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ब्राह्मण महासभा में नहीं पहुंचे मुलायम-अखिलेश

Sun, 11 Nov 2012 12:09 AM IST
लखनऊ/ब्यूरो
लखनऊ/ब्यूरो Updated Sun, 11 Nov 2012 12:09 AM IST
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mulayam and akhilesh not reached in brahmin mahasabha

शुरुआत ही विवादों में आ गई। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर ब्राह्मणों को जोड़ने के लिए आयोजित ब्राह्मण प्रतिनिधि सम्मेलन में घोषित कार्यक्रम के बावजूद मुलायम सिंह यादव नहीं पहुंचे।

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मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मेरठ के कार्यक्रम का हवाला देते हुए किनारा कर लिया। मामला संभालने के लिए लोक निर्माण मंत्री शिवपाल सिंह यादव को लगाया गया। जिलों में संगठन की मूल इकाइयों की तरफ से सपा ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों की उपेक्षा का मामला भी उठाया।
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शनिवार को पार्टी मुुख्यालय में आयोजित सम्मेलन में सवाल खड़ा किया गया कि ब्राह्मणों ने सपा पर बहुत भरोसा किया लेकिन सरकार या संगठन की तरफ से उतनी तवज्जो नहीं दी जा रही।’ प्रश्न किया, ‘क्या सपा नेता विधानसभा चुनाव में ब्राह्मणों से किए गए वादों को भूल गए हैं?’
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शिवपाल ने स्व. एस.एम.जोशी, मधुलिमए, जनेश्वर मिश्र, बृजभूषण तिवारी और कामेश्वर उपाध्याय का नाम उल्लेख करते हुए तर्क दिया कि सपा की जड़ों को मजबूत बनाने वाले यह सभी ब्राह्मण ही थे। इसलिए सपा न तो ब्राह्मणों को भूल सकती है और उनकी उपेक्षा कर सकती है।

कुछ गलती हुई है तो उसे सुधारा जाएगा। देने का मौका तो अब आया है। सपा कभी नहीं भूल सकती कि ब्राह्मणों के आशीर्वाद के बगैर सरकार नहीं बन सकती थी। बाद में ब्राह्मण सभा ने प्रस्ताव पारित करके मुलायम को देश की सर्वोच्च कुर्सी तक पहुंचाने के लिए गांव-गांव संपर्क का फैसला किया।

सोची-समझी रणनीति तो नहीं
चर्चा है कि मुलायम सिंह ने सोची-समझी रणनीति के तहत ब्राह्मण प्रतिनिधि सम्मेलन से किनारा किया। वह अपनी छवि सवर्ण व ब्राह्मण हितैषी तो रखना चाहते हैं लेकिन इसके लिए इतना आगे भी नहीं निकल जाना चाहते जहां उनकी पिछड़ों व अल्पसंख्यक हितैषी छवि प्रभावित होने का खतरा खड़ा हो जाए। उन्हें शायद इस बात का भी कहीं न कहीं से आशंका सताने लगी है कि कहीं इससे क्षत्रियों के बीच कोई गलत संदेश न चला जाए।


ब्राह्मण समाज से और मंत्री बनेंगे
शिवपाल यादव ने कहा कि सपा ने प्रमोशन में आरक्षण की व्यवस्था समाप्त करके अपना वादा पूरा किया है। रही बात जिलों में सम्मान की तो जिस जिले में जो ब्राह्मण महासभा के पदाधिकारियों का सम्मान नहीं करेगा, वह पद पर नहीं रहेगा। देने का मौका अब आया है। मंत्रियों की संख्या भी बढ़ाई जाएगी। सपा ने ब्राह्मणों को 42 टिकट दिए थे। इसमें 22 जीते हैं।

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