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राजस्थान, मध्य प्रदेशः लोक सभा चुनाव का खेल

Sat, 15 Mar 2014 12:50 PM IST
Updated Sat, 15 Mar 2014 12:50 PM IST
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mp rajasthan bjp lead

आगामी लोकसभा चुनाव में 272 सीटें जीतने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनो बड़ी पार्टियों कांग्रेस और बीजेपी के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।

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54 सांसदों वाले इन दोनों राज्यों में शिवराज सिंह चौहान और वसुंधरा राजे सिंधिया के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार है।

मध्य प्रदेश में साल 2009 के आम चुनावों में बीजेपी ने 16 सीटें जीती थीं जबकि कांग्रेस ने 12 और बहुजन समाज पार्टी ने एक। 2004 के आम चुनावों में बीजेपी के 25 सांसद थे और कांग्रेस के चार।
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मध्य प्रदेश और राजस्थान दोनों में ही कांग्रेस और बीजेपी में सीधी टक्कर है। दोनों जगह बीजेपी ने नवंबर-दिसंबर में प्रभावशाली ढंग से विधानसभा चुनाव जीते हैं।

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मध्य प्रदेश का हाल

mp rajasthan bjp lead

मध्य प्रदेश में बीजेपी 2003 से सत्ता में है। 2013 में बीजेपी ने 2008 के मुक़ाबले 22 सीटें ज़्यादा हासिल करते हुए कुल 162 सीटें जीतीं।

बीजेपी के मत प्रतिशत में भी नौ फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसे कुल मतदान का 47 फ़ीसदी हासिल हुआ। कांग्रेस का मत प्रतिशत भी चार फ़ीसदी बढ़ा और नुक़सान अन्य सभी पार्टियों को हुआ।

इसके साथ ही शिवराज सिंह चौहान लगातार तीसरी बार मुख्यमंत्री बने हैं और इस मामले में उन्होंने पार्टी के प्रधानमंत्री पद के दावेदार नरेंद्र मोदी की बराबरी कर ली है।

विधानसभा चुनावों में प्रदर्शन को देखते हुए संभावना है कि बीजेपी को कांग्रेस पर उल्लेखनीय बढ़त हासिल हो सकती है।

कांग्रेस को तब बड़ा झटका लगा जब भिंड से उसके लोकसभा चुनाव प्रत्याशी पूर्व आईएएस भगीरथ प्रसाद ने उम्मीदवारी की घोषणा होने के बाद पार्टी छोड़ दी और बीजेपी में शामिल हो गए। लंबे समय से मतभेद की शिकार रही कांग्रेस में और भी फूट होने की ख़बरें हैं।

16वीं लोकसभा के लिए मध्य प्रदेश में अप्रैल की 10, 17 और 24 को होने वाले मतदान में बीजेपी 29 सीटों में से ज़्यादातर जीत ले और अपने मुख्य प्रतिद्वंद्वी को इसके न्यूनतम स्तर पर पहुंचा दे तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

परंपरागत रूप से कांग्रेस के गढ़ रहे गुना और छिंदवाड़ा, जहां से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ जीतते रहे हैं पार्टी की लाज बचा सकते हैं।

राजस्थान का हाल

mp rajasthan bjp lead

राजस्थान में भी कांग्रेस की हालत ऐसी ही है जहां 2009 के लोकसभा चुनावों में उसने 20 सीटें जीती थीं और बीजेपी को 2004 की 21 से घटाकर चार पर सीमित कर दिया था। कांग्रेस ने 2004 में भी 20 ही सीटें जीती थीं।

पिछले साल विधानसभा चुनावों में बीजेपी ने रिकॉर्ड 162 सीटें जीतीं जो 2008 के चुनावों की 78 से 84 ज़्यादा थीं। कांग्रेस आज तक की सबसे कम 21 सीट पर पहुंच गई थी।

बीजेपी के मतप्रतिशत में चार फ़ीसदी की बढ़ोतरी हुई और यह 46 फ़ीसदी पर पहुंच गया। कांग्रेस का वोट नौ फ़ीसदी तक गिरा और यह 33 पर सिमटकर रह गए।

बीजेपी की अभूतपूर्व जीत इसलिए ध्यान देने योग्य है क्योंकि अशोक गहलोत की कांग्रेस सरकार ने मुफ़्त दवा और मुख्य स्वास्थ्य जांच जैसी बहुत सी कल्याणकारी योजनाएं लागू की थीं। लेकिन इनसे उसकी हार टाली नहीं जा सकी।

हालांकि हार के बाद कांग्रेस हाल ही में राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष नियुक्त पार्टी के युवा चेहरे सचिन पायलट के नेतृत्व में अपनी खोई ज़मीन वापस पाने के लिए बहुत कोशिश कर रही है लेकिन अभी इसका असर नज़र नहीं आ रहा है।

दूसरी ओर दो बार मुख्यमंत्री रहीं, वसुंधरा राजे, ने पद संभालते ही राज्य के विभिन्न इलाक़ों में कैंप ऑफ़िस लगाने शुरू किए हैं जिसका फ़ायदा उनको हो सकता है।

सिंधिया राजघराने की बेटी और धौलपुर राजघराने की बहू, वसुंधरा राजे कोशिश कर रही हैं कि उनकी अभिमानी छवि बदल जाए और इसके लिए वह आम लोगों से मिल रही हैं और बात कर रही हैं।

नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री उम्मीदवार होने से मध्य प्रदेश और राजस्थान में बीजेपी को फ़ायदा मिल सकता है और वह पार्टी उम्मीदवारों को जिताने में मददगार हो सकते हैं। पाकिस्तान से सटी सीमा वाले राज्य, राजस्थान, में अप्रैल की 17 और 24 तारीख़ को होने वाले चुनाव में कांग्रेस बचाव की मुद्रा में है और इसके मुट्ठीभर उम्मीदवार ही जनता की अदालत से पास हो पाएंगे जबकि बीजेपी के लिए ये रास्ता आसान हो सकता है।

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