बेटी को गोद में बैठाकर मां ने लगाई आग
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गंभीर बीमारी से जूझ रही एक महिला इलाज के लिए पैसे नहीं जुटा पाई तो उसने अपनी आठ माह की बेटी के साथ आत्मदाह कर लिया। घटना के समय महिला की दो बेटी घर के बाहर खेल रही थीं और उसका पति मजदूरी करने गया था। मोहल्ले के लोगों ने चंदा इकट्ठा कर महिला का अंतिम संस्कार कराया।
गांव का अंजू सिंह पुत्र बलवंत उर्फ बल्लू अपने पिता के साथ रहता है। मां की करीब एक साल पहले मृत्यु हो चुकी है। भाई रमन अपने परिवार के साथ अलग रहता है। अंजू सिंह पास के गांव शाहनगर में एक किसान के यहां मजदूरी करता है।
उसकी शादी हरिद्वार के थाना श्यामपुर के गांव लालढांग निवासी कौशल देवी पुत्री बुद्ध सिंह से हुई थी। कौशल की यह दूसरी शादी थी। उसके एक पुत्री वर्षा (5) पहले पति से है। अंजू से दो पुत्री आरती (3) और रचना (8 माह) थी।
कौशल कुछ दिनों से बीमार थी। मजदूर पेशा अंजू सिंह पैसे की तंगी के कारण उसका इलाज नहीं करा पा रहा था। शुक्रवार सुबह करीब साढे़ आठ बजे उसने मकान के मेन गेट की कुंडी लगाई और रचना के साथ कमरे में बंद हो गई।
इलाज के लिए पैस न जुटा पाने से थी परेशान
ग्रामीणों के अनुसार कमरे की अंदर से कुंडी बंद कर उसने अपने और बच्ची के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा ली। घटना के समय ससुर और पति मजदूरी करने गए थे। पड़ोसियों ने कमरे से धुआं और आग की लपट उठती देखीं।
मकान की छत तोड़कर ग्रामीण अंदर कूदे। पानी डालकर किसी तरह आग बुझाई, लेकिन तब तक मां-बेटी की मौत हो चुकी थी। सूचना पर सीओ सिटी शैलेंद्र लाल ने गांव में पहुंचकर महिला के ससुर और पति के बयान दर्ज किए।
वर्षा और आरती को ढूंढा था कौशल ने
ग्रामीणों के अनुसार अंजू की दोनों पुत्री वर्षा और आरती खेलने के लिए बाहर चली गई थीं। घटना से कुछ देर पहले कौशल ने उन्हें तलाश रही थी, लेकिन दोनों बहन उसे मिली नहीं। अगर दोनों बच्चियां उसे मिल जाती तो वह उन्हें भी अपने साथ जलाकर मार डालती।