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नए 'जन्मे' जनता परिवार की कमान मुलायम के हाथों में

Wed, 15 Apr 2015 11:09 PM IST
Updated Wed, 15 Apr 2015 11:09 PM IST
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mulayam singh yadav is chief of janta dal parivar

भारत की छह राजनीतिक पार्टियों ने मिलकर एक नया दल बनाने का फैसला कर लिया है। जनता परिवार के इस विलय का ऐलान दिल्ली में जनता दल (यूनाइटेड) के अध्यक्ष शरद यादव ने किया। उन्होंने ये घोषणा भी की कि इस नए दल के अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव होंगे।

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जिन छह पार्टियों का विलय होगा वो हैं: जनता दल (यू), समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, भारतीय राष्ट्रीय लोकदल, जनता दल (सेक्यूलर), समाजवादी जनता पार्टी।
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जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव ने बताया कि सर्वसम्मति से मुलायम सिंह यादव को नए दल का नेता चुन लिया गया है। अभी पार्टी का नाम, झंडा और चुनाव चिन्ह क्या होगा? इसको लेकर छह सदस्यीय कमेटी का गठन किया गया है। जल्द ही इसकी भी घोषण कर दी जाएगी। इस छह सदस्यीय कमेटी में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा, लालू यादव, शरद यादव, रामगोपाल यादव भी शामिल होंगे।
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राजद प्रमुख ने इस विलय पर कहा कि हमारे सदस्यों में कोई भी मतभेद नहीं है। हमारा उद्देश्य सिर्फ बीजेपी को हराना है।

ये सभी एक जमाने में उस जनता दल का हिस्सा थे जो 1988 में वजूद में आया था। इसीलिए इसे ‘जनता परिवार’ का विलय भी कहा जा रहा है।

1988 में जनता दल कांग्रेस के खिलाफ वजूद में आया था जिसे तब भाजपा का साथ मिला था। लेकिन आज जो गोलबंदी हो रही है वह भाजपा के खिलाफ हुई है जिसे कांग्रेस का साथ मिलता दिखाई दे रहा है। इस तरह समकालीन भारतीय राजनीति का एक चक्र भी पूरा हुआ है।

क्या है इतिहास

mulayam singh yadav is chief of janta dal parivar

1987 में राजीव गांधी सरकार में वरीय मंत्री रहे कांग्रेस के नेता विश्वनाथ प्रताप सिंह ने बोफोर्स तौप सौदे में हुए कथित भ्रष्टाचार के सवाल पर बगावत कर दी थी। भ्रष्टाचार के खिलाफ विश्वनाथ प्रताप सिंह ने लोकमोर्चा बनाकर पूरे देश में अभियान चलाया जिसको अच्छा जनसमर्थन मिला।

बैंगलौर (अब बैंगलुरु) में पुरानी जनता पार्टी के धड़ों, लोकदल और कांग्रेस (एस) ने लोकमोर्चा के साथ मिलकर 1988 में जनता दल का गठन किया। जयप्रकाश नारायण की जयंती के दिन यह दल वजूद में आया था। 1989 के आम चुनाव में कांग्रेस के बाद जनता दल सबसे बड़ी पार्टी बनी। कांग्रेस के सरकार बनाने से इंकार करने पर भाजपा, वामपंथी और क्षेत्रीय दलों के समर्थन से 1989 के दिसंबर में विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री बने।

दो साल में ही हुई पहली टूट

जनता दल ने सत्ता के दरवाजे पर दस्तक दी और पार्टी में खींच-तान भी शुरु हो गई। 1989 के आम चुनाव के बाद जब जनता दल का नेता चुनने की बारी आई तो पार्टी के तत्कालीन कद्दावर नेता चंद्रशेखर ने देवीलाल का नाम प्रस्तावित किया और देवीलाल ने विश्वनाथ प्रताप सिंह का।

इसके बाद विश्वनाथ प्रताप सिंह मान-मनौव्वल के बाद जनता दल के नेता और फिर भारत के प्रधानमंत्री बने। इस खींच-तान के एक साल के अंदर ही जनता दल टूट भी गया। 1990 के अक्तूबर में विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार से भाजपा ने समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गई।

इस बीच 1990 के नवंबर में चंद्रशेखर ने जनता दल के लगभग 60 सांसदों को साथ लेकर समाजवादी जनता पार्टी बनाई और कांग्रेस के समर्थन से प्रधानमंत्री भी बने।

बिखर गया ‘चक्र’

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जनता दल का चुनाव चिह्न चक्र था। चंद्रशेखर की अगुवाई में हुई टूट से जनता दल में जो बिखराव शुरु हुआ वो लगभग अगले एक दशक के दौरान कई बार सामने आया। चक्र के सारे हिस्से धीरे-धीरे अलग होते गए। 1992 के अक्तूबर में चंद्रशेखर के नेतृत्व वाली समाजवादी जनता पार्टी से टूट कर मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी बनी।

1994 में नीतीश कुमार और दूसरे नेताओं ने लालू प्रसाद यादव का विरोध करते हुए समता पार्टी का गठन किया। 1997 में लालू प्रसाद यादव तत्कालीन जनता दल के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री थे। तब तक वे बहुचर्चित चारा घोटाले में आरोपित हो चुके थे।

उन पर जनता दल के एक धड़े से दबाव था कि वे पार्टी के अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दें।

इस पृष्ठभूमि में उन्होंने 5 जुलाई, 1997 को राष्ट्रीय जनता दल का गठन कर लिया। वहीं एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व में जनता दल (सेक्यूलर) 1999 में वजूद में आया। तब जनता दल से टूट कर यह नई पार्टी बनी थी। उस वक्त शरद यादव जनता दल के अध्यक्ष थे।

बाद में शरद यादव के नेतृत्व में ही जनता दल यूनाइटेड यानी जदयू बनी। जदयू आज जिस स्वरुप में सामने है वह 2003 में तत्कालीन समता पार्टी और जदयू के विलय के बाद अस्तित्व में आया था। तब समता पार्टी के अध्यक्ष जार्ज फर्नांडीस और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष शरद यादव थे। विलय के बाद से शरद यादव जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं।

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