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मुलायम ने बढ़ाई यूपीए की बेचैनी

Tue, 26 Mar 2013 01:26 AM IST
नई दिल्ली/ब्यूरो
नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Tue, 26 Mar 2013 01:26 AM IST
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mulayam singh yadav increased discomfort of upa

द्रमुक के किनारा करने के बाद सपा प्रमुख मुलायम सिंह के लगातार उग्र हो रहे तेवरों और तीसरे मोर्चे के गठन के प्रयास पर सहयोगी एनसीपी के सकारात्मक रुख ने यूपीए सरकार की बेचैनी बढ़ा दी है।

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इस मामले में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए मुलायम ने बजट सत्र के दूसरे चरण में अविश्वास प्रस्ताव की गुंजाइश तलाशने के साथ-साथ तीसरे मोर्चे के गठन पर गैर भाजपा-गैर कांग्रेस दलों का मन टटोलने की जिम्मेदारी अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं रामगोपाल यादव और नरेश अग्रवाल को सौंप दी है।
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उधर अब तक चुप्पी साध रही कांग्रेस ने पहली बार राजग सरकार और लालकृष्ण आडवाणी की तारीफों पर पलटवार करते हुए सपा को धर्मनिरपेक्षता के मोर्चे पर घेरने की कोशिश की है। हालांकि सपा और कांग्रेस के बीच शुरू हुई जुबानी जंग ने दोनों दलों के रिश्तों में बढ़ रही दरार की न केवल पुष्टि की है, बल्कि बजट सत्र के दूसरे चरण में सियासी तूफान का सीधा संकेत भी दिया है।
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सपा के सूत्र तीसरे मोर्चे के गठन की कवायद को सियासी शिगूफा या सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति के आरोपों को खारिज कर रहे हैं। पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि सपा समय पूर्व चुनाव के लिए तैयार है। हालांकि यह इस बात पर निर्भर करेगा कि इसके लिए गैर भाजपा और गैर कांग्रेस दल किस हद तक राजी हैं।

नेता के मुताबिक मुलायम बेहद गंभीरता से तीसरे मोर्चे के गठन का प्रयास कर रहे हैं। यही कारण है कि नई रणनीति के तहत उन्होंने जहां रामगोपाल और नरेश को राजद, तृणमूल कांग्रेस, बीजद, टीआरएस, जद (एस) तथा टीडीपी का मन टटोलने का जिम्मा दिया है, वहीं वह खुद इस बारे में वाम दलों और द्रमुक नेताओं से बात करेंगे। चूंकि बजट सत्र का दूसरा चरण 22 अप्रैल से शुरू हो रहा है, इसलिए सपा इस मामले में जल्दबाजी में नहीं है।

सोमवार को तीसरे मोर्चे पर सरकार की सहयोगी एनसीपी ने सपा के रुख पर सहमति जता कर राजनीतिक सरगर्मी बढ़ा दी। एनसीपी नेता डीपी त्रिपाठी ने सामाजिक बदलाव के लिए धर्मनिरपेक्ष दलों के साथ आने की अपील के बहाने छेड़े गए सपा के तीसरे मोर्चे के राग को सही करार दिया।

त्रिपाठी ने भविष्य में सपा के साथ गठबंधन की संभावनाओं से भी इंकार नहीं किया। इसके तत्काल बाद जब रामगोपाल ने राजग शासनकाल को यूपीए से बेहतर बताया तब हरकत में आई कांग्रेस की ओर से पार्टी महासचिव दिग्विजय सिंह ने पहली बार पलटवार किया। उन्होंने सपा या मुलायम का नाम लिए बिना कहा कि कुछ दलों के लिए विचारधारा तो कुछ दलों के लिए सत्ता महत्वपूर्ण होती है।

कांग्रेस की ओर से सूचना एवं प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी और पार्टी प्रवक्ता राशिद अल्वी ने भी धर्मनिरपेक्षता की आड़ में सपा पर निशाना साधा। अल्वी ने कहा कि राजग सरकार की तारीफ करने वालों को यह नहीं भूलना चाहिए कि इसी सरकार के कार्यकाल में गुजरात दंगे हुए।


जिन आडवाणी की तारीफ की जा रही है उन पर बाबरी विध्वंस मामले में आरोप पत्र दायर है। मनमोहन को वाजपेयी की तुलना में कमजोर बताए जाने संबंधी सपा के बयान पर भी अल्वी ने बेहद तल्ख टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि वर्तमान प्रधानमंत्री की इज्जत पूरी दुनिया करती है। ऐसे में प्रधानमंत्री की बेइज्जती करने वाले देश की बेइज्जती कर रहे हैं।

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