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मदनी के चेहरे से मुलायम की चुनावी बिसात

Wed, 12 Feb 2014 04:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Wed, 12 Feb 2014 04:39 PM IST
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मदनी, मोदी, मुजफ्फरनगर और मुस्लिम। सपा की पश्चिम की यह बड़ी रैली इसी के इर्द-गिर्द घूमती रही। सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने सिखों पर हुए अत्याचारों का जिक्र करके हमदर्दी दिखाई और इसके लिए भी मोदी का हवाला दिया। मदनी को हाथ पकड़कर मंच तक लाए।

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सच्चर कमेटी का हवाला देते हुए सपा प्रमुख ने कह दिया कि मुस्लिमों का विकास किए बिना सरकारें नहीं बनेंगी। सपा मुखिया ने मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र नहीं किया, लेकिन उनसे पहले आजम खां ने तेवर वाला भाषण देकर मुजफ्फरनगर दंगों पर भावपूर्ण सफाई दी तो मुख्यमंत्री ने भी दंगों को दुर्भाग्यपूर्ण बताया।

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मुस्लिम खुश हों, इसलिए बदला रैली का नाम

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सीएम ने तीसरे मोर्च की बात करके संदेश देने की कोशिश की कि आने वाले समय में सपा प्रमुख अहम भूमिका निभाएंगे। गुर्जर वोटों के लिए चौधरी यशपाल सिंह को भी पूरी तवज्जो दी गई।

मंगलवार को जमीयत-उलेमा-ए-हिंद को खुश करने के लिए पहले रैली का नाम बदलकर जलसा-ए-आम किया गया।

दरअसल शेख-उल-हिंद मौलाना महमूद हसन के नाम के सहारे हुए कार्यक्रम से सपा नेताओं ने पश्चिम में मुस्लिमों के साथ होने का संदेश देने पर निगाह लगाई। इसलिए सपा नेताओं की हरसंभव कोशिश रही कि मौलाना अरशद मदनी को मंच पर लाया जाए।

मदनी का हाथ थामे मुलायम मंच पर आए

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मेडिकल कॉलेज के उद्घाटन के बाद सपा प्रमुख मौलाना मदनी का हाथ थामे हुए मंच पर आए। मौलाना मदनी ने भी संबोधन में कि कहा है कि यह कार्यक्रम सपा का नहीं उनका है।

मौलाना ने कॉलेज के नामकरण के लिए अपने साथ पूरे दारुल-उल-देवबंद की ओर से धन्यवाद देकर सपा नेतृत्व को थोड़ी और राहत दे दी।

पश्चिम में सपा की चुनावी आस मुस्लिम वोट बैंक के सहारे की टिकी हुई है।

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दंगों के बाद हुए मुस्लिम नाराज

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मुजफ्फरनगर दंगों के बाद कहा जाने लगा कि मुस्लिम वोट बैंक सपा से नाराज है। सपा यह भी चाहती है कि मोदी फैक्टर के बाद मुस्लिम वोट बैंक का ध्रुवीकरण उसके पक्ष में हो।

मेरठ में दो फरवरी को मोदी की विजय शंखनाद रैली के बाद सहारनपुर की सपा की इस रैली पर सभी की नजरें थीं। दरअसल सारी रणनीति सिर्फ यह संदेश देने पर थी कि दंगों के बाद सपा के साथ मुस्लिम वोट बैंक साथ है।

सपा ने पश्चिम की ज्यादातार सीटों पर मुस्लिम प्रत्याशी ही उतारे हैं।

मुलायम ने मानी मदनी की मांग

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उल-हिंद महमूद उल हसन मेडिकल कॉलेज के उदघाटन के कार्यक्रम के बहाने सपा को रैली के अलावा मौलाना मदनी के साथ का एक महत्वपूर्ण मौका मिल गया। मौलाना मदनी ने कई बार आजम खां का पूरे सम्मान के साथ जिक्र किया।

रणनीति को परवान चढ़ते देख सपा मुखिया सहित मुख्यमंत्री ने भी सहारनपुर में बनने वाली फोर लेन सड़क का नाम भी मदनी की मांग पर शेख-उल-हिंद के नाम पर करने में कोई देरी नहीं की।

सपा मुखिया ने चीन के आक्रमण और उसको जवाब के अलावा खाद्य सुरक्षा जैसे मुद्दों पर बोलकर यह भी जताने की कोशिश की कि वे केंद्र में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार हैं।

सपा केंद्र में बड़ी भूमिका निभाने को तैयार

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मुखिया ने यह भी कह दिया कि केंद्र में सरकार होगी तो रोटी कपड़ा सस्ता देंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भी तीसरे मोर्चे की बात कहकर जताया कि आने वाले समय में सपा की महत्वपूर्ण भूमिका होगी।

खास बात यह भी रही कि सपा मुखिया ने मुस्लिमों के साथ सिखों को जोड़ने के लिए भी कई तीर चलाए। पश्चिम में कई सीटों पर पंजाबी समाज और सिखों की मजबूत उपस्थिति के कारण इस समाज को जोड़कर सपा नए समीकरण गढ़ सकती है।

गुजरात में सिखों की जमीन छीने जाने की बात कह कर सपा मुखिया ने सिखों की हमदर्द हासिल करने के नीयत के साथ मोदी पर भी हमला बोला। पिछले दिनों से उठ रही मुस्लिम आरक्षण की मांग के बीच सच्चर कमेटी की सिफारिशों की याद दिलाना भी उसी चुनावी रणनीति का हिस्सा है।

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