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भूल जाइए हाफिज-हेडली को पकड़ने का सपना

Wed, 27 Nov 2013 12:22 AM IST
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली
हिमांशु मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली Updated Wed, 27 Nov 2013 12:22 AM IST
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mumbai attack hafiz saeed david headley

मुंबई पर हुए देश के सबसे बड़े आतंकी हमले के मामले में इंसाफ मिलने की उम्मीद कम होती जा रही है। पांच साल बाद भी इस हमले का मास्टर माइंड आतंकी हाफिज सईद और डेविड हेडली हमारी पहुंच से और दूर जा चुके हैं।

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डबल एजेंट होने के कारण अमेरिका हेडली को सौंपने से साफ इनकार कर चुका है तो दूसरी ओर पाकिस्तान हाफिज सईद को सौंपना तो दूर उल्टे इस मामले में अपने यहां सुनवाई तक बंद करा चुका है।
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हेडली को हासिल करने का प्रयास तो केंद्र सरकार भी पहले ही बंद कर चुकी है, दूसरी ओर हाफिज सईद को हासिल करने पर भी भारत का रुख नरम-गरम रहा है।

विदेश मामलों के विशेषज्ञों का कहना है कि वर्तमान परिस्थितियां यही इंगित करती हैं कि इस घटना के मुख्य दोषियों को सजा दिलाकर मारे गए निर्दोष लोगों को सच्ची श्रद्धांजलि का सपना भविष्य में भी सपना ही बन कर रह जाने वाला है। विशेषज्ञ इसके लिए सरकार की ढुलमुल रणनीति और योजना विहीन कूटनीति को जिम्मेदार ठहराते हैं।
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पूर्व राजदूत गौरीशंकर राजहंस कहते हैं कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीति धमक और बेहतर कूटनीतिक प्रबंधन के बदौलत चलती है। दुर्भाग्य यह है कि सरकार इन दोनों ही मोर्चों पर बुरी तरह असफल रही है। उनके मुताबिक डबल एजेंट होने के कारण भले ही हेडली का प्रत्यर्पण बेहद दुष्कर था, मगर कूटनीतिक रास्ता अख्तियार कर भारत उससे सीधे और कई बार पूछताछ तो कर ही सकता था।

बकौल राजहंस चाहे सीमा पर चीन की दादागिरी का मामला हो या फिर पाकिस्तान के लगातार आंख दिखाने का, ऐसे मामलों में ढीलाढाला रवैया अपनाकर सरकार ने दुनिया के मंच पर देश की बेहद कमजोर छवि बना दी है। यही कारण है कि चौतरफा घिरा पाकिस्तान अफगानिस्तान में फंसे अमेरिका की मजबूरी का तो बखूबी लाभ उठा रहा है, मगर भारत हाथ पर हाथ धरे बैठा है।

दूसरे विशेषज्ञ पुष्पेश पंत पांच साल बाद भी असली दोषियों पर शिकंजा न कस पाने के लिए सरकार की रणनीति को ही कठघरे में खड़ा करते हैं।

बकौल पंत हाफिज को हासिल करने की मांग पर सरकार का रुख लगातार ढीला पड़ता गया है। इसी का लाभ उठाते हुए पाकिस्तान हाफिज सहित अन्य दोषियों को भारत को सौंपने की बात तो दूर उल्टा आधे-अधूरे सबूत पेश करने का लगातार आरोप लगा रहा है।


वह तो यहां तक कहते हैं कि चूंकि सरकार इस तरह की घटना के होते रहने और इस पर नकेल न लग पाने की बात मान चुकी है। इसलिए इतनी बड़ी संख्या में निर्दोष लोगों और जांबाज सुरक्षाकर्मियों तथा अधिकारियों के मारे जाने के बाद भी सरकार हमले की बरसी पर पाकिस्तान को दोषियों को सजा देने की मांग की रस्म अदायगी कर देती है।

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