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नौकरियों में मराठा आरक्षण हाई कोर्ट में खारिज

Fri, 14 Nov 2014 08:03 PM IST
Updated Fri, 14 Nov 2014 08:03 PM IST
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mumbai highcourt reject maratha reservation.

कांग्रेस-एनसीपी सरकार के महाराष्ट्र में मराठा समुदाय को दिए गए आरक्षण के फ़ैसले को मुंबई हाई कोर्ट ने ख़ारिज कर दिया है। हाई कोर्ट ने मुसलमानों को दिए गए पाँच प्रतिशत शैक्षणिक आरक्षण को ही बरकरार रखा है।

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महाराष्ट्र विधानसभा चुनावों के ठीक काँग्रेस-एनसीपी सरकार ने मराठा समुदाय को नौकरी और शिक्षा क्षेत्र में 16 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया था। जिसे मराठा समुदाय कहा जाता है, वह कई जातियों का समूह है। इनमें से उपजाति कुनबी को पिछड़ा वर्ग में आरक्षण पहले से मिला हुआ है जो जारी रहेगा।
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लंबे समय से मराठा समाज के सदस्य ख़ुद को राजपूत, क्षत्रीय का वंशज मानते हैं और जमींदारी-कृषि में सक्रिय होने के कारण समाज और राजनीति में प्रभावशाली भी हैं। महाराष्ट्र में मराठा समुदाय के तहत जो जातियाँ आती हैं इनमें कुछ के सदस्य आर्थिक-सामाजिक तौर पर प्रभावशाली हैं और कुछ की स्थिति बहुत अच्छी नहीं है।
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मुसलमानों को शिक्षा में आरक्षण रहेगा बरकरार

mumbai highcourt reject maratha reservation.

मुंबई स्थित समाजसेवी केतन तिरोड़कर ने सरकार के इस फ़ैसले को मुंबई उच्च न्यायालय में चुनौती दी थी और इसी पर यह फ़ैसला सुनाया गया है। केतन तिरोड़कर ने अपनी याचिका में मराठा समाज के सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े होने के दावे को भी चुनौती दी थी।

बीबीसी से बातचीत में केतन तिरोड़कर ने बताया, "मैंने इस निर्णय की संवैधानिक वैधता को चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले के अनुसार किसी भी राज्य में कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से ज़्यादा नहीं होना चाहिए। पिछली सरकार के इस निर्णय के बाद महाराष्ट्र में कुल आरक्षण 73 प्रतिशत हो गया था।"

मुसलमानों को आरक्षण
हाई कोर्ट ने मुस्लिम समाज को शिक्षा क्षेत्र में दिया गया पाँच प्रतिशत आरक्षण बरकरार रखा है। तिरोड़कर ने कहा, "यह आरक्षण देना सरकारी तथा अनुदानित स्कूलों के लिए बाध्यकारी होगा, जबकी निजी स्कूलों पर इस तरह की कोई बाध्यता नहीं होगी।"

विश्लेषक मानते हैं कि विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक कारणों से काँग्रेस-एनसीपी सरकार ने 25 जून 2014 को संबंधित निर्देश जारी किए थे।

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