नामधारी के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज

नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Thu, 29 Nov 2012 11:50 PM IST
murder case registered against namdhari
चड्ढा हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में जुटी दिल्ली पुलिस ने मुख्य आरोपी सुखदेव सिंह नामधारी पर हत्या का मामला दर्ज किया है। पुलिस के अनुसार नामधारी ने ही पूरे षड्यंत्र के तहत हरदीप चड्ढा की हत्या की थी। पुलिस ने साथ ही नामधारी के खिलाफ दंगा करने, घातक हथियार प्रयोग करने सहित शस्त्र कानून की धाराएं भी जोड़ दी हैं। इसके बाद अदालत ने नामधारी से विस्तृत पूछताछ के लिए उसकी रिमांड अवधि तीन दिन के लिए बढ़ा दी। हालांकि रिमांड अवधि पांच दिन बढ़ाने की मांग की गई थी।

साकेत अदालत के मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गौरव राव के समक्ष नामधारी को पेश करते हुए जांच अधिकारी ने कहा कि गवाहों से पूछताछ व साक्ष्यों से स्पष्ट है कि नामधारी ने जानबूझकर हरदीप की हत्या की थी। यह भी पता चला है कि नामधारी ने फरार अन्य अभियुक्तों के साथ पूरे षड्यंत्र में अहम रोल अदा किया। पूछताछ में पता चला है कि नामधारी व अन्य अभियुक्त छतरपुर के 42 नंबर फार्म हाउस पर कब्जा करने के लिए गोलीबारी करते हुए वहां घुसे थे।

बचाव पक्ष के वकील ने रिमांड अवधि बढ़ाने का विरोध किया। उन्होंने कहा कि नामधारी घटनास्थल पर था ही नहीं। साथ ही हरदीप के ड्राइवर एवं फार्म हाउस पर काम करने वाले नंदलाल के बयानों से स्पष्ट है कि पोंटी के कर्मचारी विष्ट, अन्ना व परमवीर काफी लोगों के साथ आए व फार्म हाउस पर कब्जा कर लिया। उन्होंने कहा कि नामधारी काफी अरसे से पोंटी के साथ था और नंदलाल उसे पहचानता था। अत: यदि नामधारी वहां होता तो नंदलाल उसे पहचान लेता। स्पष्ट है कि उसे फर्जी मामले में फंसाया गया है।

पोंटी के पांच कर्मचारी न्यायिक हिरासत में भेजे गए
अदालत ने इस मामले में पहले से गिरफ्तार पांच अभियुक्तों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। वहीं अभियुक्तों ने प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए कहा कि गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनसे सादे कागजों पर हस्ताक्षर करवाए थे। भूपेंद्र सिंह, उदयराज सिंह, राजपाल सिंह, आनंद सिंह बिष्ट व मथुरा सिंह मेहरा को रिमांड अवधि खत्म होने पर साकेत स्थित मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट गौरव राव के समक्ष पेश किया गया था।

गिरफ्तारी से पूर्व नामधारी को गैरकानूनी हिरासत में रखा था?
हरदीप चड्ढा की हत्या के आरोप में गिरफ्तार सुखदेव सिंह नामधारी को क्या महरौली पुलिस ने गैरकानूनी हिरासत में रखा था? इस आरोप के मद्देनजर अदालत ने महरौली थानाध्यक्ष को थाने में लगे सीसीटीवी की 17 से 24 नवंबर तक की फुटेज को सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश पांच अभियुक्तों के अधिवक्ता केके मनन ने आरोप लगाया कि पुलिस ने नामधारी को घटना के बाद से ही महरौली थाने में 20 नवंबर तक गैरकानूनी रूप से हिरासत में रखा था। इतना ही नहीं अपराध शाखा को मामला स्थानांतरित होने के बाद भी थाना पुलिस ने संबंधित फाइल अपराध शाखा को देने में दो दिन लगा दिए। उनके अनुसार पुलिस का यह तर्क गलत है कि नामधारी घटना के बाद से फरार था।

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