दंगा: सुप्रीम कोर्ट ने किया यूपी सरकार से जवाब तलब

अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 21 Nov 2013 10:23 PM IST
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सुप्रीम कोर्ट ने मुजफ्फरनगर दंगा मामले में एक पीड़ित के पिता से जबरन राज्य पुलिस की ओर से हलफनामा लिखवाए जाने पर गहरा आश्चर्य व्यक्त किया।
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सर्वोच्च अदालत ने इस मसले पर राज्य सरकार से जवाब तलब किया है। एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुईं वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद ने कहा कि यूपी पुलिस की ओर रविंदर कुमार से जबरन एक हलफनामा लिया गया है, जो एक पीड़ित लड़के के पिता हैं।
उन्होंने आशंका जताई कि इसका पुलिस भविष्य में दुरुपयोग कर सकती है। साथ ही उन्होंने दंगों के दौरान क्षत विक्षत हुए ट्रैक्टरों और गन्ने के खेतों के बर्बाद होने के एवज में मुआवजा दिलाने का निर्देश जारी करने की मांग की।
‘राहत कैंपों में घटी है संख्या’
यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में पेश दो रिपोर्टों में कहा है कि राहत कैंपों में पीड़ितों की संख्या कम हुई है। वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव धवन ने अदालत को बताया कि 18 नवंबर तक कैंप में कुल संख्या 5029 थी। जो अब करीब तीन हजार रह गई है।

हाल ही में राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया था कि 50,955 में से इकतालीस हजार लोग कैंपों से अपने घरों को लौट गए हैं।

रिपोर्ट में तेरह नवंबर को सरकार ने कहा था कि करीब दस हजार लोग अभी भी दस राहत कैंपों में रह रहे हैं। जो मुजफ्फरनगर के छह दंगा प्रभावित गांवों के रहने वाले हैं और अपने गांवों को जाने के लिए तैयार नहीं हुए हैं।

देनी होगी गिरफ्तार लोगों की जानकारी
यूपी सरकार ने हाल ही में अपनी रिपोर्ट में कहा था कि 581 लोगों को हिंसक घटनाओं के मामले में दर्ज की गई एफआईआर पर गिरफ्तार किया गया है।

एक याचिकाकर्ता के वकील कॉलिन गोंसॉलविस ने अदालत से कहा कि गिरफ्तार लोगों के नाम व अन्य जानकारी राज्य सरकार अदालत के समक्ष पेश करे।

इस पर अदालत ने राज्य सरकार के अधिवक्ता से पूछा और उन्होंने ऐसी सूची मुहैया कराने के संबंध में मुश्किलें गिनाई। लेकिन अदालत ने गिरफ्तार लोगों के संबंध में राज्य को सूची मुहैया कराने को कह दिया। याद रहे सरकार ने रिपोर्ट में कहा था कि गिरफ्तार किए गए लोगों पर हिंसा फैलाने, आगजनी और लूट के मामले दर्ज किए गए हैं।
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