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कल्कि महोत्सव में बोले मुनव्वर राना, अब कोई अवॉर्ड नहीं लूंगा

Tue, 17 Nov 2015 03:44 AM IST
Updated Tue, 17 Nov 2015 03:44 AM IST
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Munawwar Rana joins kalki mahotsav talks on award return issue.

देश के नामचीन शायर मुनव्वर राना ने सोमवार को कल्कि मंच पर पहुंचने से पहले एलान किया कि वह अब कोई अवार्ड नहीं लेंगे।

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पत्रकारों से बाचतीत करते उन्होंने कहा कि अवार्ड लौटाने पर सवाल उठाने वाले समझ लें, आसान नहीं होता अवार्ड लौटाने का फैसला लेकिन जब हालात अच्छे न हों तो प्रतिरोध का यह एक तरीका है। लेखक और साहित्यकार के पास उसकी अपनी कलम और अवार्ड ही तो जिनके माध्यम से वह विरोध सकता है।

उन्होंने कहा कि देश के हालात अच्छे नहीं हैं। जो हालात हैं उनमें मुझ पर देशद्रोह का आरोप लग सकता है। मुझे जेल में डाला जा सकता है। ऐसे में मुझे शाद का शेर याद आता है-मैं तो चटनी से खा रहा हूं शाद, दाल बंटती है जेल में।
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बातचीत के दौरान मुनव्वर राना के तेवर उस समय तल्ख हो गए जब प्रेसवार्ता में मौजूद गीतकार विष्णु सक्सेना ने कहा-अवार्ड लौटाना बुरी बात नहीं है, लेकिन नीयत साफ होनी चाहिए। विष्णु सक्सेना के इतना कहते ही माहौल कुछ बहस का बनने लगा क्योंकि व्यंगकार सर्वेश अस्थाना और कवियत्री डा. कीर्ति काले भी बातचीत में शामिल होने लगे।
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मुनव्वर ने कहा-इस बहस में शामिल होने का हक उसे है जिसे पुरस्कार मिला हो। बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री बुलाते हैं तो देश के हालात पर चर्चा होगी। उन्होंने अपनी बात इस बारे में कुछ इस तरह से रखी-दोनों को इसी पर चलना है, फिर आपस में तरकार ये क्यों, कुछ हम भी हटा लें अपने कदम, कुछ तुम भी किनारे आ जाओ। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री से बातचीत होती है तो कुछ न कुछ सकारात्मक समाधान निकलेगा।

अवार्ड लौटाना बुरा बात नहीं पर नीयत साफ होनी चाहिए- विष्णु सक्सेना

Munawwar Rana joins kalki mahotsav talks on award return issue.

सुप्रसिद्ध गीतकार विष्णु सक्सेना ने सोमवार को कल्कि महोत्सव के दौरान पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि पुरस्कार लौटाना बुरी बात नहीं है पर नीयत साफ होनी चाहिए। बिहार चुनाव से पहले पुरस्कार लौटाने की स्थिति पर मैं यही कहूंगा कि पुरस्कार लौटाने के बहाने सियासी हित नहीं साधे जाने चाहिए।

उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि बिहार चुनाव से पहले पुरस्कार क्यों लौटाए गए। बातचीत के दौरान उन्होंने गीत पर भी चर्चा की और कहा कि अब जमाना बदल रहा है। गीत अब कवि सम्मेलनों में मुख्य हो रहा है। अश्लील हास्य के चलते कवि सम्मेलनों में अब हास्य से ज्यादा गीत और कविता वाले कवियों को बुलाया जा रहा है। गीत एक बार फिर जनता की पसंद बन गए हैं।

जब लौटाने थे पुरस्कार तो लिए ही क्यों- कीर्ति काले

Munawwar Rana joins kalki mahotsav talks on award return issue.

कवियत्री कीर्ति काले ने कहा कि जब पुरस्कार लौटाने थे तो लिए ही क्यों थे।

उन्होंने कहा कि जो सम्मान मिल जाता है उसे लौटाने वह लौट नहीं जाता है। जैसे किसी को की गई नमस्ते वापस नहीं होती। ऐसी पुरस्कार और सम्मान वापस नहीं हो सकते हैं।

मेरी नजर में पुरस्कार लौटाना उचित नहीं है।

हिंदुस्तानी विरासत को महफूज करना जरूरी- वसीम बरेलवी

Munawwar Rana joins kalki mahotsav talks on award return issue.

40 सालों से अधिक समय से अपनी शायरी से प्रेम और सद्भाव का संदेश दे रहे शायर वसीम बरेलवी देश के मौजूदा हालात से परेशान दिखाई दिए।

उन्होंने कहा कि हिंदुस्तानी समाज की बेहतरी इसी में है कि वह एक दूसरे की भावनाओं का आदर करना सीखें। ये विरासत जो हमें बड़ी कुर्बानियों के बाद मिली है उसे महफूज करने की कोशिशे करें। इस वक्त फिजा में जो जहर खोला जा रहा है वो हमारी आने वाली नस्लों के लिए नुकसानदायक हैं। उनके दूरियां बढ़ेंगी।

पेरिस हमले से आहत शायर वसीम बरेलवी ने कहा कि इस हमले की जितनी निंदा की जाए वह कम है। हालांकि हमलों पर बयान देने वाले कुछ राजनीतिज्ञों के बयान पर कोई भी टिप्पणी करने से उन्होंने साफ इनकार किया।

साहित्यकारों के सम्मान वापस लौटाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मेरा विषय नहीं है। जिसे जो करना है वह करे। राजनीति और विवादित मुद्दों में पड़कर हमें अपने लक्ष्य से नहीं भटकना है। देश को एक करना हमारा मकसद है। हमारी साझा संस्कृति बची रहे ये नौजवानों को समझाना है और उसी के लिए कोशिशें करनी हैं। जो मौजूदा हालात बनाए जा रहे हैं वह लंबे समय तक नहीं चलेंगे। हमारी साझा संस्कृति की जड़ें इतनी मजबूत हैं कि वह यूं नहीं बिखरेंगी।

उन्होंने सभी खेमों के राजनीतिज्ञों को आईना दिखाते हुए कहा कि - तुमने मेरे घर न आने की कसम खाई तो है। आंसुओं से भी कहो आंखों में आना छोड़ दें। बारिशें दीवार धो देने की आदि है तो क्या, हम इसी डर से तेरा चेहरा बनाना छोड़ दें।

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