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सचिन के मैच में मंत्री को न बुलाने पर बिफरे सांसद
संजय मिश्र/अमर उजाला, दिल्ली
Updated Tue, 03 Dec 2013 12:22 AM IST
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सचिन तेंदुलकर के ऐतिहासिक विदाई टेस्ट मैच देखने का न्योता केंद्रीय खेल मंत्री को नहीं देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है।
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युवा और खेल मंत्रालय से संबंधित संसदीय सलाहकार समिति की सोमवार को हुई बैठक में बीसीसीआई के इस रुख को उसकी उद्दंडता करार देते हुए घोर निंदा की गई।
सांसदों ने साफ कहा कि खेल मंत्री को नहीं बुलाना किसी व्यक्ति विशेष का अपमान नहीं, बल्कि भारत सरकार और लोकतंत्र का अपमान है।
इस संबंध में अमर उजाला में बीते 14 नवंबर को छपी खबर का संज्ञान लेते हुए संसदीय समिति ने भविष्य में बीसीसीआई सहित अन्य खेल संस्थानों की मनमानी बंद करने के लिए स्पोर्ट्स बिल को जल्द कानूनी जामा पहनाने पर जोर दिया।
वहीं बीसीसीआई को अन्य खेल संघों की तरह आरटीआई के दायरे में लाने के लिए बिल में प्रावधान करने की मांग की गई। बीसीसीआई के इस रवैये पर खेल मंत्रालय ने अपमान का घूंट पीकर भले चुप्पी साध ली, मगर सांसदों को यह बेहद नागवार गुजरा है।
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सूत्रों के अनुसार वैसे तो सोमवार को संसदीय सलाहकार समिति की बैठक श्रीपेरंबदूर में राष्ट्रीय युवा संस्थान के उन्नयन पर चर्चा के बुलाई गई थी। मगर बैठक में सचिन का विदाई मैच देखने का न्योता खेल मंत्री जितेंद्र सिंह को नहीं भेजने का मुद्दा गरमागरम तरीके से उठा।
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संसदीय सलाहकार समिति की बैठक में सांसद डॉ. सुशांत राजन ने अखबार की खबर का हवाला देते हुए इस मुद्दे को उठाया। उन्होंने बीसीसीआई के रवैये को भारत सरकार और लोकतंत्र का अपमान करार दिया।
राजन ने कहा कि बीसीसीआई को स्वतंत्रता के बहाने उद्दंडता की छूट नहीं दी जा सकती। इसी दौरान उन्होंने स्पोर्ट्स बिल को जल्द से जल्द कानूनी जामा पहनाने के साथ ही बीसीसीआई सहित सभी खेल संस्थाओं को आरटीआई के दायरे में लाने के लिए इस बिल में प्रावधान करने की मांग की।
बीसीसीआई के खिलाफ निंदा प्रस्ताव की मांग
जब सुशांत ने बीसीसीआई के इस रवैये के खिलाफ निंदा प्रस्ताव लाने और पारित करने की मांग की तो समिति के ज्यादातर सदस्यों ने इसका समर्थन किया। खुद राजन ने इसकी पुष्टि की।
बैठक में तृणमूल कांग्रेस की सांसद शताब्दी रॉय और त्रिपेंद्रनाथ रॉय ने भी बीसीसीआई के रवैये पर आपत्ति जताई। खेल मंत्री जितेंद्र सिंह के साथ युवा और खेल मामलों के सचिव एएम शरण तथा मंत्रालय के तमाम आला अधिकारी बैठक में मौजूद थे।
क्या है मामला
बीसीसीआई ने सचिन के मुंबई के वानखड़े स्टेडियम में अंतिम टेस्ट मैच को यादगार बनाने के लिए स्टेडियम और उसके बाहर कई तरह का आयोजन किया था। इसमें उद्योग, राजनीति, कला सहित अन्य क्षेत्र की हस्तियों को तो आमंत्रित किया था, मगर खेल मंत्री की अंतिम मैच देखने की इच्छा जताने के बावजूद उन्हें पूरे आयोजन से दूर रखा गया।
इससे पहले वर्ष 2011 में मुंबई में हुए क्रिकेट विश्व कप के मैच में भी तत्कालीन खेल मंत्री अजय माकन को बीसीसीआई ने न्योता नहीं भेजा। तब माकन ने भी जितेंद्र की तरह मैच देखने की इच्छा जाहिर की थी।