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तीसरे मोर्चे की अगुवाई को तैयार मुलायम
नई दिल्ली/ब्यूरो
Updated Sat, 27 Oct 2012 10:10 PM IST
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केंद्र में अगली सरकार गैर भाजपा और गैर कांग्रेस दलों की बनाने के लिए तीसरा मोर्चा बनाए जाने की पुरजोर वकालत के बीच समाजवादी पार्टी के मुखिया मुलायम सिंह यादव इसकी अगुवाई के लिए तैयार हैं।
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यहां एक कार्यक्रम में कम्युनिस्ट, तेलगूदेशम, फारवर्ड ब्लॉक तथा समाजवादी रुझान के अन्य दलों के नेताओं के बीच चर्चा के दौरान मुलायम ने कहा कि सभी का सहयोग मिले तो वे तीसरे मोर्चे के नेतृत्व के लिए तैयार हैं। मुलायम की हामी के साथ ही इस मौके पर तीसरे मोर्चे के गठन के लिए एक प्रस्ताव पारित कर दिल्ली में केंद्रीय समन्वय समिति बनाने की घोषणा भी की गई।
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समाजवादी नेता डॉ. राम मनोहर लोहिया के लोकसभा में दिए गए बयानों पर लिखी गई एक पुस्तक के विमोचन के बहाने यहां तीसरे मोर्चे की राजनीति को आगे बढ़ाने की कोशिशें शुरू की गईं। गैर कांग्रेस और गैर भाजपा दलों के विकल्प की इस संभावना को तलाशने के लिए देश के जानेमाने समाजवादी विचारक, राजनेता, कम्युनिस्ट पार्टियों के प्रमुख नेता तथा कई अन्य छोटे दलों व संगठनों के प्रतिनिधि शनिवार को यहां कांस्टीट्यूशन क्लब में जमा हुए। ज्यादातर वक्ताओं ने कहा कि देश के वर्तमान हालात में गैर कांग्रेस व गैर भाजपा नीत सरकार बनने की पूरी संभावना है। इसके लिए अभी से प्रयास शुरू कर देना चाहिए।
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मुलायम ने यूपीए सरकार का समर्थन करने के बावजूद इसमें शामिल नहीं होने के अपने फैसले को तीसरे मोर्चे की सियासत करने की रणनीति का हिस्सा साबित करने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि अगर वे सरकार में शामिल हो जाते तो फिर इस बैठक में नहीं आ पाते। सपा प्रमुख ने कहा कि तीसरे विकल्प को लेकर होने वाली किसी भी पहल में वे आगे बढ़ने को तैयार हैं।
भाकपा के वरिष्ठ नेता एबी वर्धन ने कहा कि कम्युनिस्ट तथा समाजवादी दलों के लोग वैचारिक रूप से एक ही धरातल पर हैं। उन्होंने वैचारिक समानता वाले दूसरे दलों को भी एकजुट होने का आह्वान करते हुए मुलायम से इसकी अगुवाई का अनुरोध किया।
उन्होंने कहा कि मुलायम ही यह काम कर सकते हैं। टीडीपी के सांसद नागेश्वर राव ने भी कहा कि मुलायम सिंह गैर भाजपा-गैर कांग्रेस दलों का नेतृत्व करें। कार्यक्रम में कम्युनिस्ट नेता डी राजा, अतुल कुमार अंजान, पत्रकार संतोष भारतीय, उदितराज, रघु ठाकुर, आनंद कुमार आदि उपस्थित थे।
प्रस्ताव भी हुआ पारित
कार्यक्रम में तीसरा मोर्चा बनाने के लिए एक प्रस्ताव भी पारित किया गया। इसमें कहा गया है कि वैकल्पिक राजनीति समय की आवश्यकता है। वर्तमान परिस्थितियों में इसे प्राप्त करना कठिन है परंतु इसके लिए प्रस्तुत एजेंडा पर काम शुरू कर देना चाहिए। इस क्रम में पहले कदम पर समान विचार के छोटे दलों का एक मंच बनाया जाए। जो राजनीतिक दल इसमें विलय नहीं करना चाहें वे तीसरा मोर्चा के रूप में आपस में सीटों का तालमेल कर चुनाव लड़ें। यह तालमेल जनांदोलनों के नए समीकरण से भी हो सकता है। हर राज्य में इस तरह के समीकरणों को सहयोग करें। इसके लिए दिल्ली में एक समन्वय समिति भी बनाई जाए।
नेताओं के दोहरे चरित्र पर उठी उंगली
इस मौके पर प्रमुख मानवाधिकारवादी जस्टिस राजेन्द्र सच्चर ने कहा कि लोहिया जी कहते थे कि नेताओं की कथनी करनी में अंतर नहीं होना चाहिए। पर आज समाजवादी कहलाने वाले लोग पूंजीपतियों के लिए काम कर रहे हैं। नेताओं के दोहरे चरित्र पर जानेमाने पत्रकार कुलदीप नैयर ने भी उंगली उठाते हुए कहा कि यहां जमा सभी नेता गैर सांप्रदायिक हैं लेकिन यही बात भ्रष्टाचार के मामले में इतने विश्वास से नहीं कही जा सकती है। समाजवादियों व कम्युनिस्टों को इस ओर भी ध्यान देना होगा।
अगर मैं सरकार में शामिल हो जाता तो आज तीसरे विकल्प को लेकर हो रही इस बैठक में नहीं आ पाता। तीसरे विकल्प पर होने वाली किसी भी पहल पर मैं आगे बढ़ने को तैयार हूं।--मुलायम सिंह, सपा सुप्रीमो