथा दिन: 30 अगस्त: खालापार के शहीद चौक पर जुमे की नमाज के बाद भीड़ जुटी। तत्कालीन बसपा सांसद कादिर राना, पूर्व गृह राज्यमंत्री सईदुज्जमां, चरथावल विधायक नूरसलीम राना, सपा नेता शाहिद सिद्दकी और मीरापुर विधायक मौलाना जमील समेत मुस्लिम नेता भी पहुंचे।
पांचवां दिन : 31 अगस्त: प्रशासन के प्रतिबंध और भाकियू के हाथ खींच लेने के बावजूद 40 हजार से अधिक लोग नंगला मंदौड़ पंचायत में पहुंचे। गुस्साई भीड़ ने खटीमा मार्ग से गुजर रहे अमरोहा के परिवार पर हमला किया। कार में लगा दी आग।
कवाल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम: एडीजी
मलिकपुरा में बृहस्पतिवार को होने वाली सचिन-गौरव की पुण्यतिथि कार्यक्रम के मद्देनजर एडीजी कानून व्यवस्था मुकुल गोयल ने शहर में पहुंचकर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। एडीजी ने कहा कि कवाल में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम रहेंगे। मंगलवार सुबह करीब 10.30 बजे एडीजी कानून व्यवस्था मुकुल गोयल और आईजी मेरठ जोन आलोक शर्मा महावीर चौक स्थित सिंचाई विभाग के डाक बंगले पर पहुंचे।
वहां पुलिसकर्मियों से सलामी लेने के बाद उन्होंने एसएसपी एचएन सिंह, एसपी सिटी श्रवण कुमार, एसपी क्राइम राकेश कुमार जौली और सीओ जानसठ मुकेशचंद मिश्र के साथ मीटिंग कर कवाल प्रकरण की जानकारी ली।
उन्होंने मलिकपुरा में सचिन-गौरव की पुण्यतिथि पर होने वाले कार्यक्रम की जानकारी लेते हुए अफसरों को मुस्तैदी के साथ कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिले में कानून व्यवस्था को लेकर किसी तरह की चूक नहीं की जाएगी। परिजनों ने व्यक्तिगत बरसी मनाने की बात कहते हुए लोगों से शांति बनाए रखने की अपील भी की है, जो सराहनीय पहल है।