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भ्रष्टाचार पर ज्यादा केंद्रित रहा हिमाचल में प्रचार

Fri, 02 Nov 2012 07:46 PM IST
शिमला/अमर उजाला ब्यूरो
शिमला/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 02 Nov 2012 07:46 PM IST
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more focused on corruption in himachal election campaign

हिमाचल के विधानसभा चुनावों से पहले भले ही विकास और सरकार की नाकामियों पर चुनाव लड़ने के वायदे किए जा रहे थे, लेकिन चुनाव प्रचार में अधिकतर समय भ्रष्टाचार का मुद्दा ही गरमाया रहा। (वीरभद्र स्पष्ट करें वीबीएस : धूमल) और (धूमल ने दी लूट की छूट : वीरभद्र) इस तरह से आरोप रोजाना चुनावी रैलियों में दोनों दलों की ओर से लगते रहे। चुनावी बयार में कौन है वीबीएस, कौन है जसवंत सिंह जैसे आरोप लगाते हुए प्रश्न किए गए। केंद्रीय नेताओं तक ने आयकर विभाग की फाइलों को लेकर शिमला में खुलासे किए।

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इसके जवाब में कांग्रेस की ओर से प्रदेश में भाजपा के शासन में भूमि खरीद के मामलों को लेकर मुख्यमंत्री और उनके परिवार को निशाना बनाया। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष के रिश्तेदारों पर गलत तरीके से डीएलएफ को जमीनें बेचने के आरोप लगे। 24 अक्तूबर के बाद जब भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी पर भी घोटाले के आरोप लगे तो इसके बाद भाजपा भी भ्रष्टाचार के मसले पर बैकफुट पर जाती दिखी।
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इससे पहले भाजपा की ओर से वीरभद्र सिंह को घेरने के लिए कई तरफ से भ्रष्टाचार के मामलों पर आरोप लगाए गए। इसके बाद हिमाचल में चुनाव प्रचार की दिशा कुछ बदली हुई दिखी। भाजपा की ओर से चुनाव घोषणा पत्र में शामिल इंडक्शन चूल्हे को आगे लाया गया। इसका प्रचार पार्टी के नेताओं ने रैलियों से लेकर नुक्कड़ सभाओं तक में किया।
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दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से भी हिमाचल के लिए गैस सिलेंडर का कोटा बढ़ाने की मांग केंद्रीय नेताओं की रैलियों में जोर-शोर से उठाई गई। दोनों ही दल अपनी योजनाओं को गिनाने में लगे हैं। पहले की तरह भ्रष्टाचार के मसले पर एक-दूसरे को घेरने के लिए सियासी वार कम किए जा रहे हैं।


केंद्र की अनदेखी, पैसे का सही इस्तेमाल न करने के आरोप
चुनाव प्रचार के दौरान भाजपा के केंद्रीय नेताओं सहित हिमाचल भाजपा ने यूपीए सरकार पर गैर कांग्रेस शासित राज्यों से सौतेला व्यवहार कर अनदेखी के आरोप लगाए गए। दूसरी तरफ, कांग्रेस की ओर से यूपीए अध्यक्ष और प्रधानमंत्री सहित सभी ने हिमाचल सरकार पर केंद्र के पैसे का सही इस्तेमाल न करने का आरोप लगाया गया।

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