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मुस्लिम संगठनों के निशाने पर फिर अखिलेश सरकार

Sat, 26 Oct 2013 08:45 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
अमर उजाला, दिल्ली Updated Sat, 26 Oct 2013 08:45 AM IST
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muslim organisation again target akhilesh govt

उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार मुजफ्फरनगर दंगा मामले में एक बार फिर मुस्लिम संगठनों के निशाने पर आ गई है।

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मुस्लिम संगठन सपा की टीम द्वारा सरकार को सौंपी गई उस रिपोर्ट से बेहद नाराज हैं, जिसमें कहा गया है कि मदरसों से जुड़े लोग निजी हितों के लिए दंगा पीड़ितों को घर वापस नहीं जाने दे रहे।

दर्जनों मुस्लिम संगठनों की अगुवाई करने वाली संस्था ऑल इंडिया मजलिस-ए-मुशावरत (एआईएमएमएम) ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार सब कुछ सही दिखाने के लिए पीड़ितों को जबरन राहत शिविरों से वापस उनके घर भेजना चाहती है
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मोदी सरकार से की यूपी सरकार की तुलना
संस्था ने दंगों के दौरान जघन्य अपराध करने वालों पर अब तक कार्रवाई न करने का आरोप लगाते हुए राज्य प्रशासन पर भेदभाव का आरोप लगाया है। उधर, एक गैर सरकारी संस्था अनहद ने राज्य सरकार की तुलना गुजरात की मोदी सरकार से की है।
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संस्था का आरोप है कि राज्य सरकार न केवल पीड़ितों को राहत शिविरों से जबरन हटाना चाहती है, बल्कि उन पर एफआईआर वापस लेने के दबाव भी डाल रही है।

'मदद करने वाले लोगों पर लगाए आरोप'
एआईएमएमएम के मुखिया डॉ. जफारुल इस्लाम खान ने अमर उजाला से कहा कि यह बेहद दुखद है कि सपा की टीम ने दंगा पीड़ितों की मदद करने वाले मदरसों और मस्जिद से जुड़े लोगों पर ओछे आरोप लगाए हैं।

उन्होंने कहा कि हमने जल्द मुआवजा देने के लिए राज्य सरकार की तारीफ की थी, लेकिन अब जिस तरह से वह पीड़ितों को शिविरों से वापस भेजने पर आमदा है, उससे प्रतीत होता है कि वह बस अपना चेहरा बचाने में जुटी हुई है।


'आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं'
उन्होंने कहा कि राहत शिविरों में ऐसे पीड़ित हैं जिनके रिश्तेदारों की हत्या हुई है अथवा उनके अपने के साथ दुराचार हुआ है।

इनके घर जला दिए गए हैं। एफआईआर के बावजूद आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। राज्य सरकार सुरक्षा का इंतजाम किए बिना इन्हें वापस भेजना चाहती है।

उधर, अनहद ने एक बयान जारी कर आरोप लगाया है कि अखिलेश सरकार मोदी सरकार के पदचिन्हों पर चल रही है।

संस्था ने जोला, जोगिया खेड़ा, लोई और कंदाला में राहत शिविरों के दौरे के बाद दावा किया कि दंगा पीड़ितों को एफआईआर में दर्ज नामों को हटाने के लिए प्रलोभन और धमकियां दी जा रही हैं।

संस्था ने पीड़ितों के खिलाफ बड़ी संख्या में झूठे मुकदमे भी दर्ज कराए जाने का दावा किया है।

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