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पश्चिम बंगाल में भी महागठबंधन की सुगबुगाहट

Tue, 17 Nov 2015 06:25 AM IST
Updated Tue, 17 Nov 2015 06:25 AM IST
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Murmurs of the grand alliance in West Bengal also

 बिहार विधानसभा चुनाव में महागठबंधन को मिली बड़ी कामयाबी के बाद अब पश्चिम बंगाल में भी महागठबंधन की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। इस दौड़ में सीपीएम और कांग्रेस सबसे आगे हैं। इन दोनों दलों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस और बीते लोकसभा चुनावों के बाद तेजी से उभरी भाजपा के खिलाफ हाथ मिलाने को लेकर विचार करना शुरू कर दिया है।

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बंगाल में अगले साल विधानसभा चुनाव होने हैं। जिसके लिए सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस और भाजपा समेत कांग्रेस व सीपीएम के बीच कड़ी टक्कर होगी। बिहार के मुकाबले पश्चिम बंगाल की राजनीतिक परिस्थिति कुछ अलग है। बिहार में जहां भाजपा और महागठबंधन के बीच जंग थी। वहीं, बंगाल में ये जंग चार ताकतों के बीच है।
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इनमें सबसे मजबूत स्थिति सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस की है। उसके बाद भाजपा, कांग्रेस और सीपीएम में नंबर दो बनने की लड़ाई है। बीते लोकसभा चुनावों के बाद तेजी से उभरती भाजपा ने कांग्रेस व सीपीएम के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। इसलिए इस खतरे को भांप कर ही इन दोनों दलों ने महागबंधन की दिशा में पहल की है।

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टीएमसी का पलड़ा भारी

Murmurs of the grand alliance in West Bengal also

बीते शनिवार को जवाहर लाल नेहरू की जयंती पर आयोजित सेमिनार के बहाने कांग्रेस, सीपीएम व अन्य दल एक ही मंच पर जुटे और सामूहिक रूप से भाजपा और आरएसएस को गरियाया भी। इससे संभावित गठबंधन की झलक तो जरूर मिली है। अगर यहां महागठबंधन बनता है, तो ये पक्का है कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी उसमें शामिल नहीं होंगी।

इसकी वजह यह है कि ममता सीपीएम और कांग्रेस से समान दूरी बना कर चलने की बात कह चुकी हैं। ऐसे में ममता का कांग्रेस, सीपीएम और भाजपा के साथ हाथ मिलाने का कोई सवाल ही नहीं पैदा होता। सीपीएम या कांग्रेस भी भाजपा के साथ वैचारिक मतभेदों के चलते तालमेल नहीं कर सकतीं। ऐसे में कांग्रेस व सीपीएम के बीच तालमेल एकमात्र विकल्प है।

इसके साथ बिहार के सहयोगी दलों मसलन जदयू और राजद को भी शामिल किया जा सकता है। वैसे, इन दोनों दलों का बंगाल में कोई खास जनाधार नहीं है। बावजूद इसके ये खासकर हिंदी भाषी वोटों में तो सेंध लगा ही सकते हैं। समाजवादी पार्टी पहले से ही सीपीएम के साथ है।

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