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ये हैं 'रामभक्त' इस्लाम, सुनाते हैं श्रीराम कथा

Thu, 22 Oct 2015 08:59 AM IST
Updated Thu, 22 Oct 2015 08:59 AM IST
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mohammed islam involved in shri ram katha

वो पत्थर, ये खंजर छुपाए हुए हैं...असल में इन्हें गलत फहमियां हो गईं हैं। श्रीराम कथावाचक, गायक मोहम्मद इस्लाम कहते हैं कि आखिर किस-किस से कहूं कि मुझे मेरी 53 साल की उम्र तक कोई मुसलमान नहीं मिला, जिसने मेरी राम भक्ति का विरोध किया हो...।

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दूर-दूर गया, खांटी मुस्लिम मोहल्लों में गया (जिन्हें बदनाम किया गया), बड़े उलेमाओं से लेकर आम मुसलिम ने बस मेरी तारीफ ही की...और जारी रखने की सलाह दी। फिर विवाद क्यों, झगड़ा किस बात का। अगर एक-दूसरे की मान्यताओं को खुलकर मान दें तो ‘पत्थर और खंजर’ वाले चंद लोग रावण की तरह नष्ट हो जाएंगे।
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मिर्जापुर नगर के पहाड़ी ब्लॉक के धर्मदेवा गांव निवासी इस्लाम साहब को ‘जिले के तुलसी’ का खिताब हासिल है। पूर्वांचल भर के श्रीराम कथा आयोजक उनके दरवाजे पर उन्हें बुक करने के लिए बैठे ही रहते हैं। मुस्लिम धर्म में पूरी आस्था रखने वाले इस्लाम लगभग हर रोज कहीं न कहीं राम भक्ति सरिता बहाने निकल पड़ते हैं।

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भगवान श्रीराम के नाम में है एक जादू...

mohammed islam involved in shri ram katha

इस्लाम बचपन से ही गांव में होने वाले श्रीरामचरितमानस पाठ में जाने लगे, फिर पढ़ने लगे और धीरे-धीरे इतना रमे कि भक्तिमय होकर रामचरित सस्वर गाने लगे। जीविका के लिए दर्जीगिरी करने मुंबई गए, मगर राम भक्ति और लोगों के प्रेम ने वापस बुलाया तो वह सब छोड़कर भाग आए।

हिंदू-मुसलिम सबके प्रिय इस्लाम को दो बेटों और पांच बेटियों में तीन की शादी करने में कोई दिक्कत पेश नहीं आई। समधियान भी संबंध जोड़कर गौरवान्वित महसूस करते हैं। कहते हैं कि सारे इंतजाम चाहे ‘प्रभु कहो-चाहे अल्लाह’ वो खुद कर देता है। इतना प्रेम मिलता है कि अब कुछ नहीं चाहिए।

वह कहते हैं कि भगवान श्रीराम के नाम में वह जादू है जिसे जपकर मानव अपने जीवन में सभी दुर्लभ वस्तुओं को प्राप्त कर सकता है। श्रीरामचरितमानस मात्र पुस्तक नहीं है...ज्ञान का सागर है। मानस की बातों पर चला जाए तो दुनिया में सिर्फ संस्कार, प्रेम रहेगा...बाकी सब नष्ट हो जाएगा। मानस की चौपाइयों में छिपे भावों को उभारते हुए मो. इस्लाम की प्रस्तुति इतनी भावपूर्ण और प्रभावित करने वाली रहती है कि श्रोता मुग्ध होकर मानस रस में डूबने-उतराने लगता है।

श्रीराम कथा के लिए बढ़ रही इस्लाम साहब की ‘मांग’

mohammed islam involved in shri ram katha

श्रीरामचरितमानस के प्रति समर्पित भाव से जुड़े होने के कारण क्षेत्र के लोग उन्हें रामलीला मंचन में व्यास की गद्दी पर मानस की चौपाइयों को प्रस्तुत करने के लिए बुलाने लगे। दूरदर्शन और आकाशवाणी के ग्रेड प्राप्त कर चुके कथा गायक इस्लाम मां विंध्यवासिनी देवी के मंदिर और प्राचीन तारकेश्वर महादेव मंदिर से लेकर इलाहाबाद कुंभ में एक माह तक कथा गायन कर चुके हैं।

जहां पहले हिंदू कथावाचक ही बुलाए जाते थे वहां भी अब इस्लाम साहब की ‘मांग’ है। मिर्जापुर सर्रोई छानबे, बजरंग रामलीला कमेटी के अध्यक्ष केएम तिवारी कहते हैं कि इस्लाम गंगा जमुनी तहजीब की मिसाल कायम कर रहे हैं। श्रीरामचरितमानस के प्रति समर्पित भाव से जुड़े हैं। वह जब बोलते हैं राम भक्ति जीवंत हो जाती है। कांडों के श्लोकों तक का उच्चारण बेहद शुद्ध होता है। हमारी रामलीला कमेटी कई वर्ष से वह व्यास की भूमिका निभा रहे हैं।

'मोहम्मद इस्लाम को देखकर-सुनकर लगता है कि दिक्कत है कौमों में नहीं, कहीं और है।... और उसे हम नजरअंदाज कर रहे हैं। दरअसल एक नक्कारखाना है तूतियों और दूसरे परिंदों की आवाजें सुनी नहीं जा रही हैं। सबसे बड़ी जरूरत है कि ऐसे सुरों के पहचान की जो अलग हैं ही नहीं...एक में गुंथे हुए हैं तभी तो अमन का तराना सबसे सुरीला होता है।'
- व्योमेश शुक्ल, वरिष्ठ रंगकर्मी

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