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हाईकोर्ट का आदेश, सरकारी सुरक्षा के लिए लगेंगे पैसे

Thu, 07 Jan 2016 04:09 AM IST
Updated Thu, 07 Jan 2016 04:09 AM IST
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money will be charged for government security from witnesses

सरकारी सुरक्षा प्राप्त करने के लिए अब आम आदमी को अपनी जेब ढीली करनी पड़ेगी। सुरक्षा पर आने वाले खर्च का एक हिस्सा सुरक्षा प्राप्त करने वाले व्यक्ति को देना होगा।

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शासन ने सिक्योरिटी गार्ड मुहैया कराने की नीति संशोधित करते हुए जिला स्तरीय और राज्य स्तरीय समितियों की मनमानी समाप्त कर दी है। अब व्यक्ति की वार्षिक आय के आधार पर तय किया जाएगा कि उसे सिक्योरिटी का कितना प्रतिशत व्यय स्वयं वहन करना होगा।
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प्रमुख सचिव गृह देवाशीष पांडा ने बुधवार को हाईकोर्ट में उपस्थित होकर इस नई नीति की जानकारी दी। वाराणसी के दवा व्यवसायी बलराम पांडेय की याचिका पर सुनवाई करते समय कोर्ट के समक्ष यह तथ्य आया कि सुरक्षा गार्ड उपलब्ध कराने में लिए जाने वाले खर्च को लेकर सरकार की कोई नीति नहीं है।
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सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और न्यायमूर्ति वीके मिश्र की खंडपीठ ने सरकार को इस संबंध में अपनी नीति बताने का निर्देश दिया था। स्थायी अधिवक्ता रमेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए एक गाइड लाइन तैयार की गई है।

गवाहों को गार्ड के लिए देना होगा पैसा

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इसके तहत जघन्य अपराधों में गवाही देने वालों को जान का खतरा होने पर दस प्रतिशत व्यय पर गार्ड दिया जाएगा। यदि गवाह की आर्थिक स्थिति खराब है और खर्च उठाने में अक्षम है तो राज्य स्तरीय समिति इस विचार कर निशुल्क गनर उपलब्ध कराएगी।

पांच लाख रुपये की वार्षिक आय वाले व्यक्ति को 25 प्रतिशत, पांच से अधिक और 15 लाख रुपये की आय वाले को 50 प्रतिशत तथा 15 से 25 लाख रुपये की वार्षिक आय वाले को 75 फीसदी और इससे अधिक की आय वाले को सौ फीसदी खर्च पर गनर दिया जाएगा।

इस गाइड लाइन के जारी होने के बाद ऊंची पहुंच वाले लोगों को मुफ्त में सरकारी गनर नहीं मिल सकेगा। वीवीआईआईपी, वीआईपी, सरकारी अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की सुरक्षा के लिए गाइड लाइन पहले से मौजूद है। आम नागरिकों के लिए ऐसी गाइड लाइन अब तक नहीं थी।

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