मोदी के विकास मॉडल को जोशी ने दी चुनौती
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकास मॉडल को भाजपा के वरिष्ठ नेता व सांसद डा. मुरली मनोहर जोशी ने चुनौती दी है। उन्होंने कहा है कि यह तय होना चाहिए कि देश का विकास स्वदेशी आधार पर होगा या वर्ल्ड बैंक और आईएमएफ मॉडल के जरिए।
जोशी ने कहा है कि देश के विकास मॉडल पर राष्ट्रीय बहस होनी चाहिए। विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय संरक्षक अशोक सिंहल ने भी जोशी की मांग का समर्थन किया है।
सिंहल ने कहा है कि देश की विकास नीतियों का गहराई से अध्ययन एवं चिंतन होना चाहिए। केंद्र में मोदी सरकार बनने के बाद से ही संघ के संगठन उनके आर्थिक विकास के मुद्दों पर सवाल उठते रहे हैं।
मगर जोशी ने देश के विकास का मॉडल तय करने को सार्वजनिक बहस की मांग कर केंद्र के लिए राजनीतिक बहस की नई चुनौती तो खड़ी कर ही दी है।
डा. जोशी के मुताबिक, यह तय होना चाहिए कि देश का विकास दीनदयाल उपाध्याय और केएस सुदर्शन के आर्थिक विचारों पर चलकर होगा या वर्ल्ड बैंक व आईएमएफ के विचारों के जरिए होगा। उन्होंने जीएम फसलों को देश के लिए नुकसानदेह बताया।
बोले, विकास दीनदयाल के विचारों से होगा या वर्ल्ड बैंक के विचारों से
‘स्वदेश भोपाल’ के जरिए प्रकाशित ‘सुदर्शन स्मृति’ के लोकार्पण के अवसर पर जोशी ने पूर्व संघ प्रमुख सुदर्शन के बारे में कहा कि वे वैचारिक दृष्टि से महान व्यक्ति थे।
वहीं ललित गेट और व्यापम मामला उठने के बाद पहली बार किसी सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल हुई विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने यह कहते हुए सियासी मामलों पर चुप्पी साध ली कि वह मंत्री की हैसियत से नहीं बल्कि एक श्रद्धालु की हैसियत से कार्यक्रम में आईं हैं।
उन्होंने कहा कि सुदर्शन ने अपने कामकाज में निर्भयता का वातावरण बनाया हुआ था। उनकी मृत्यु से सर्वाधिक नुकसान देश के शोधकर्ताओं को हुआ।
वह शोध और नए विचारों को ज्यादा बढ़ावा देते थे। सुषमा ने कहा कि सुदर्शन उन्हें समय-समय पर सुझाव और विषयों की जानकारी देते रहते थे। राज्य सभा में नेता प्रतिपक्ष के पद पर रहते हुए उन्होंने ईवीएम में गड़बड़ी का मामला उठाने को कहा था।