'दूध के लिए भी गाय पालने से डर रहे हैं मुसलमान'
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राजधानी दिल्ली से लगे उत्तर प्रदेश के दादरी के इलाके में रहने वाले मुसलमान अब अपने घर दूध के लिए भी गाय रखने से डर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर वो अपने घरों में गाय रखते हैं तो किसी भी रोज उन पर हमला हो सकता है।
दादरी इलाके के कई ऐसे गांव हैं जहां रहने वाले मुसलामानों का कहना है कि ये हमले पिछले छह महीनों में बढ़ गए हैं और वो भी तब जब दो नए संगठनों ने इस इलाके में अपने पांव पसारने शुरू कर दिए हैं।
जारचा गांव के प्रधान एहसान चौधरी ने कहा कि पिछले 6 महीनों से हालात ऐसे हो गए हैं कि "कोई गाय खरीदकर अपने घर नहीं ला सकता है क्योंकि उस पर रास्ते में ही हमला हो जाएगा और उसकी जान भी जा सकती है"।
तीन लोगों की पीट-पीटकर हत्या
अगस्त महीने में ही जारचा के पास ही गाय की तस्करी के आरोप में तीन मुसलमानों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। एहसान चौधरी कहते हैं, "वो तो व्यापारी थे।
उन पर आरोप लगाया गया कि वो वध के लिए गाय ले जा रहे थे। अब क्या करें हम ? अपने बच्चों को गाय का दूध भी ना पिलाएं? अब हम गाय खरीदकर ला नहीं सकते।
ऐसे हालात बना दिए जा रहे हैं।" दादरी के इलाक़े में कम-से-कम दो ऐसे संगठन हैं जिनका हाल ही में जन्म हुआ है। इनमें से एक है 'राष्ट्रवादी प्रताप सेना' और दूसरा है 'समाधान सेना'।
पिछले सोमवार को बिसराड़ा गांव में हुए हमले के पीछे राष्ट्रवादी प्रताप सेना का हाथ होने का आरोप लगाया जा रहा है। घटना में मारे गए अखलाक के परिवार के सदस्य अफजाल का आरोप है कि प्रताप सेना के लोगों ने ही शाम से ही सोशल मीडिया के जरिए लोगों को उकसाने का काम किया और बाद में मंदिर के माइक से लोगों को उकसाया।
बिसराड़ा में हुए हमले के अगले दिन एनटीपीसी कालोनी में एक धार्मिक स्थल पर हुए हमले में भी इसी संगठन के लोगों का हाथ होने का आरोप लगाया जा रहा है।
गौतम बुद्ध नगर के अतिरिक्त जिला अधिकारी राजेश कुमार कहते हैं कि "प्रशासन इस तरह के संगठनों की भूमिका की जांच कर रहा है और जल्द ही इनके खिलाफ कार्यवाई की जाएगी"।
छह महीनों में बढ़े हमले
गांव के लोगों का आरोप है कि इन दोनों संगठनों के लोग अब हर गांव में बैठकें करते हैं और जुलूस भी निकलते हैं।कलोंदा गांव के प्रधान अस्मत खान का आरोप है कि इन संगठनों ने 16 से लेकर 20 साल तक के नौजवानों को अपने साथ करने की कोशिश की है।
वो कहते हैं, "ये लोग बच्चों को उकसाते हैं। भाषणों में कहते हैं कि यहाँ के रहने वाले मुसलमानों के पूर्वज हिंदू थे, और अब इनकी घरवापसी का वक़्त आ गया है।
"जारचा और कलोंदा के ग्रामीणों का कहना है कि अब बच्चों की खेल-कूद के दौरान हुई मामूली धक्का-मुक्की भी सांप्रदायिक हिंसा का रूप ले रही है क्योंकि समाज में नफरत का जहर घोला जा रहा है।
उकसावे के भाषण
उनका यह भी आरोप है कि "अपनी बैठकों में ये संगठन बच्चों को बताते हैं कि सब मुसलमान गोमांस खाते हैं तो कभी वो मस्जिदों में लगे लाउडस्पीकरों का विरोध करने के लिए उन्हें उकसाते हैं"।
जारचा के लोग बताते हैं कि जिस तरह पिछले सोमवार को बिसराड़ा गांव में हमला हुआ उस तरह के हमले दादरी के इलाके में आम हो गए हैं। पिछले महीने जारचा के प्रधान के घर भी इसी तरह हमला हुआ था। प्रधान ने कहा, "उसी तरह हथियारों से लैस लोगों ने हमला किया मेरे घर पर।
हालांकि मेरे गांव के ही हिंदुओं ने उनसे मुक़ाबला किया।" एहसान चौधरी के घर पर हुए हमले के सिलसिले में पुलिस ने समाधान सेना के मुखिया गोविंद चौधरी को गिरफ्तार किया था। वो फिलहाल जमानत पर रिहा हैं।
पुलिस का कहना है कि गोविंद संघ परिवार से जुड़े हैं और बढौत में हुई सांप्रदायिक हिंसा में आरोपी होने के नाते उन्हें तड़ीपार कर दिया गया था। पुलिस का कहना है कि गोविंद चौधरी नौजवानों को हिंसा के लिए भड़काते हैं।
हक की लड़ाई
इन आरोपों को गोविंद चौधरी सिरे से खारिज करते हैं। उनके गांव वीरपुरा में मेरी उनसे मुलाकात हुई तो उन्होंने कहा कि यह आरोप प्रशासन का लगाया हुआ है क्योंकि वो लोगों के हक की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, "मेरे गांव में मुसलमानों की आबादी सबसे ज्यादा है। उनसे जाकर पूछ लीजिए। यह आरोप राजनीति से प्रेरित हैं और कुछ भी नहीं। मैंने यहां बिजली और मूलभूत सुविधाओं की लडाई लड़ी है।
लोगों को रहत पहुंचाने का काम किया है।" चौधरी मानते हैं कि वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक हैं और जहां तक गोहत्या का सवाल है तो उस पर प्रतिबंध लगा हुआ है। "गाय से आस्था जुडी है हमारी। उसका वध होना स्वीकार नहीं है।"