मुजफ्फरनगर दंगा: यूपी सरकार को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

अमर उजाला, दिल्ली Updated Fri, 22 Nov 2013 12:57 AM IST
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मुजफ्फरनगर दंगा पीड़ितों के लिए मुआवजे की नीति में भेदभाव को लेकर बृहस्पतिवार को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़ी फटकार लगाई।
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कोर्ट ने राज्य सरकार को तत्काल पुरानी अधिसूचना वापस लेकर नई अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।
गौरतलब है कि राज्य सरकार की ओर से दंगा पीड़ितों के मुआवजे के संबंध में जारी अधिसूचना में सिर्फ मुसलिम परिवारों का जिक्र किया गया था। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी आपत्ति जताई।
कोर्ट ने कहा कि मुआवजे का हकदार कोई खास समुदाय नहीं, बल्कि हर समुदाय का पीड़ित है। कोर्ट के सख्त रुख को देखकर राज्य सरकार के वकील ने अधिसूचना वापस लेने का आश्वासन दिया।

चीफ जस्टिस पी. सदाशिवम की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अधिवक्ता मनोहर लाल शर्मा ने यूपी सरकार की अधिसूचना में पक्षपात का आरोप लगाया। इस पर पीठ ने राज्य सरकार के अधिवक्ता राजीव धवन से पूछा कि क्या सिर्फ एक समुदाय को मुआवजा देने की अधिसूचना जारी की गई है।

इस सवाल पर राजीव धवन के जवाब पर सुप्रीम कोर्ट ने गहरा असंतोष जताते हुए कहा कि यह बहुत ही गंभीर मामला है। मुआवजे के हकदार सभी पीड़ित हैं। साथ ही कोर्ट ने कहा कि अच्छा यही होगा कि राज्य सरकार इस अधिसूचना को तत्काल वापस ले और नई अधिसूचना जारी कर सभी समुदायों के पीड़ितों को मुआवजा देने की घोषणा करे।

गौरतलब है कि राज्य सरकार ने दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवारों को मुआवजे के तौर पर 90 करोड़ रुपये देने की अधिसूचना जारी की थी। 26 अक्तूबर को जारी इस अधिसूचना में हर पीड़ित मुस्लिम परिवारों को पुनर्वास के लिए पांच लाख रुपये देने की बात कही गई थी।

शीर्षस्थ अदालत के सख्त रुख पर राज्य सरकार के वकील ने तत्काल इस पक्षपाती अधिसूचना को वापस लेने का आश्वासन दिया। हालांकि धवन ने कहा कि किसी भी पीड़ित के पुनर्स्थापन और पुनर्वास के लिए इंकार नहीं किया गया है।

साथ ही उन्होंने कहा कि दंगे की वजह से विस्थापित हुए उन्हीं मुस्लिम परिवारों को ही पांच-पांच लाख रुपये मुआवजा देने की अधिसूचना जारी की गई है, जो राहत कैंपों से अपने गांव वापस लौटने को तैयार नहीं हैं।

स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की मांग
इस पर पीठ ने कहा कि राज्य सरकार के इसी रवैये की वजह से जाट महासभा की ओर से जनहित याचिका दायर की गई है, जिस पर कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। याचिका में दंगा मामले की जांच राज्य पुलिस से लेकर किसी स्वतंत्र जांच एजेंसी से कराने की मांग की गई है।

महासभा की याचिका पर केंद्र व राज्य सरकार को नोटिस जारी किया जा चुका है। याचिकाकर्ताओं ने भी राज्य सरकार के निर्णय पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि प्रभावित परिवारों को तभी मुआवजे की यह राशि दी जाए, जब वे हलफनामा दें कि अब वे कभी अपने गांव-घर को नहीं लौटेंगे।

क्या कहा सुप्रीम कोर्ट ने
दंगा पीडितों के लिए तय मुआवजे में भेदभाव क्यों किया जा रहा है। राज्य सरकार को सभी समुदायों के लिए मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए थी। मुआवजे की अधिसूचना में केवल एक ही समुदाय के दंगा पीडितों को शामिल किया गया है, जबकि इसके शिकार अन्य समुदाय के लोग भी हैं। बेहतर होगा कि राज्य सरकार इस अधिसूचना को वापस ले ले और नई अधिसूचना जारी कर उसमें हर समुदाय के दंगा पीड़ितों को शामिल करें।

क्या कहा गया है अधिसूचना में
राज्य सरकार मुजफ्फरनगर के दंगा पीड़ितों को मुआवजा देने के लिए 26 अक्तूबर को अधिसूचना जारी की थी। इसमें कहा गया था कि राज्य सरकार दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवारों के मुआवजे के लिए 90 करोड़ रुपये जारी कर रही है। इस राशि से हर दंगा पीड़ित मुस्लिम परिवारों को पुनर्वास के लिए पांच-पांच लाख रुपये दिए जाएंगे।
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