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ऐसा क्या था रिश्ता जो अंतिम संस्कार में पहुंचा बंदर?

Sun, 26 May 2013 12:28 AM IST
मेरठ/ब्यूरो
मेरठ/ब्यूरो Updated Sun, 26 May 2013 12:28 AM IST
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monkey arrives at funeral

एक युवक की मौत का गम बांटने पहुंचे बंदर की उपस्थिति ने सभी को अचंभित कर दिया। आखिर इस बंदर से मृतक का क्या रिश्ता था?

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कौन सा ऐसा लगाव था कि मादा बंदर इंसानों की तरह अंतिम क्रिया के दौरान हर पल शव और मृतक के परिजनों के इर्द-गिर्द मौजूद रही। यह सवाल हर किसी की जुबां पर था।

एनएएस कालेज में वरिष्ठ लिपिक सुरेंद्र सिंह 86/3 शास्त्रीनगर में रहते हैं। सुरेंद्र सिंह का बड़ा बेटा सुनील तोमर (31) तीस हजारी कोर्ट दिल्ली में वकील था। कैंसर की बीमारी से सुनील की शुक्रवार रात दिल्ली में मृत्यु हो गई।
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परिजन शनिवार सुबह करीब साढ़े चार बजे उसका शव लेकर घर पहुंचे। घर पहुंचने के बाद जब परिजन और आसपास के लोग गमगीन माहौल में अंतिम यात्रा की तैयारी में जुटे थे। तभी करीब पांच बजे एक बंदर भीड़ के बीच से होकर शव के पास जा बैठा।
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बंदर ने पहले सुनील के पैरों को छुआ और फिर उसके सिर के पास जाकर बैठ गई। जब शव को स्नान कराया गया तो इस बंदर ने भी एक व्यक्ति के हाथ से लोटा लेकर पानी शव के ऊपर डाला।

शवयात्रा में शामिल होते हुए बंदर सूरजकुंड स्थित शमशान घाट तक जा पहुंचा। उसने चिता पर लकड़ी तक रखने का प्रयास किया।

बंदर ने कफन में ढके शव का चेहरा उघाड़ कर अंतिम दर्शन करते हुए एक बार फिर उसके पैर छुए, अंतिम क्रिया में परिजनों की मदद की।

अंतिम संस्कार के बाद जब गमगीन लोग हैंडपंप पर हाथ पांव धोकर पानी पी रहे थे, वहीं क्रिया बंदर ने भी की। अंतिम क्रिया के बाद अन्य लोगों के साथ बंदर फिर सुरेंद्र सिंह के घर वापस आ गया।

घर पहुंच कर बंदर ने अपने हाथों से गमगीन लोगों को पानी पीने के लिए गिलास दिए। उसके बाद रोती हुई सुनील की मां प्रेमवती की गोद में बैठकर और सुनील की पत्नी पूनम को गले लगकर सांत्वना दी। लोगों के घर से जाते ही बंदर भी चला गया।

हनुमान भक्त था सुनील
सुरेंद्र सिंह ने बताया कि सुनील हनुमान भक्त था। मेहंदीपुर स्थित बालाजी के दरबार में वह अक्सर जाता था। बालाजी की बहुत ही श्रद्धा और नियम से पूजा किया करता था। सुरेंद्र सिंह के अनुसार यह बंदर पहले कभी यहां नहीं आया।


ये करिश्मा था, हमने पहली बार देखा
ये किसी करिश्मे से कम नहीं है। मौत के बाद परिवार पूरी तरह टूट सा गया। लेकिन बंदर की उपस्थिति ने गम को कम करने के साथ ही एक शक्ति भी प्रदान की है।
- देव सिंह, सुनील का चचेरा भाई

ईश्वरीय चमत्कार है। इस बंदर को पहले कभी नहीं देखा। मुझे विश्वास हो गया कि भगवान हैं।
- पीके शर्मा, पड़ोसी

सुनील का घर तो दूर गली में भी पहले कभी इस बंदर को नहीं देखा। सबसे आश्चर्यजनक बात ये रही कि इसने न तो किसी को घुड़की दी और न ही कोई सामान छेड़ा। जरूर सुनील से इसका कोई रिश्ता था।
- ब्रिजेश कुमार, पड़ोसी

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