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मुलायम की मांग, जनसंख्या रोकने को बने कानून

Fri, 30 Aug 2013 01:58 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क Updated Fri, 30 Aug 2013 01:58 PM IST
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mulayam singh seek law to control population

देश की बढ़ती जनसंख्या हमेशा से एक बढ़ी समस्या रही है। इस पर नियंत्रण के लिए उपाय भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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लोकसभा में भी यह मामला गर्माया। जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद यादव और समाजवादी पार्टी प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने जनसंख्या नियंत्रण पर सख्त कानून लाने की जरूरत पर जोर दिया।

शरद यादव ने लोकसभा में कहा कि बढ़ती आबादी पर रोक लगाने के लिए कितने ही कानून क्यों न बने हों, लेकिन तब तक कोई फायदा नहीं, जब तक सख्त कानून नहीं बनता। उन्होंने इस पर चर्चा के लिए संसद में एक विशेष सत्र की मांग भी की।
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शरद यादव को इस मामले में सपा नेता मुलायम सिंह यादव का पूरा समर्थन मिला। मुलायम सिंह ने कहा कि यहां जनसंख्या को लेकर एक कानून था, लेकिन उसका सम्मान नहीं किया जा रहा था। आपने कहा कि दो से ज्यादा संतानों वाले माता-पिता को नौकरी नहीं मिलनी चाहिए। सभी चीजें अपने आप ठीक हो जाएंगी।
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क्षेत्रीय नेताओं के रुख से हैरानी
लोकसभा में भूमि अधिग्रहण बिल पर चर्चा के दौरान यह मुद्दा सामने आया। मुलायम ने चर्चा में कहा कि भूमि का लगातार अधिग्रहण भविष्य में भोजन की कमी कर ओर ले जाएगा। देश की जनसंख्या लगातार बढ़ रही है और कृषि योग्य भूमि तीन प्रतिशत की दर से हर साल घर रही है।

इस बयान के बाद शरद यादव ने जनसंख्या नियंत्रण के लिए कानून की जरूरत होने की बात उठाई।

हालांकि, इन क्षेत्रीय नेताओं के जनसंख्या पर अकुंश लगाने की पैरवी से राजनीतिक विश्लेषक हैरान हैं। उनका कहना है कि अपातकाल के दौरान संजय गांधी के जनसंख्या नियंत्रण के लिए अपनाए गए उपायों का इन्होंने विरोध किया था।

तब बलपूर्वक पुरुषों की नसबंदी करवाने को गलत बताया गया था। इतना ही नहीं कांग्रेस समर्थक ने भी इसे भूल बताया था।

देश की आबादी 123 करोड़
इसके साथ ही केंद्र में योजना राज्यमंत्री राजीव शुक्ला ने बृहस्पतिवार को राज्यसभा में बताया कि एक मार्च 2012 तक देश की आबादी का आंकड़ा 123 करोड़ पहुंच गया है। साल 2011-12 के आंकड़ों के मुताबिक देश में गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वालों की संख्या 27 करोड़ दर्ज की गई है।


उन्होंने बताया कि मौजूदा जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर देश में गरीबी रेखा से नीचे रहने वाले लोगों के प्रतिशत में कमी दर्ज की गई है और यह आंकड़ा साल 2004-05 के 37.2 प्रतिशत से घटकर 21.9 प्रतिशत रह गया है।


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