मोदी पर सियासी हमले की तैयारी में मुस्लिम संगठन
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रमजान के बाद मुस्लिम संगठनों का विरोध झेलना पड़ सकता है। भगवा एजेंडे को आगे बढ़ाने के प्रधानमंत्री मोदी के प्रयास की आलोचना करते हुए देश के आला मुस्लिम संगठन सरकार पर सियासी हमला बोलने की रणनीति बना रहे हैं।
जमीयत उलमा ए हिंद के राष्ट्रीय सचिव एवं प्रवक्ता अब्दुल हामिद नौमानी ने कहा है कि 22 जुलाई को जमीयत की वर्किंग कमेटी की बैठक बुलाई गई है। बैठक में मोदी सरकार पर सियासी हमलों की रणनीति बनेगी।
नौमानी ने कहा कि देश के सरकारी स्कूलों और सेना में योग को अनिवार्य बनाने के फैसले का मुस्लिम संगठन विरोध करेंगे। उन्होंने मदरसों की मान्यता खत्म करने के महाराष्ट्र सरकार के निर्णय का विरोध करते हुए कहा कि वर्किंग कमेटी की बैठक में यह मुद्दा जोर-शोर से उठेगा।
रमजान के बाद तमाम मुस्लिम संगठन बोलेंगे हमला
बताया जा रहा है कि योग और महाराष्ट्र सरकार के फैसले पर मुस्लिम संगठन रमजान का महीना होने के वजह से मौन हैं। जुलाई 18 को रमजान खत्म होने के बाद देशभर के तमाम मुस्लिम संगठन नई रणनीति के साथ मोदी सरकार पर सियासी हमला बोलेंगे।
बिहार की सियासत पर भी मुस्लिम संगठनों की पैनी नजर है। बीते दिनों मुस्लिम संगठनों ने मोदी सरकार के कामकाज की भी सार्वजनिक समीक्षा कर उसे निराशाजनक करार दिया था।
मुसलमान विरोधी छवि धोने में जुटा संघ
नई दिल्ली (ब्यूरो)। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की शाखा राष्ट्रीय मुस्लिम मंच ने शनिवार को इफ्तार पार्टी का आयोजन कर एक बार फिर से सबको चौंका दिया। हालांकि इस कवायद को देश और दुनिया में बनी संघ की गैर हिंदू विरोधी छवि को धोने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।
इस भव्य इफ्तार पार्टी में 70 मुस्लिम देशों के राजदूतों ने शिरकत की। मंच ने बीते साल जम्मू-कश्मीर में ऐसी ही इफ्तार पार्टी कर सबको चौंका दिया था। तब पीएम नरेंद्र मोदी की ओर से इफ्तार पार्टी न देने और संघ की शाखा की ओर से इफ्तार पार्टी के आयोजन की जमकर चर्चा हुई थी।