भाजपा की मंत्री बोलीं, घर में पालें शेर और बाघ
शेरों और बाघों की संख्या बढ़ाने के लिए मध्य प्रदेश की एक वरिष्ठ मंत्री ने एक अजीब सा सुझाव दिया है। इनकी मांग है कि शेरों और बाघों को घर में पालने अथवा पालतू जानवर की तरह रखने के लिए कानून बनाया जाना चाहिए। ऐसा करने से इन जानवरों का संरक्षण हो सकेगा।
मध्य प्रदेश की पशुपालन, बागवानी और खाद्य प्रसंस्करण मंत्री कुसुम मेहदेले ने प्रदेश के वन विभाग को इस संबंध में एक प्रस्ताव भेजा है। इसमें कुछ अफ्रीकी और थाईलैंड जैसे दक्षिण एशियाई देश में मौजूद कानूनों का हवाला दिया गया है। मेहदेले का कहना है कि इस तरह के कानून से शेरों और बाघों की आबादी बढ़ाने में मदद मिलती है।
देश में बाघों के संरक्षण को लेकर चल रही विभिन्न परियोजनाओं की ओर ध्यान दिलाते हुए उन्होंने कहा कि इन पर करोड़ों रुपये खर्च होते हैं लेकिन बाघों की संख्या में कोई आश्चर्यजनक बढ़ोतरी नहीं हुई है।
दूसरे देशों के कानूनों का दिया हवाला
थाईलैंड और कुछ दूसरे देशों में शेरों और बाघों को पालतू जानवरों की तरह रखने को कानूनी मान्यता मिले होने का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि इसके काफी सकारात्मक परिणाम दिखे हैं और इन देशों में इन जानवरों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है।
राज्य के वन मंत्री गौरी शंकर शेजवार को पिछले साल सितंबर में भेजे गए प्रस्ताव में उन्होंने कहा है कि अगर ऐसी किसी संभावना पर विचार होता है तो जरूरी कार्रवाई करते हुए दिशानिर्देश जारी किए जाएं। मेहदेले के प्रस्ताव पर मध्य प्रदेश के मुख्य प्रधान वन संरक्षक नरेंद्र कुमार ने राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) को पत्र लिखकर उनकी टिप्पणी मांगी है।
भोपाल के वन्यजीव कार्यकर्ता अजय दुबे ने इस संबंध में एक आरटीआई दाखिल की थी। उन्हें इसके जवाब में मंत्री के सुझाव और नरेंद्र कुमार के नोट वाले पत्र की कॉपी मिली है।