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स्वच्छता के नायकों को देश से रूबरू कराएंगे मोदी

Thu, 01 Oct 2015 07:35 PM IST
Updated Thu, 01 Oct 2015 07:35 PM IST
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Modi to introduce leaders of Swach Bharat Abhiyaan

स्वच्छ भारत मिशन के जरिए देश में स्वच्छता की अलख जगाने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राष्ट्र के सामने स्वच्छ भारत अभियान के रीयल नायकों को उभारेंगे। इस प्रयास में प्रधान मंत्री कार्यालय ने अभियान के वास्तविक नायकों को दिल्ली लाकर देश से रूबरू कराने का निर्णय लिया है।

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बताया जा रहा है कि पहले चरण में 7 अक्टूबर को स्वच्छ भारत के 13 नायकों को देश के सामने रूबरू कराया जाएगा। तो आगामी 26 जनवरी को ऐसे 101 नायकों को देश से रूबरू कराने का ताना-बाना बुना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार पीएमओ के निर्देश के बाद ही बिल गेट्स फाउण्डेशन इस अभियान से जुड़ा है।
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बीते दिनों मिलिंडा गेट्स और बिल गेट्स ने पीएम मोदी से मुलाकात में स्वच्छ भारत मिशन से जुड़कर काम करने की इच्छा जताई थी।

सूत्रों के अनुसार पीएमओ ने गेट्स फाउण्डेशन को केंद्र सरकार के ग्रामीण विकास और पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय के साथ मिलकर नायकों को उभारने के काम में जुटने को कहा था। यही वजह है कि 7 अक्टूबर का आयोजन दोनों संयुक्त रूप से कर रहे हैं।
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तभी मनी ईद जब गांव हुआ खुले में शौच मुक्त

Modi to introduce leaders of Swach Bharat Abhiyaan

7 अक्टूबर को देश के सामने चमकने वाले स्वच्छ भारत मिशन के रीयल नायकों में शुमार छत्तीसगढ़ के राजनंदगांव की केसला ग्राम पंचायत सचिव रशीदा रवानी ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्होंने प्रण लिया था कि जब तक उनका गांव खुले में शौच की समस्या से मुक्त नहीं होगा।

तब तक वे ईद नहीं मनाएंगी। उन्होंने अपने केसला गांव को खुले में शौच मुक्त बनाने का बीड़ा अप्रैल 2015 में उठाया। 18 जुलाई को ईद थी। मगर गांव खुले में शौच मुक्त 20 जुलाई को बन पाया। इसलिए गांव के सभी लोगों ने धर्म के भेदभाव से उपर उठकर 20 जुलाई को ईद मनाई। सबके घरों में सेवइयां बनीं। केसला गांव पूरी तरह खुले में शौच से मुक्त हो गया है। रशीदा ने गांव वालों को प्रेरित कर 220 शौचालय बनवाए हैं।

सूबे के इसी राजनंदगांव जिले के दूसरे नायक मिथिलेश हैं। विकलांगता से ग्रसित मिथलेश बोल नहीं सकते हैं। लेकिन घर-घर में शौचालय बनवाने की उनकी कोशिश ने लोगों को दांत तले उंगली दबाने पर विवश कर दिया है।

मिथिलेश के साथ जुडे़ बारनबेरी के पंचायत सचिव मोतीराम खोबरागड़े ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि विकलांगता के प्रभाव के कारण मिथिलेश बोलते नहीं है। मगर शौचालय को लेकर उन्होंने गांव, पंचायत और जिले को जगा दिया है। सबसे पहले उन्होंने अपने घर में शौचालय बनवाया। उसके बाद गांव वालों से हाथ जोड़ा। उनके लगन को देखते हुए ग्राम पंचायत ने उन्हें ट्राईसाइकिल भेंट की। उसपर शौचालय का मॉडल और माइक लगाया गया।

वे गांव-गांव जाकर माता-बहनों से इशारों में हाथ जोड़कर घर में शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित करते हैं। उनका प्रयास रंग लाया है। गांव में 224 शौचालय बन गए हैं। गांव खुले में शौच की समस्या से मुक्त हो गया है। अब वे अन्य गावों को प्रेरित कर रहे हैं।

वहीं देती हैं आर्शीवाद जिस घर होता है शौचालय

Modi to introduce leaders of Swach Bharat Abhiyaan

ऐसे ही नायकों में भोपाल की किन्नर संजना हैं। एक सामाजिक संस्था से प्रेरित होकर संजना ने लोगों को घर में शौचालय बनाने की प्रेरणा देने का नायाब तरीका अपनाया है।

ये अमूमन किन्नर घर में बच्चा पैदा होने या शादी ब्याह के शुभ मौके पर आशीर्वाद देने आते हैं। लेकिन संजना अपने साथियों के साथ उन्हीं घरों में आशीर्वाद देने जाती हैं जिनमें शौचालय बने हों।

बकायदा ये उन घरों पर हरी बिंदी लगाती हैं, जिनमें शौचालय बने और चालू हैं। वरना उस घर पर लाल बिंदी चस्पा कर देते हैं।

वहीं राजस्थान के अजमेर में मदन नाथ कालबेलिया ने अपने गांव में अपनी मूंछ का हवाला देकर गांववालों को शौचालय बनवाने के लिए प्रेरित किया है। 15 दिनों में उनकी प्रेरणा से 60 लोगों ने शौचालय बनवाए हैं।

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