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मानसून सत्रः क्या दूसरे हफ्ते होगा कुछ काम, पक्ष-विपक्ष अपने रुख पर कायम

Mon, 27 Jul 2015 02:50 AM IST
Updated Mon, 27 Jul 2015 02:50 AM IST
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monsoon season of parliament

सरकार और विपक्ष के अपने पुराने रुख पर अडिग रहने के कारण सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र के दूसरे हफ्ते में भी गतिरोध दूर होने के आसार नहीं हैं।

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कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी के दामाद राबर्ट वाड्रा को निशाना बनाए जाने पर पलटवार के लिए जशोदा बेन की आरटीआई को मुद्दा बनाने के मामले में कांग्रेस सोमवार को कार्यवाही शुरू होने से पूर्व अंतिम निर्णय लेगी।
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दूसरी ओर भाजपा विपक्ष में फूट डालने के लिए सोमवार को ही प्रमोशन में आरक्षण बिल का भूत खड़ा करने के मामले में अंतिम निर्णय लेगी।

प्रेम प्रसंग और नपुंसकता को किसानों की आत्महत्या के प्रमुख कारणों में से एक बताने के कृषि मंत्री राधामोहन सिंह के बयान को भी को बताए जाने को जनता परिवार तूल देने के पक्ष में है।
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जदयू के केसी त्यागी ने इस मामले में सिंह के खिलाफ राज्यसभा में विशेषाधिकार हनन का नोटिस दिए जाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा है कि माली हालत के कारण आत्महत्या करने रहे किसानों का कृषि मंत्री ने अपमान किया है।

हालांकि जनता परिवार के कुछ घटक ललित गेट और व्यापम घोटाला विवाद से आगे बढ़ते हुए किसानों को मिले कम मुआवजे का सवाल खड़ा करना चाहते हैं।

कांग्रेस के रणदीप सिंह सुजरेवाला ने कहा है कि गतिरोध दूर करने की जिम्मेदारी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की है। पीएम मोदी का विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, राजस्थान और मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्रियों वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान से इस्तीफा लेने की घोषणा करते ही सत्र की सारी बाधा दूर हो जाएगी।

सरकार सुषमा, वसुंधरा और शिवराज के इस्तीफे के मूड में नहीं

monsoon season of parliament

पहला हफ्ता हंगामे की बारिश में धुलने के बाद सत्र का दूसरा हफ्ता भी इसी राह की ओर बढ़ता दिख रहा है। सरकार ने रविवार को भी संकेत दिया है कि वह विपक्ष के इस्तीफे की मांग स्वीकार नहीं करेगी, जबकि कांग्रेस ने भी साफ कर दिया है कि इस्तीफे के बिना गतिरोध दूर नहीं होगा।

कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि रणनीति सोमवार के सुबह बनेगी। इस दौरान यह फैसला होगा कि वाड्रा को निशाना बनाए जाने के बाद पार्टी उसी तर्ज पर जशोदा बेन की आरटीआई को मुद्दा बनाए या नहीं।

अगर बेन की आरटीआई को मुद्दा नहीं भी बनाया गया तो भी पार्टी मंत्रियों के इस्तीफे की मांग पर डटी रहेगी। उधर भाजपा की रणनीति सोमवार को अपने एससी-एसटी सांसदों के जरिए प्रमोशन में आरक्षण बिल को पेश किए जाने की मांग कराने की है। पार्टी के रणनीतिकारों को लगता है कि ऐसा कर वह विपक्षी एकता में सेंध लगा कर कांग्रेस को अलग-थलग कर सकती है।

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