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एक बुखारी कांग्रेस के पाले में, दूसरा खिलाफ

Thu, 03 Apr 2014 01:52 PM IST
Updated Thu, 03 Apr 2014 01:52 PM IST
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muslim leaders objected to support congress

शाही इमाम बुखारी के कांग्रेस को समर्थन देने के बाद उनके ही भाई ने बगावत का बिगुल फूंक दिया है। इमाम बुखारी के भाई याह्या बुखारी ने कांग्रेस को समर्थन देने का विरोध किया है।

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याह्या बुखारी ने कांग्रेस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि हर चुनावों से पहले कांग्रेस ऐसा ही करती है। लेकिन सत्ता में आने के बाद मुस्लिमों के भले के लिए कोई कदम नहीं उठाती है।
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याह्या बुखारी का बयान उस वक्त आया जब सोनिया गांधी ने सेक्यूलर वोटों को न बंटने को लेकर शाही इमाम से कुछ रोज पहले मुलाकात की थी। याह्या के इस बयान के बाद मुस्लिम वोटों को लेकर हो रही सियासत गर्मा गई है।
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'कांग्रेस ने 10 सालों में मुस्लिमों के लिए कुछ नहीं किया'

muslim leaders objected to support congress

जामा मस्जिद के शाही इमाम अहमद बुखारी की कांग्रेस से नजदीकियां मुस्लिम समाज में चर्चा का मुद्दा बनी हुई हैं। बुखारी की कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी से मुलाकात के बाद मुस्लिम समुदाय से अलग-अलग राय सामने आ रही हैं।

सेक्युलर वोटों को बंटने से रोकने की बात पर तो मुस्लिम समाज के बड़े नेता सहमति जताते हैं। लेकिन कई मुस्लिम नेता इस पक्ष में बिल्कुल नहीं हैं कि इन मुस्लिम वोटों का फायदा कांग्रेस को मिले।

कई दिग्गजों का कहना है कि कांग्रेस ने पिछले दस सालों में मुस्लिमों के लिए कुछ नहीं किया। सोनिया ने किसी मुस्लिम प्रतिनिधि संगठन को मिलने का समय तक नहीं दिया और अब मुस्लिम वर्ग से चुनाव में समर्थन मिलने की उम्मीद करना हास्यास्पद है।

आम आदमी पार्टी का बताया भाजपा की सहयोगी

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सोनिया से मुलाकात के बाद इमाम बुखारी ने कहा कि सेक्युलर वोटों को बंटने से रोकना होगा। साथ ही उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी भी भाजपा की सहयोगी है। वह शुक्रवार को जुमे के दिन खुलकर कांग्रेस के समर्थन में आ सकते हैं।

सुन्नी सूफी संत मौलाना मोहम्मद अशरफ किचोचवी कहते हैं कि बुखारी के कांग्रेस में जाने से अवाम पर कोई फर्क नहीं पड़ता। वह मीडिया की सुर्खियां तो बटोर सकते हैं। मगर अवाम का विश्वास जीत नहीं सकते।

साथ ही कांग्रेस को लेकर भी मौलाना अशरफ कहते हैं कि अपनी जड़ें कमजोर होने के चलते कांग्रेस को बुखारी का समर्थन लेना पड़ रहा है। वह कहते हैं कि कांग्रेस को जमीनी हकीकत का पता नहीं है। बंद कमरे में पार्टी की योजना बन रही है।

'कांग्रेस ने मुसलमानों को मायूस किया'

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फतेहपुरी मस्जिद के इमाम मुफ्ती मुकर्रम कहते हैं कि कांग्रेस ने तो मुसलमानों को बहुत ही मायूस किया। कांग्रेस अध्यक्ष दस साल में किसी मुस्लिम प्रतिनिधि से नहीं मिलीं, न ही किसी को बुलाया। अब मुस्लिमों की बेहतरी के आश्वासन को सुनकर कांग्रेस की बात पर भरोसा नहीं होता।

उन्होंने कहा कि मुस्लिम समाज को अच्छे उम्मीदवार को वोट देना चाहिए। जो उनकी समस्याओं को समझे और उनका साथ दें। चाहे वह किसी पार्टी का हो।

वहीं जमायत-ए-उल-हिंद के महमूद मदनी कहते हैं कि जिस रास्ते पर बुखारी चल रहे हैं। उससे हमारा कोई मतलब नहीं है।

'उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं'

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बरेली के मौलवी मौलाना तौकीर रजा खान कहते हैं कि सेक्युलर वोट बंटने नहीं चाहिए, ये ठीक बात है। मगर मुस्लिमों की हमदर्द पार्टी को ही समर्थन देना चाहिए।

रजा खान कहते हैं कि बुखारी का रुझान किस तरफ है, उन्हें पता नहीं है। मगर उत्तर प्रदेश में कांग्रेस कहीं लड़ाई में नहीं है।

मुस्लिम नेता नावेद हामिद कहते हैं कि इमाम बुखारी को एक हिंदुस्तानी होने के नाते हक है कि वह किसी भी पार्टी को समर्थन कर सकते हैं। चुनाव में नेता और मतदाता दोनों अपनी इच्छा से पार्टियों को चुन सकते हैं तो इमाम बुखारी क्यों कांग्रेस को समर्थन नहीं कर सकते।

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