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मानसून सत्र के हंगामे में पौने दो अरब स्वाहा

Fri, 14 Aug 2015 10:13 AM IST
Updated Fri, 14 Aug 2015 10:13 AM IST
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monsoon session washout and loss of exchequer

मानसून सत्र में संसद के दोनों सदनों के 119 घंटे की कार्यवाही ललित गेट और व्यापम पर हुए हंगामे की भेंट चढ़ गई। इसके साथ ही 1.78 अरब रुपए भी स्वाहा हो गए। कभी कोलगेट पर भाजपा के हंगामे से तिलमिलाई यूपीए सरकार ने इसे बड़ा मुद्दा बनाया था तो अब सत्ता में आई भाजपा ने इसे बड़ा मुद्दा बनाने की घोषणा की है।

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उल्लेखनीय है कि यूपीए कार्यकाल के दौरान संसदीय कार्यमंत्री पवन कुमार बंसल ने संसद की एक मिनट की कार्यवाही पर 2.5 लाख रुपए खर्च होने का हवाला देते हुए सदन न चलने देने पर भाजपा पर तीखा सियासी हमला बोला था। अब जबकि ललित गेट और व्यापम मामले में कांग्रेस ने मानसून सत्र की कार्यवाही को हंगामे की बारिश में धोया है तो भाजपा इसका हिसाब मांग रही है। 
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उल्लेखनीय है कि मानसून सत्र की 17 बैठकों में जहां राज्यसभा में कोई विधायी कामकाज नहीं हो पाया, वहीं लोकसभा में महज 6 बिल ही पारित कराए जा सके और 10 बिल ही पेश किए जा सके। चूंकि लोकसभा में पारित बिल को राज्यसभा में पारित नहीं कराया जा सका, इसलिए इन बिलों की संवैधानिक अहमियत सत्र खत्म होते ही समाप्त हो गई।
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कभी कांग्रेस ने मांगा था तो अब भाजपा मांगेगी हिसाब

monsoon session washout and loss of exchequer

संसद में सरकार और विपक्ष की सियासी जिद जनता की गाढ़ी कमाई पर भारी पड़ गई। कांग्रेस के आरोपी मंत्रियों के इस्तीफे पर अड़े रहने और सरकार की ओर से गतिरोध तोड़ने के लिए ठोस पहल न होने के कारण लोकसभा में बर्बाद हुए 34 घंटे की कार्यवाही पर 51 करोड़ रुपए जाया हुए तो राज्यसभा में बर्बाद हुए 85 घंटे की कार्यवाही पर 1.27 अरब रुपए जाया हो गए।

हालांकि लोकसभा में कांग्रेस के हंगामे के बावजूद प्रश्नकाल और शून्यकाल में 47 घंटे कामकाज हुआ। इस दौरान लोकसभा की प्रोडक्टिविटी जहां 48 फीसदी रही वहीं राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी महज नौ फीसदी ही रही।

उल्लेखनीय है कि संसद की एक मिनट की कार्यवाही पर 2.5 लाख तो एक घंटे की कार्यवाही पर डेढ़ करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

यूपीए सरकार के कार्यकाल के दौरान संसदीय कार्य मंत्री पवन कुमार बंसल ने प्रति मिनट ढाई लाख रुपये खर्च होने का हवाला देते हुए भाजपा से कोल गेट, 2जी मामले में हंगामे के कारण बर्बाद राशि का हिसाब मांगा था। भाजपा अब इसी तर्ज पर कांग्रेस से देश की सभी 543 सीटों पर अभियान चला कर मानसून सत्र के दौरान हुए नुकसान का हिसाब मांगेगी।

खराब हुआ मोदी सरकार का ट्रैक रिकार्ड

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हंगामेदार मानसून सत्र ने मोदी सरकार के ट्रैक रिकार्ड को भी धो दिया। इससे पहले हुए तीन सत्र के दौरान संसद के दोनों सदनों की प्रोडक्टिविटी करीब 100 फीसदी थी। बजट सेशन में तो लोकसभा की प्रोडक्टिविटी 122 फीसदी तो राज्यसभा की प्रोडक्टिविटी 102 फीसदी तक जा पहुंची थी।

मानसून सत्र में हुए धन की बर्बादी पर संदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कहा के ये जनता की गाढ़ी कमाई का अपमान है। तर्कहीन और तथ्यहीन आरोपों के सहारे गांधी परिवार का सियासी वजूद बचाने के लिए कांग्रेस ने संसदीय प्रजातंत्र का मजाक बना कर रख दिया। हम जनता के सामने करोड़ों रुपये का नुकसान कराने वाली कांग्रेस का पर्दाफाश करेंगे।

कांग्रेस सांसद सुष्मिता देव ने कहा ‌कि देश की जनता ने मोदी सरकार को बहुमत सुशासन के लिए दिया है लूट के लिए नहीं। हमने उचित मुद्दा उठाया। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पीएम और विदेश मंत्री ने हमारे एक भी सवाल का जवाब नहीं दिया। हंगामे की बात करने वाली भाजपा को अपना अतीत देखना चाहिए।

लोकसभा में कामकाज

monsoon session washout and loss of exchequer
लोकसभा...........................कार्यकाल.................सदन की कार्यवाही (घंटे में).......बैठकें
पहली...............................1952-57....................3,784.........................................677
दूसरी...............................1957-62..............3,652...............................................567
तीसरी..........................1962-67............3,733......................................................578
5वीं..........................1971-77...........4,072.........................................................613
10वीं................1991-96.............2,528.............................................................423
13वीं..........1999-2004...........1,946...............................................................356
14वीं..........2004-09....................1,737.........................................................332
15वीं............2009-14......................1,331.......................................................345

15वीं लोकसभा में खास

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- 1950 के दशक में लोकसभा की औसत बैठक 127 दिन और राज्यसभा की बैठक 93 दिन होती थी। वर्तमान में दोनों ही सदनों में यह औसत घटकर 73 दिन की हो गई है।

- पहली लोकसभा (1950 से 1955) : औसतन प्रतिवर्ष 72 विधेयक पारित किए गए, लेकिन 15वीं लोकसभा में यह आंकड़ा घटकर 40 पर आ गया।

- पंद्रहवीं लोकसभा (2009-2014) : 345 बैठक हुईं, 1331 घंटे कार्य किया गया और पांच साल में सरकार केवल 165 विधेयक पारित करा सकी, 126 विधेयक लंबित रह गए। लोकसभा में 723.7 घंटे व्यवधान के कारण बर्बाद हुए, जिनमें प्रश्नकाल का 40 प्रतिशत समय भी शामिल है। जबकि 1952 से 1967 के बीच तीन लोकसभाओं की औसतन 600 बैठकें हुईं और उनकी औसतन 3700 घंटे कार्यवाही चली।

नोट : मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं हुआ है। ऐसे में सदन की बैठक आहूत होने और सदनों के हंगामे की भेंट चढ़ने के बाद इसमें बढ़ोत्तरी हो सकती है।

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