मोदी सरकार के खिलाफ उतरेगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
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योग और शिक्षा का भगवाकरण के खिलाफ मोदी सरकार से जुबानी जंग छेड़ चुका मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने अब खुले में दो दो हाथ करने की तैयारी कर ली है।
देश में बढ़ते सांप्रदायिक तनाव सहित अन्य मामलों में मोदी सरकार को घेरने के लिए बोर्ड ने दलित, बौद्घ और इसाई संगठनों के साथ मिल कर देश भर में संविधान बचाओ अभियान छेड़ने की घोषणा की है।
विभिन्न संगठनों के साथ कई दौर की वार्ता और बैठकों के बाद बोर्ड ने दक्षिण भारत के लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की भी मांग की है।
जाहिर की चिंता
खासबात यह है कि इस अभियान में बोर्ड को संविधान निर्माता भीमराव अंबेडकर
के प्रपौत्र राजरत्न अंबेडकर, लिंगायत धर्मगुरू जय मृत्युंजय, फादर जॉन
दयाल सहित कई अन्य हस्तियों का साथ मिला है।
इन हस्तियों ने मोदी सरकार पर
अल्पसंख्यकों के धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया। इसके
अलावा इन धर्मों के धार्मिक स्थलों पर बढ़ रहे हमलों पर गंभीर चिंता जाहिर
की।
प्रेस क्लब में बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद वली रहमानी और
कमाल फारुकी ने कहा कि बीते सवा साल की घटनाओं से अल्पसंख्यकों और दलितों
में बेचैनी है।
अंबेडकर के परपौत्र भई मैदान में
कई राज्यों में पाठ्यक्रमों में गीता को शामिल किया गया है
तो योग के बहाने एक धर्मविशेष को दूसरे धर्र्मों पर लादने की कोशिश की गई।
उन्होंने कहा कि भाजपा और कई हिंदूवादी संगठनों के नेता वर्ष 2020 तक देश
से अल्पसंख्यकों के सफाए की बात करते हैं, मगर इस मामले में प्रधानमंत्री
अपनी चुप्पी नहीं तोड़ते।
राजरत्न अंबेडकर ने कहा कि आजादी के 67 साल बाद
भी संविधान की मूल भावनाओं के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। बीते एक साल से
यह सिलसिला तेज हुआ है और इस कारण दलितों और अल्पसंख्यकों की परेशानी बढ़ी
है। ऐसे में बोर्ड के साथ सभी संगठन देश भर में संविधान बचाओ अभियान
चलाएंगे