मुस्लिम मां-बाप ने हिंदू तौर-तरीकों से कराई बेटी की शादी
हिंदू-मुस्लिम सद्भाव की कहानी में एक और कड़ी जुड़ी गई है।
मध्यप्रदेश के शिवहर जिले में एक मुस्लिम परिवार ने अपनी गोद ली हुई हिंदू बच्ची की रामजानकी मंदिर परिसर में धार्मिक रीतिरिवाजों के साथ शादी की। नर्मदा नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में हुई शादी ने एक नायाब मिसाल पेश की है।
तकरीबन 15 साल पहले कोई परिवार इस बच्ची को रेलवे स्टेशन पर छोड़ गया था, लेकिन एक मुस्लिम परिवार ने इसे अपना लिया।
बीते शनिवार को हिंदू रीति, संस्कृति और धार्मिक आस्था के मुताबिक मंदिर परिसर में धूम-धाम के साथ हिंदू धर्म के लड़के के साथ ही इस लड़की की शादी कर दी गई। इस विवाह समारोह में हिस्सा लेने के लिए नदीम अख्तर और उनकी पत्नी हसीन परवेज के नाते रिश्तेदार भी बड़ी खुशी के साथ पहुंचे।
अख्तर और उनकी पत्नी इस विवाह समारोह में उन जरूरी सामानों के साथ मंदिर परिसर में पहुंची जिनकों हिंदू रीति के मुताबिक होने वाली शादी के लिए अहम माना जाता है।
परवेज बोले मानवता सबसे बड़ा धर्म
इस शादी के मौके पर परवेज ने कहा कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है इसलिए हमने शारदा को अनुमति दी कि वो अपने धर्म की रीतियों का पालन करे।
परवेज ने बताया कि उन्हें साल 2000 में शारदा बरखेडा़ रेलवे स्टेशन पर मिली थी। उस वक्त वो महज सात साल की थी। इसके बाद इस बच्ची को नव प्रभात समाज कल्याण समिति के शेल्टर होम में भेज दिया गया जिसका संचालन गोहरगंज के एक मुस्लिम परिवार की सरपरस्ती में हो रहा था।
उन्होंने बताया कि करीब 15 साल की उम्र में शारदा हमारे परिवार का हिस्सा हो गई और उसने हमारे परिवार में ही रहकर आठवीं तक की पढ़ाई पूरी की। यहीं रहकर उसने ब्यूटीशियन का कोर्स किया और वो उसके बाद एक ब्यूटी पार्लर चलाने लगी।
इसी बीच लड़की के परिजनों ने शारदा के लिए लड़का खोजना शुरु कर दिया। जल्द ही उन्होंने दुर्गा प्रसाद पटेल के बेटे के साथ अपनी गोद ली हुई बच्ची की शादी तय कर दी। इस शादी के बारे में बात करते हुए लड़की की मां हसीन परवेज ने बताया कि शादी का स्थान खुद लड़के वालों ने ही तय किया था।