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राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई पर लगी रोक

Thu, 20 Feb 2014 07:43 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, दिल्ली Updated Thu, 20 Feb 2014 07:43 PM IST
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murder of rajeev gandhi not released now

सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के हत्यारों की रिहाई पर अगले आदेश तक रोक लगा दी।

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मुख्य न्यायाधीश पी सदाशिवम की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने फिलहाल यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश देते हुए तमिलनाडु सरकार सहित दोषियों को नोटिस भी जारी किया।

कोर्ट ने नोटिस का जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया है।

न्यायालय की ओर से अंतरिम रोक का आदेश बृहस्पतिवार को केंद्र सरकार की उस अपील पर आया जिसमें उसने गांधी के हत्यारों की रिहाई के जयललिता सरकार के निर्णय को चुनौती दी है।
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इस मामले में न्यायालय अब 6 मार्च को आगे विचार करेगा।

न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार के फैसले में कुछ प्रक्रियागत खामियां हैं इसलिए केंद्री की अर्जी में उठाए गए सवालों पर विचार किया जाएगा।

कोर्ट ने कहा कि वह कैदियों की सजा माफ करने का राज्य सरकार का अधिकार छीन नहीं रहा है लेकिन राज्यों को प्रक्रिया का पालन करना होगा।

इससे पहले, तमिलनाडु सरकार ने बृहस्पतिवार सुबह ही दायर केंद्र की पुनर्विचार याचिका पर जोरदार विरोध किया।

न्यायाधीशों ने कहा, हम राज्य सरकार के अधिकार कमतर करके नहीं आंक रहे हैं लेकन उसके द्वारा अपनाई प्रक्रिया पर गौर कर रहे हैं।

इसके साथ ही न्यायालय ने कहा कि चार अन्य दोषियों की सजा माफी के मामले में केंद्र नई याचिका दायर कर सकता है।

शीर्ष अदालत ने दया याचिकाओं के निबटारे में 11 साल की देरी के आधार पर राजीव गांधी हत्याकांड में दोषी संतन, मुरुगन (दोनों श्रीलंकाई तमिल) और पेरारिवलन की मौत की सजा उम्रकैद में तब्दील कर दी थी।
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न्यायालय के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार ने बुधवार को इस मामले के सभी सात दोषियों को रिहा करने का फैसला कर लिया था।

संतन, मुरुगन और पेरारिवलन इस समय वेल्लोर जेल में बंद हैं।

जयललिता सरकार ने इनके साथ ही 21 मई, 1991 को राजीव गांधी की हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा भुगत रहे चार अन्य दोषियों नलिनी, राबर्ट पायस, जयकुमार और रवीचंद्रन को भी रिहा करने का फैसला किया था।


राज्य सरकार ने इनकी रिहाई के मामले में अपने और केंद्र सरकार के लिए तीन दिन की समय सीमा निर्धारित की थी।

टाडा अदालत ने जनवरी, 1998 में राजीव गांधा हत्याकांड के अभियुक्तों को दोषी ठहराते हुए उन्हें मौत की सजा दी थी। शीर्ष अदालत ने 11 मई, 1999 को इसकी पुष्टि कर दी थी।

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