फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   News Archives ›   India News Archives ›   mulayam singh yadav and azam khan

मौलाना-अमर-प्रेम की वजह आजम तो नहीं?

Tue, 05 Aug 2014 09:04 PM IST
Updated Tue, 05 Aug 2014 09:04 PM IST
विज्ञापन
mulayam singh yadav and azam khan

बकौल नरेश अग्रवाल,' राजनीति में कुछ भी हो सकता है।' 'कुछ भी' होने में ही एक ही मंच पर समाजवादी पार्टी मुखिया मुलायम सिंह यादव और अमर सिंह का एक मंच पर आना भी शामिल हैं। मुलायम सिंह के बगलगीर आजम खां का एकाएक हाशिये पर चला जाना भी इसी 'कुछ भी' में शामिल है।

विज्ञापन


2012 विधानसभा चुनावों के बाद से आजम खां मुलायम सिंह यादव के नूर-ए-नजर रहे। अखिलेश यादव की सरकार में में सबसे ताकतवर मंत्री रहे। आजम के भरोसे पर ही मुलायम ने यादव-मुश्लिम गठजोड़ के जरिए लोकसभा चुनाव जीतने का सपना देखा था।
विज्ञापन


अब वही मुलायम मौलाना कल्बे जव्वाद और अमर सिंह पर भरोसा करते नजर आ रहे हैं। विश्लेषकों की माने तो मुलायम के नए भरोसे की वजह भी आजम ही हैं।

जव्वाद से मुलाकात का क्या मतलब है?

mulayam singh yadav and azam khan

रव‌िवार को मुलायम ने शिया धर्म गुरु मौलाना कल्बे जव्‍वाद से मुलाकात की थी। मौलाना जव्‍वाद उत्तर प्रदेश में शिया वक्फ बोर्ड के चुनावों का विरोध कर रहे थे।

सोमवार को चुनाव के लिए नामांकन किया जाना था, लेकिन अंतिम समय में चुनाव स्‍थगित कर दिए गए। प्रदेश की काबीना में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम चुनावों के पक्ष में थे। अपनी ही सरकार का ये फैसला उन्हें नागवार लगा।

मुलायम, कल्बे जव्वाद की मुलाकात और शिया वक्फ बोर्ड के चुनाव को रद्द करना, दोनों घटनाओं ने आजम को बहुत नाराज किया।

अखिलेश से भी आजम हुए नाराज

mulayam singh yadav and azam khan

आजम सरकार से इतने नाराज हुए कि मंगलवार को आयोजित उर्दू अकेडमी के कार्यक्रम में वह नहीं पहंचे, जबकि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव वहां उनका इंतजार करते रहे।

आजम ने कार्यक्रम में न आने को बहाना ये बनाया कि ट्रेन छूटने के कारण वाराणसी से समय पर लखनऊ नहीं लौट सके। दिलचस्प बात ये रही कि कार्यक्रम की रूपरेखा उन्होंने ही तैयार की थी, लेकिन खुद ही नदारद हो गए।

विज्ञापन

आजम को नाराज कर अमर से दोस्‍ती

mulayam singh yadav and azam khan

मानो वक्फ बोर्ड के चुनाव रद्द कर सरकार ने आजम कम नाराज किया था, मुलायम ने 'दुश्मन' अमर सिंह को फोन कर उन्हें और नाराज कर दिया। अमर ‌सिंह आजम खां के पुराने दुश्मनों में हैं।

 2009 लोकसभा चुनावों में अमर के लिए ही मुलायम ने आजम से दुश्मनी मोल ले ली थी। सपा में अमर का कद जैसे बढ़त गया था, आजम ‌हाशिये पर फिसलते गए।

लेकिन 2010 में‌ फिरोजाबाद लोकसभा सीट पर अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव की हार के बाद मुलायम के परिवार और अमर के बीच तल्‍खी आ गई।

अब आजम क्या करेंगे?

mulayam singh yadav and azam khan

उस तल्‍खी ने ही मुलायम के अमर-प्रेम का अंत भी कर दिया। अमर को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। बीते चार सालों में उन्होंने सियासत में दोबारा पैर जमाने के लिए कई कोशिशें की लेकिन हर बार नाकाम रहे।

हाल ही में हुए लोकसभा चुनावों में उन्होंने राष्ट्रीय लोकदल के टिकट पर चुनाव भी लड़ा, ‌लेकिन जमानत भी नहीं बचा सके। ऐसे हालात में जब अमर के लिए राजनीति के सभी दरवाजे बंद दिख रहे थे, मुलायम ने उन्हें फोन कर संजीवनी दे दी।

लेकिन मुलायम ने ये किया आजम को और अधिक नाराज करके। सवाल ये उठता है कि अब आजम क्या करेंगे?

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed