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तो क्या बस में सफर करेंगे मंत्री और माननीय

Thu, 26 Sep 2013 12:03 AM IST
विजय गुप्ता/नई दिल्ली
विजय गुप्ता/नई दिल्ली Updated Thu, 26 Sep 2013 12:03 AM IST
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mps mlas likely to be travel in bus

पेट्रोल-डीजल की खपत को रोक लगाने के लिए पेट्रोलियम मंत्री वीरप्पा मोइली का रात में पेट्रोल पंप बंद करने के सुझाव को तो खारिज कर दिया गया है।

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लेकिन अगर उनके नए सुझाव पर आम सहमति बनने के बाद अमल में लाया गया, तो जल्द ही आपको नेताजी और मंत्री बस या मेट्रो जैसे सार्वजनिक वाहनों में सफर करते नजर आएंगे।
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मोइली ने सुझाव दिया है कि ईंधन बचाने के उद्देश्य के लिए हफ्ते में एक दिन बस डे मनाया जाए। यानी इस दिन माननीय और केंद्रीय मंत्री सार्वजनिक वाहनों से दफ्तर आएं।
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पेट्रोलियम मंत्री ने इस संबंध में सभी केंद्रीय मंत्रियों को पत्र लिखा है। ऐसा ही एक पत्र ग्रामीण विकास मंत्री जयराम रमेश के पास भी आया है।

हालांकि रमेश पहले ही सरकारी वाहन का उपयोग सिर्फ दफ्तर आने तक के लिए ही करते हैं और वर्षों से दफ्तर से घर तक का सफर पैदल ही तय करते हैं। इसलिए उन्हें केंद्र का यह प्रस्ताव अच्छा लगा है।

मगर अन्य केंद्रीय मंत्रियों व अधिकारियों को मोइली का यह सुझाव रास नहीं आ रहा है।

बताया जा रहा है कि चुनाव का समय होने के कारण इस तरह के उपायों से कामकाज प्रभावित हो सकता है। समय पर दफ्तर न पहुंचने के लिए अधिकारियों को अच्छा बहाना मिल जाएगा।

यह बात और है कि सार्वजनिक वाहनों से यात्रा करने का जनता पर अच्छा असर पड़ सकता है। लेकिन कोई भी मंत्रालय फिलहाल जोखिम उठाने को तैयार नहीं है।

क्या है बस डे
सप्ताह में एक दिन सभी नेता व मंत्री बस, मेट्रो या किसी अन्य सार्वजनिक साधन से दफ्तर आएंगे। बस डे के दिन सभी सरकारी वाहन दफ्तर में ही खड़ा करने का सुझाव आया है।

इसके साथ ही सरकारी कार्यालयों की समय सीमा को परिवर्तित करने की भी बात कही गई है। जिसके तहत सुबह नौ बजे से शाम पांच बजे की जगह सुबह सात बजे से शाम तीन बजे तक करना शामिल है।


कहीं हिंदी जैसा न हो हाल
खाद्य मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने आशंका जताई है कि कहीं इसका हाल भी हिंदी पखवाड़ा जैसा न हो। सरकारी दफ्तरों में हिंदी में कामकाज को बढ़ावा देने की बात की जाती है, मंत्रालयों में हिंदी पखवाड़ा भी मनाया जाता है। लेकिन कोई हिंदी में काम नहीं करता।

इसी तरह बस डे भी सिर्फ कागजों और घोषणाओं तक ही सीमित न रह जाए। हकीकत में मंत्री और बड़े अफसर लालबत्ती छोड़ बस में आएंगे इसकी तो गुंजाइश ही नहीं दिखती।

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