विदेश में जमा है भारत का 265 टन से ज्यादा सोना
भारत के पास कितना सोना मौजूद है और कहां रखा हुआ है। ये हमेशा से आम लोगों के बीच उत्सुकता का विषय रहा है। इस उत्सुकता से पर्दा उठाते हुए भारतीय रिजर्व बैंक ने एक आरटीआई के जवाब में बताया है कि भारत के पास सोने का कितना भंडार है।
ये सोना कहां रखा है। ये सोना सिर्फ भारत में ही या विदेश में भी रखा हुआ है।आरटीआई के जवाब में रिजर्व बैंक ने ये भी बताया कि सोने को किस रूप में रखा गया है।
557.75 टन है कुल सोना
मुंबई के निवासी अनीश झवेरी की आरटीआई के जवाब में रिजर्व बैंक ने बताया कि भारत के पास कुल सोने की तादाद 557.75 टन है। रिजर्व बैंक ने 31 मार्च 2013 तक के आंकड़ों के आधार आधार पर यह जानकारी दी है।
सोने का भंडारण कहां किया गया है, इस पर रिजर्व बैंक ने बताया कि ये सोना भारत और विदेश दोनों जगह रखा गया है। भारत में ये सोना भारतीय रिजर्व बैंक के निर्गम विभाग के वॉल्ट में रखा गया है।
जबकि विदेश में इस सोने को बैंक ऑफ इंग्लैंड और बैंक ऑफ इंटरनेशनल सैटलमेंट में रखा गया है।
265.49 टन है विदेश में सोना
आरटीआई के जवाब में बताया गया कि विदेश में जो भारत का सोना रखा गया है उसकी मात्रा 265.49 टन है।
जबकि भारत में 292.26 टन सोना मौजूद है।
याचिकाकर्ता अनीश के सवाल का जवाब देते हुए जानकारी दी गई कि विदेश में जो सोना रखा गया है वो छड़ों के रूप में है और बैंक ऑफ इंग्लैंड, बैंक ऑफ इंटरनेशनल सैटलमेंट इसकी मासिक आधार पर पुष्टि भी करता है।
भारत सरकार करती है बाहर रखने का फैसला
इस आरटीआई में यह भी पूछा गया कि ये कौन तय करता है कि कितना सोना देश में रखा जाएगा और कितना विदेश में? इसके जवाब में आरबीआई ने बताया कि भारतीय रिजर्व बैंक अधिनियम 1934 के प्रावधानों के मुताबिक भारत सरकार से विचार विमर्श करके इसका फैसला करती है।
इस विचार विर्मश के बाद ही कितना सोना विदेश भेजा जाना है इसका निर्धारण किया जाता है।
26 जून 2013 को हुआ था आखिर बार ऑडिट
विदेशी बैंकों में रखे देश के सोने का आखिरी बार ऑडिट कब हुआ। इसको लेकर भी रिजर्व बैंक ने जानकारी दी। 26 और 28 जून 2013 कोभौतिक तौर पर सोने के भंडार का ऑडिट किया गया।
हालांकि ये सारे आंकड़े मार्च 2013 के आधार पर सरकार ने दिए हैं। रिजर्व बैंक ने भी बताया कि नमूने के आधार पर इस पूरे सोने ऑडिट किया गया।
आरटीआई में ऑडिट की रिपोर्ट मांगे जाने पर रिजर्व बैंक ने जवाब दिया कि इसे जारी करने से देश के आर्थिक हितों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा और सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 8 (1) (ए) के तहत न जाहिर करने की छूट प्राप्त है।
जिसमें किसी भी ऐसी जानकारी को जाहिर करने से देश की संप्रभुता, अखंडता, राज्य की सुरक्षा, वैज्ञानिक और आर्थित हितों को खतरा हो।