इस 'दरवाजे' से सत्ता तक पहुंची भाजपा
महाराष्ट्र के रण में विदर्भ और मुंबई दो ऐसे क्षेत्र रहे, जिसके बलबूते भाजपा सत्ता के दरवाजे तक पहुंची है। पश्चिम महाराष्ट्र, जिसे एनसीपी का गढ़ कहा जाता है वहां भी भाजपा ने जोरदार एंट्री मारी है। इसके साथ ही पुणे मतलब पवार का फार्मूला भी फेल हो गया।
पश्चिम महाराष्ट्र के बाद भाजपा ने मराठवाड़ा और खानदेश में भी बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन कोकण की आठ सीटों पर भाजपा की दाल नहीं गल सकी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जादू का ही असर रहा कि भाजपा शिवसेना के आमची मुंबई के नारे की हवा निकालते हुए विदर्भ और मुंबई से कांग्रेस के वर्चस्व को भी तोड़ दिया।
हालांकि एनसीपी के सरदारों ने अपना गढ़ कायम रखा, जिससे पवार की लाज बची। मुंबई की राजनीति में भाजपा ने शिवसेना के वर्चस्व को खत्म कर मुंबई- ठाणे -रायगढ़ और पालघर की 76 सीटों में से 25 सीटों पर विजय प्राप्त की है।
एनसीपी के गढ़ में भी एंट्री
रायगढ़ में जहां पहली बार कमल खिला वहीं शिवसेना से गठबंधन में सिर्फ मुंबई की 36 में सिर्फ 13 सीटों पर लड़ने वाली भाजपा ने 15 सीटों पर जीत दर्ज की। इसी तरह विदर्भ के 11 जिलों में हमेशा कांग्रेस और बीजेपी में कड़ा मुकाबला रहा है। अब तक भाजपा पर कांग्रेस भारी पड़ती रही है लेकिन इस बार विदर्भ ने भाजपा की झोली में 62 में से 44 सीटें डाल दीं।
पश्चिम महाराष्ट्र एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का गढ़ कहा जाता है। मोदी लहर में एनसीपी का किला ध्वस्त हो गया। यहां की 44 सीटों में से भाजपा ने 19 सीटें जीतीं जबकि एनसीपी को 10 सीटें मिलीं।
कांग्रेस ने सात और शिवसेना ने पांच सीटें जीतीं। मनसे का भी एकमेव खाता यहीं से खुला। दक्षिण महाराष्ट्र कासातारा, सांगली और कोल्हापुर एक समय में कांग्रेस का अभेद्य दुर्ग था, जिस पर एनसीपी ने कब्जा कर लिया।