मोदी ने तोड़ा नियम, राहुल के गढ़ में घुसने का फैसला
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शीर्ष राजनीतिक विरोधी के किले में दाखिल न होने के अलिखित नियम को ताक पर रखते हुए भाजपा ने राहुल गांधी के गढ़ में घुसने का मन बनाया है। उसके पीएम पद के दावेदार 5 मई, सोमवार को अमेठी में रैली को संबोधित करेंगे।
भाजपा की तरफ से उत्तर प्रदेश के प्रभारी और मोदी के सबसे करीबी अमित शाह ने शुक्रवार का दिन गांधी परिवार के किले अमेठी में बिताया। इसके बाद यह फैसला किया गया।
शाह ने रॉबर्ट्सगंज और गाजीपुर में अपनी रैलियां रद्द कर पार्टी उम्मीदवार स्मृति ईरानी के लिए समर्थन जुटाने की योजनाओं पर शीर्ष पार्टी कार्यकर्ताओं से मुलाकात की।
बनारस में कांग्रेस भी करेगी पलटवार?
अमित शाह ने कहा, "पहले हम उत्तर प्रदेश की सभी 80 लोकसभा सीटों के लिए लड़ रहे थे। इस बार हम अमेठी जीतने के लिए लड़ रहे हैं।" पहले खबर आई थी कि उत्तर प्रदेश में पार्टी नेताओं से आग्रह के बाद भाजपा अमेठी में मोदी की रैली आयोजित करने का मन बना रही है।
ऐसी भी खबर आ रही है कि अगर मोदी इस योजना पर आगे बढ़ते हैं, तो कांग्रेस भी उनकी सीट पर रैली कर सकती है। कांग्रेसी नेता ने कहा, "हम करीबी निगाह बनाए हुए हैं। अगर वो अमेठी जाते हैं तो हम समुचित रूप से प्रतिक्रिया देंगे।
कांग्रेस नेतृत्व वाराणसी में प्रचार अभियान और रणनीति पर एक-दो दिन में फैसला कर सकता है। बनारस में 12 मई को चुनाव होना और चुनाव प्रचार की अंतिम तारीख 10 मई है। ऐसे में कांग्रेस के पास अभी वक्त है।
सोमवार को मोदी की रैली
इसके अलावा लालकृष्ण आडवाणी, सुषमा स्वराज और अरुण जेटली जैसे भाजपा के वरिष्ठ नेता भी स्मृति ईरानी के लिए प्रचार कर सकते है। इस प्रचार अभियान की शुरुआत कल्याण सिंह करेंगे।
भाजपा के कार्यकर्ताओं को सचेत रहने के लिए कहा गया है। उन्हें ज्यादा से ज्यादा लोगों को जुटाने के लिए कहा गया है। रैली के लिए जमीनी स्तर पर 38 पूर्णकालिक वॉलेंटियर तैनात हैं और गुजरात से भी टीमें आई हैं।
राहुल को स्मृति, कुमार विश्वास की चुनौती
भाजपा इस बात की पूरी कोशिश कर रही है कि टीवी बहू स्मृति ईरानी, राहुल गांधी को कड़ी टक्कर दें, जिनके प्रचार में इन दिनों प्रियंका दिलोजान से लगी हुई हैं।
अमेठी में इस बार दिलचस्प जंग देखने को मिल रही है। राहुल गांधी और स्मृति ईरानी के अलावा कुमार विश्वास ने भी बीते कुछ दिनों में अमेठी में काफी मेहनत की है। हालांकि, प्रियंका के प्रचार के सामने आप और भाजपा, दोनों कमजोर दिख रहे हैं।
कांग्रेस का पुराना गढ़ है अमेठी
शायद इसलिए अंतिम वक्त में भाजपा ने मोदी की रैली की बात उठाई है और दूसरी तरफ अरविंद केजरीवाल, विश्वास के लिए वोट मांगने अमेटी पहुंच गए हैं।
अमेठी 1980 से नेहरू-गांधी परिवार का किला समझी जाती है, जब संजय गांधी वहां से चुनाव लड़े थे। इसके बाद राजीव गांधी वहां से चार बार लड़े। सोनिया गांधी ने भी यहां की नुमाइंदगी की, लेकिन बाद में रायबरेली चली गईं और राहुल के लिए सीट छोड़ दी।
इससे पहले चुनावों में आम तौर पर यह देखा गया कि भाजपा और कांग्रेस एक-दूसरे के शीर्ष नेताओं की सीट पर प्रचार करने से बचते रहे हैं। लेकिन इस बार मामला अलग और लड़ाई सीधी हो रही है।