भाजपा के लिए मन बदल रहे हैं मुसलमान?
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सोलहवीं लोकसभा में भारतीय जनता पार्टी की भारी जीत की गति महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी कम होती दिखाई नहीं देती। भाजपा सभी पार्टियों से आगे नजर आती है।
शरद पवार के गढ़ बारामती जाते समय मुंबई के मुहम्मद अली रोड के रहने वाले मेरे ड्राइवर मुहम्मद सईद भाजपा के पक्ष में जोश में बातें कर रहे थे।
इससे कहीं अधिक वो नरेंद्र मोदी से प्रभावित नजर आते हैं, "मोदी जी नहीं तो बीजेपी में कोई और नेता नहीं है जो पार्टी को वोट दिला सके।"
सईद की तरह यहां कई ऐसे मुसलमान मिले, जो भाजपा को लेकर अब नरम रवैया रखते हैं।
नई जान
मुस्लिम समुदाय का ये हृदय परिवर्तन यहां एक नया बदलाव है। नौ साल तक मुंबई में रहने के बाद साल भर पहले मैं दिल्ली चला गया था। उसके बाद से पहली बार यहां आया हूं।
इस अरसे में मुसलमानों के भीतर इस परिवर्तन के अलावा जो मैंने जो दूसरा बदलाव देखा, वो था शिवसेना से लोगों की मायूसी। खुद उनके गढ़ में लोग पार्टी नेता उद्धव ठाकरे की लीडरशिप पर सवाल उठा रहे हैं।
कुछ चीजें बिलकुल नहीं बदली हैं। कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के भ्रष्ट होने की जो आम धारणा पहले थी, अब भी इसमें कोई बदलाव नहीं आया है।
25 साल बाद यह पहला विधानसभा चुनाव है, जब सभी बड़ी पार्टियां अलग-अलग चुनाव लड़ रही हैं।
जानकार बताते हैं कि शिवसेना से गठबंधन टूटने का फायदा भाजपा को अधिक होगा। आम लोगों के विचार भी भाजपा के पक्ष में अधिक नजर आते हैं।
गठबंधन
कराड तहसील के पोतले गांव के सरपंच अशोक पाटिल कहते हैं कि मोदी की लहर नहीं है, लेकिन बीजेपी में मोदी ने एक नई जान जरूर फूंक दी है, जिसका फायदा पार्टी को चुनाव में होगा।
पाटिल ने कहा, "मेरे क्षेत्र में बीजेपी का कोई जोर नहीं है, पर महाराष्ट्र में वह चुनाव के बाद सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।"
दो सप्ताह पहले मुंबई के हबीब फकीह अपने कई साथी समेत राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए। उनका कहना था भाजपा मुस्लिम विरोधी पार्टी नहीं है।
हबीब कहते हैं कि उन्हें बुरा-भला कहने वाले दरअसल, दोहरी नीतियों पर चलने वाले हैं।
वो कहते हैं, "जिला परिषद के चुनावों में शिवसेना का कांग्रेस के साथ गठबंधन है जबकि बीजेपी का राष्ट्रवादी कांग्रेस के साथ। ये भी तो सांप्रदायिक ताक़तों से हाथ मिलाना हुआ। यही गठबंधन वे राज्य स्तर पर नहीं करते। तो हुआ न ये डबल स्टैंडर्ड?"
गहरी नजर
खुद भाजपाई खेमे में आत्मविश्वास आसमान छू रहा है। माधव भंडारी पार्टी की महाराष्ट्र इकाई के प्रवक्ता हैं। लोकसभा चुनाव की हार के बाद राज ठाकरे के लिए विधानसभा चुनाव बेहद अहम हैं।
भंडारी कहते हैं, "आम चुनाव में लोगों ने गठबंधन सरकारों को खारिज किया। यही महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में भी होगा।" भंडारी अपनी पार्टी को 155 सीटें देते हैं। सर्वेक्षणों में बीजेपी को 120 से 140 सीटें दी जा रही हैं।
मगर राजनीति पर गहरी नजर रखने वाले लोग बीजेपी को 100 से अधिक सीटें नहीं दे रहे हैं। हां, सभी ये स्वीकार करते हैं कि बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरेगी।
पार्टी के एक नेता ने कहा बीजेपी को गठबंधन सरकार बनाने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन अगर कुछ सीटें कम पड़ीं तो शिवसेना से दोबारा गठबंधन पर पार्टी को कोई आपत्ति नहीं होगी।