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आतंकवाद से लड़ने के लिए मोदी का आह्वान

Sat, 21 Nov 2015 11:06 PM IST
Updated Sat, 21 Nov 2015 11:06 PM IST
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Modi urges ASEAN to fight against terrorism

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रमुख वैश्विक चुनौती आतंकवाद से निपटने के लिए आसियान के साथ सहयोग बढ़ाने का आह्वान किया है। शनिवार को उन्होंने दक्षिण चीन सागर के क्षेत्रीय और समुद्री विवादों को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने की जरूरत को भी रेखांकित किया। उन्होंने दस सदस्यीय समूह के साथ समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती निरोधक एवं मानवीय और प्राकृतिक आपदा राहत जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग के लिए विशेष योजना बनाने का सुझाव दिया।

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आसियान-भारत सम्मेलन की अपनी शुरुआती टिप्पणी में प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘आतंक एक प्रमुख वैश्विक चुनौती के रूप में उभरा है जो हम सबको प्रभावित कर रहा है। आसियान सदस्यों के साथ हमारा बेहतरीन द्विपक्षीय सहयोग है। और, हमें यह देखना चाहिए कि अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक संधि को समर्थन करते हुए हम किस प्रकार क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हम अपने सहयोग को बढ़ा सकते हैं।’
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तीन दिन की आसियान-भारत और पूर्वी एशिया सम्मेलन में हिस्सा लेने आए मोदी ने कहा, ‘तेजी से बदलता हमारा क्षेत्र अनिश्चितता के समय से निकलकर एक शांतिपूर्ण और खुशहाल भविष्य की ओर जा रहा है। क्षेत्रीय आर्किटेक्चर को  परिभाषित करने में आसियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।’ साझा समृद्धि के लिए कनेक्टिविटी को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत-म्यांमार- थाइलैंड त्रिपक्षीय राजमार्ग परियोजना में अच्छी तरक्की हो रही है और इसे 2018 में पूर्ण हो जाना चाहिए। इसके अलावा सभी आसियान देशों के लिए भारत जल्द ही इलेक्ट्रॉनिक वीजा जारी करेगा।
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लाइन ऑफ क्रेडिट का प्रस्ताव

Modi urges ASEAN to fight against terrorism

भारत-आसियान सहयोग और आर्थिक साझेदारी के लिए विज्ञान, तकनीक और आविष्कारों को महत्वपूर्ण बताते हुए उन्होंने कहा, ‘हम आसियान-भारत विज्ञान एवं तकनीक विकास फंड को मौजूदा दस लाख डॉलर से बढ़ा कर 50 लाख डॉलर करेंगे।’ आसियान-भारत आविष्कार मंच बनाकर भारत कम लागत की तकनीकों का कॉमर्शियलाइजेशन, तकनीकों के हस्तांतरण और सहयोगी शोध एवं विकास परियोजनाओं को नई दिशा देना चाहता है। आसियान समूह में ब्रूनेई, कंबोडिया, इंडोनेशिया, लाओस, मलयेशिया, म्यांमार, फिलीपींस, सिंगापुर, थाइलैंड और वियतनाम शामिल हैं।

प्रधानमंत्री ने भारत और आसियान के बीच भौतिक और डिजिटल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देने वाली परियोजनाओं को प्रोत्साहित करने के लिए एक अरब डॉलर के लाइन ऑफ क्रेडिट का प्रस्ताव किया है। उन्होंने कहा कि आसियान आने वाले और बाहरी निवेश के मामने में सबसे बड़ा साझेदार रहा है। मोदी ने कहा, ‘आर्थिक साझेदारी की ज्यादातर संभावनाओं को अभी तक इस्तेमाल नहीं किया गया है। मुझे भरोसा है कि हमारी अर्थव्यवस्था में बढ़ोतरी के साथ ही हमारे कारोबार और निवेश में वृद्धि होगी। हमारे सहयोग के ढांचे में हुई तरक्की से भरोसा जग सकता है। जुलाई 2015 में हुआ हमारा ट्रेड इन सर्विसेज और निवेश समझौता बेहतर भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।’

आसियान के लिए भारत छठा सबसे बड़ा कारोबारी साझेदार है। भारत और आसियान के बीच 2014-15 में 76.52 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। आसियान को भारत द्वारा किया गया निर्यात 31.81 अरब डॉलर और निर्यात 44.71 अरब डॉलर का रहा। प्रधानमंत्री ने कहा, ‘मुझे खुशी है कि तात्कालिक गिरावट के बाद हमारा कारोबार 2014-15 में बढ़ कर 76.5 अरब डॉलर का रहा और इसी प्रकार दोनों दिशाओं में हुए निवेश में भी बढ़ोतरी हुई। साढ़े सात फीसदी की वृद्धि दर के साथ ही भारत विश्व की सबसे तेजी से बढ़ती महत्वपूर्ण अर्थव्यवस्था है।’

‘गगन’ की सेवाओं की पेशकश

Modi urges ASEAN to fight against terrorism

वियतनाम स्थित भारत-आसियान की अंतरिक्ष के क्षेत्र में सहयोगी परियोजना के बारे में उन्होंने कहा कि इसमें ठोस तरीके से प्रगति हो रही है। यह जल्द ही पूरा हो जाएगा। उन्होंने कहा, ‘भारत आसियान को भारत में ही विकसित जीपीएस एडेड जियो ऑगमेंटेड नैविगेशन या गगन की सेवाओं की पेशकश भी करता है जो एडवांस्ड नैविगेशन, स्थानिक सहायता और सूचना सुविधाएं उपलब्ध कराता है।’

इतना ही नहीं मोदी ने आसियान के साथ स्थाई समु्द्री विकास या ब्लू इकोनॉमी के क्षेत्र में सहयोग का प्रस्ताव भी रखा। प्रधानमंत्री ने समु्द्र को भविष्य की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताते हुए कहा कि यह खाद्य सुरक्षा, दवा और स्वच्छ ऊर्जा का भी स्रोत होगा। उन्होंने कहा कि भारत ने कई समु्द्री देशों के साथ अपना सहयोग बढ़ाया है।

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