एक मल्लाह, जो मंच पर मोदी से पहले देता है भाषण
मुकेश साहनी को बिहार के बाहर के शायद ही कोई जानता हो, हालांकि वह विधानसभा चुनावों में भाजपा के 'स्टार कैंपेनर' हैं।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह और बिहार भाजपा के आला नेता अपनी रैलियों में उन्हें साथ रखना नहीं भूलते। मंच पर वह भाजपा दिग्गजों से पहले भाषण देते हैं। उनका कार्यक्रम की सूची पार्टी के बड़े नेताओं के कार्यक्रम की सूची के साथ छपी थी।
35 साल के मुकेश साहनी को साल भर पहले तक बिहार में भी कोई नहीं जानता था। पिछले साल उन्होंने दरभंगा में एक रैली की, जिसमें मल्लाह, साहनी, निषाद, बिंद और गंगोट जातियों के लोग शामिल हुए।
नदियों के किनारे रहने वाली इन जातियों का सूबे में 5 फीसदी वोट पर कब्जा है और उन्हें एकजुट करने के लिए की गई उस रैली ने बिहार की राजनीति में हलचल पैदा कर दी। मुकेश साहनी एकएक बिहार के आला नेताओं की निगाह में आ गए। उन्हें मल्लाहों का नेता माना जाने लगा। मुकेश भी खुद को 'मल्लाहों का बेटा' कहते हैं।
मुंबई के जानेपहचाने नाम हैं मुकेश साहनी
मल्लाह जाति के मतों पर मुकेश की पकड़ के कारण ही भाजपा उन्हें महत्वपूर्ण मानती है। मौजूदा विधानसभा चुनाव में अति पिछडी जातियों (EBCs/MBCs) के मतों को निर्णायक माना जा रहा है, मल्लाह अति पिछड़ी जातियों का ही हिस्सा हैं।
बिहार की राजनीति में कूदने से पहले तक मुकेश मुंबई फिल्म इंडस्ट्री के जानेपहचाने नाम थे। उन्होंने सलमान खान की 'बजरंगी भाईजान', शाहरुख खान की 'देवदास' जैसी फिल्मों का सेट डिजाइन किया है।
वे मुकेश अंबानी के कार्यक्रम और छोटे पर्दे के मशहूर कार्यक्रम 'बिग बॉस' का सेट भी डिजाइन कर चुके हैं। मुंबई में मुकेश की सफलता की कहानी भी कम फिल्मी नहीं है।
दरभंगा जिले के सुपौल के रहने वाले मुकेश 19 साल की उम्र में मुंबई भाग गए थे। बात 1999 की है।
शाहरुख-सलमान की फिल्मों के लिए किया काम
मुकेश अपने एक दोस्त के साथ मुंबई भागे थे, हालांकि चंद दिनों बाद ही अपने पिता जीतन राम के पास वापस लौट आए। छह महीने बाद वह दोबारा मुंबई चले गए। उनका कहना था कि उन्होंने मुंबई में जो आजादी 'महसूस' की थी, वह सुपौल में नहीं मिली।
मुंबई में शुरुआत में उन्होंने एक कॉस्मेटिक कंपनी में सेल्समैन काम किया। कुछ समय बाद वे टीवी शो और फिल्मों के लिए सेट बनाने वाली एक कंपनी से जुड़ गए। उन्हें नए धंधे में सफलता मिली और मुकेश सिनेवर्ल्ड प्राइवेट लिमिटेड नाम से अपनी कंपनी बना ली।
मुकेश से नीतिन देसाई और उमंग कुमार जैसे सफल सेट डिजाइनरों के साथ भी काम किया। देसाई ने ही उन्हें शाहरुख खान की फिल्म 'देवदास' का काम दिलाया। मुकेश का कहना है कि उन्होंने सूरज बड़जात्या की आने वाली फिल्म 'प्रेम रतन धन पायो' का सेट भी बनाया।
जदयू से छिटके, भाजपा ने लपका
हालांकि मुंबई की सफलता के बाद भी वे बिहार में अंजान चेहरे ही थी। मुकेश का राजनीति में आने का वाकया भी रोचक है। वे अपने गांव में एक शादी में आए हुए थे, वहीं उनकी जाति के कुछ लोगों ने उनसे कहा कि वे अपने लिए नाम और पैसा कमा चुके हैं, अब अपनी जाति के लिए भी कुछ करें।
ये वही समय था जब बिहार में नीतीश कुमार अति पिछड़ी जातियों में पैठ बनाने का प्रयास कर रहे थे। मुकेश ने उसके बाद में राजनीति में आने का फैसला किया और दरभंगा के राज मैदान में 2014 में एक रैली की। रैली काफी बड़ी थी और इसने सभी दलों का ध्यान अपनी ओर खींचा।
मुकेश ने उस रैली में शामिल होने के लिए मल्लाह जाति के लोगों को हेलीकॉप्टर में बैठाकर बुलाया, जिसके बाद उस समुदाय के भीतर उनकी लोकप्रियता काफी बढ़ गई। जदयू नेताओं ने उन्हें पार्टी में शामिल कराने का प्रयास किया, नीतीश कुमार से उन्होंने मुलाकात भी की। हालांकि दरभंगा जिले की गौरा बौराम सीट पर उम्मीदवार को लेकर विवाद के कारण जदयू से उनकी दोस्ती नहीं हो पाई।
जदूय से छिटकते ही भाजपा ने उन्हें लपक लिया। फिलहाल वह भाजपा के स्टार कैंपेनर हैं, और पार्टी को लगता है कि वे नालंदा जिले की जोलबीघा और सौदा मुसाहरी जैसी सीटों पर उसे जरूर कामयाबी दिलाएंगे।