'देश के मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं'
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एनडीए सरकार में अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने कहा कि मुस्लिमों की विकास संबंधी चिंताओं का आरक्षण कोई समाधान नहीं हो सकता।
हेपतुल्ला ने कहा कि एनडीए सरकार सभी समुदायों का विकास सुनिश्चित करेगी जिसमें अल्पसंख्यकों की शिक्षा सुविधाओं पर विशेष जोर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि हम आर्थिक, सामाजिक विकास एवं समावेशी विकास (अल्पसंख्यकों के लिए) करना चाहते हैं। जब तक कि वे विकास का हिस्सा नहीं बन जाते, असंतुलित विकास बरकरार रहेगा।
एक सवाल का कि मुस्लिमों के कल्याण के लिए उनकी क्या योजनाएं हैं? इस पर नजमा ने जवाब देते हुए कहा कि केवल मुसलमान ही क्यों। यह केवल मुस्लिम मामलों का मंत्रालय नहीं है।
उन्होंने कहा कि मुस्लिम अल्पसंख्यक नहीं हैं। वास्तव में पारसी अल्पसंख्यक हैं और उनकी आबादी घट रही है। उन्हें मदद की जरूरत है ताकि वे लुप्त न हो जाएं।
मुस्लिमों की जनसंख्या कितनी?
वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार देश में 13 करोड़ 80 लाख मुस्लिम थे जो देश की आबादी का 13.4 प्रतिशत हैं। अल्पसंख्यकों के लिए आरक्षण के एक अन्य सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि यह कोई समाधान नहीं बल्कि बचकर निकलते का रास्ता है।
अल्पसंख्यक मंत्री नजता हेपतुल्ला ने कहा कि हमने कभी मुस्लिमों को आरक्षण का वादा नहीं किया। कांग्रेस ने यह काम किया था। मुस्लिमों की विकास चिंताओं का यह कोई समाधान नहीं है बल्कि बचकर निकलने का रास्ता है।
उन्होंने कहा कि हम संविधान के दायरे में समाधान निकालने में भरोसा करते हैं क्योंकि उसमें धर्म के आधार पर आरक्षण की अनुमति नहीं है। हम इसके लिए काम करेंगे कि सभी को समान अवसर मिल सकें।
सच्चर समिति की सिफारिशों को लागू करना जरूरी नहीं
जब उनसे यह प्रश्न पूछा गया कि एनडीए सरकार सच्चर समिति की सिफारिशें लागू करेगी। तो उन्होंने कहा कि सभी सिफारिशों को लागू करना जरूरी नहीं है।
उन्होंने कहा कि वह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मिलने के बाद प्राथमिकताएं तय करेंगी। नजमा ने कहा कि शिक्षा के जरिए विकास लाना महत्वपूर्ण है। अल्पसंख्यकों के लिए शिक्षण संस्थाएं विकसित करना महत्वपूर्ण है।